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खाकी के भय से घरों से गायब हैं पुरुष
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गाजीपुर/कठवामोड़। कठवामोड़ पुल के पास निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सड़क जाम के दौरान किए गए पथराव में हेड कांस्टेबल की मौत के मामले में आरोपियों की तलाश जारी है। अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीदचक गांव में निरंतर छापेपारी से लोग भयभीत हैं। ऐसे में गांव में रहने वाले युवा से लेकर बुजुर्ग तक घर छोड़ कर फरार हैं। घर में सिर्फ भय के माहौल में महिलाएं मौजूद हैं।
कठवामोड़ पर सड़क जाम के दौरान हिंसा का जिम्मेदार चाहे जो भी हो, लेकिन हिंसा ने सैकड़ों घरों की शांति को छीन लिया है। इस मामले में नोनहरा थाना पुलिस ने 32 नामजद और 150 अज्ञात के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इससे अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीदचक गांव के लोगों के होश उड़ गए हैं। पुलिस किसी भी समय गांव में धमक जा रही है। इसके भय से पुरुष गांव से नदारद हैं। घरों में सिर्फ महिलाएं और मासूम बच्चे ही मौजूद हैं। पति के इधर-उधर रहने के बाद भी पत्नियां इस बात से चिंतित हैं कि कहीं पुलिस को यह जानकारी न हो जाए कि उनके पति कहां हैं और वह उन्हें गिरफ्तार न कर लें। अटवा गांव के मल्लाह टोली की महिलाओं ने बताया कि हम लोगों के घरों के पुरुषों से निषाद पार्टी से कोई लेना-देना नहीं था। हम लोगों का कसूर इतना है कि हम लोग निषाद है, इसलिए पुलिस हम लोगों को बेवजह परेशान कर रही है। अभी पता नहीं कई दिनों तक पुलिस के खौफ को झेलना पड़ेगा। । बीते शनिवार को नोनहरा थाना के कठवामोड़ पुल के पास निषाद पार्टी द्वारा जाम के दौरान हुई हिंसा की आग में अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीद चक गांव जल रहा है। गिरफ्तारी के लिए गांव में कभी भी पुलिस आ सकती है, इस आशंका से लोग सहमें हुए हैं। लोगों में दहशत का आलम यह है कि मकान का खिड़की-दरवाजा बंद कर अंदर दुबके रह रहे हैं। दबिश के नाम पर पुलिस द्वारा रविवार की रात दोनों गांव में तोड़-फोड़ किए जाने और महिलाओं की पिटाई किए जाने से महिलाओं में और भी भय व्याप्त हो गया है। रात के अंधेरे की कौन कहे, दिन के उजाले में भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। सहमी महिलाएं घरों की छतों और खिड़की से बाहर देखती रही।
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कठवामोड़ पर सड़क जाम के दौरान हिंसा का जिम्मेदार चाहे जो भी हो, लेकिन हिंसा ने सैकड़ों घरों की शांति को छीन लिया है। इस मामले में नोनहरा थाना पुलिस ने 32 नामजद और 150 अज्ञात के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इससे अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीदचक गांव के लोगों के होश उड़ गए हैं। पुलिस किसी भी समय गांव में धमक जा रही है। इसके भय से पुरुष गांव से नदारद हैं। घरों में सिर्फ महिलाएं और मासूम बच्चे ही मौजूद हैं। पति के इधर-उधर रहने के बाद भी पत्नियां इस बात से चिंतित हैं कि कहीं पुलिस को यह जानकारी न हो जाए कि उनके पति कहां हैं और वह उन्हें गिरफ्तार न कर लें। अटवा गांव के मल्लाह टोली की महिलाओं ने बताया कि हम लोगों के घरों के पुरुषों से निषाद पार्टी से कोई लेना-देना नहीं था। हम लोगों का कसूर इतना है कि हम लोग निषाद है, इसलिए पुलिस हम लोगों को बेवजह परेशान कर रही है। अभी पता नहीं कई दिनों तक पुलिस के खौफ को झेलना पड़ेगा। । बीते शनिवार को नोनहरा थाना के कठवामोड़ पुल के पास निषाद पार्टी द्वारा जाम के दौरान हुई हिंसा की आग में अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीद चक गांव जल रहा है। गिरफ्तारी के लिए गांव में कभी भी पुलिस आ सकती है, इस आशंका से लोग सहमें हुए हैं। लोगों में दहशत का आलम यह है कि मकान का खिड़की-दरवाजा बंद कर अंदर दुबके रह रहे हैं। दबिश के नाम पर पुलिस द्वारा रविवार की रात दोनों गांव में तोड़-फोड़ किए जाने और महिलाओं की पिटाई किए जाने से महिलाओं में और भी भय व्याप्त हो गया है। रात के अंधेरे की कौन कहे, दिन के उजाले में भी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। सहमी महिलाएं घरों की छतों और खिड़की से बाहर देखती रही।
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