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अभियुक्त को 10 वर्ष का सश्रम कारावास
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गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-चार विष्णुचंद्र वैश्य की अदालत ने गहमर थाना क्षेत्र में साढ़े पांच वर्ष पूर्व हुए आपराधिक मानव वध के मामले में अभियुक्त को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20500 अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अर्थदंड की राशि से 10000 मृतक की पत्नी को देने का आदेश दिया है।
प्रकरण के मुताबिक गहमर थाना क्षेत्र के गहमर गांव निवासी बलवंत सिंह कुशवाहा पुत्र रामसूरत ने थाना में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि आठ मई 2014 को उसके बेटे जितेंद्र कुशवाहा का तिलक था जिसमें रिश्तेदार और गांव के लोग आए हुए थे। रात आठ बजे गांव के ही अमरनाथ अपने दो-तीन साथियों के साथ आए और उसके घर के लोगों तथा रिश्तेदारों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडों से मारने लगे। उनके मारने से दामाद कमलेश कुशवाहा पुत्र ईश्वर कुशवाहा के सिर में गंभीर चोट आई। चोटिल को लेकर भदौरा प्राथमिक स्वास्थ्य पर गए जहां से डॉक्टरों ने सदर अस्पताल गाजीपुर के लिए रेफर कर दिया। सदर अस्पताल से भी उन्हें वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। वाराणसी में एक सर्जिकल सेंटर में इलाज चल रहा था उसी दौरान 17 मई 2014 को उनकी मृत्यु हो गई। तहरीर के आधार पर अमरनाथ कुशवाहा पुत्र दीनानाथ कुशवाहा के विरुद्ध धारा 304 और 352 भादवि के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत हुआ। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता शशिकांत सिंह ने सात गवाह परीक्षित कराए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को धारा 304 एवं 352 भादवि के अंतर्गत दोषी करार दिया। धारा 304 के अंतर्गत अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20000 अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का आदेश हुआ। अदालत ने धारा 352 के अंतर्गत अभियुक्त को तीन माह के कारावास और 500 अर्थदंड की सजा सुनाई।
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प्रकरण के मुताबिक गहमर थाना क्षेत्र के गहमर गांव निवासी बलवंत सिंह कुशवाहा पुत्र रामसूरत ने थाना में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई कि आठ मई 2014 को उसके बेटे जितेंद्र कुशवाहा का तिलक था जिसमें रिश्तेदार और गांव के लोग आए हुए थे। रात आठ बजे गांव के ही अमरनाथ अपने दो-तीन साथियों के साथ आए और उसके घर के लोगों तथा रिश्तेदारों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडों से मारने लगे। उनके मारने से दामाद कमलेश कुशवाहा पुत्र ईश्वर कुशवाहा के सिर में गंभीर चोट आई। चोटिल को लेकर भदौरा प्राथमिक स्वास्थ्य पर गए जहां से डॉक्टरों ने सदर अस्पताल गाजीपुर के लिए रेफर कर दिया। सदर अस्पताल से भी उन्हें वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। वाराणसी में एक सर्जिकल सेंटर में इलाज चल रहा था उसी दौरान 17 मई 2014 को उनकी मृत्यु हो गई। तहरीर के आधार पर अमरनाथ कुशवाहा पुत्र दीनानाथ कुशवाहा के विरुद्ध धारा 304 और 352 भादवि के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत हुआ। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता शशिकांत सिंह ने सात गवाह परीक्षित कराए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त को धारा 304 एवं 352 भादवि के अंतर्गत दोषी करार दिया। धारा 304 के अंतर्गत अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20000 अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का आदेश हुआ। अदालत ने धारा 352 के अंतर्गत अभियुक्त को तीन माह के कारावास और 500 अर्थदंड की सजा सुनाई।
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