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भाकपा माले ने तय की विधानसभा चुनाव की रणनीति
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भाकपा माले के जमानिया और सेवराई तहसील क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की संयुक्त बैठक करवनिया डेरा स्थित पार्टी कार्यालय पर शुक्रवार को हुई। इसमें विधानसभा चुनाव की रणनीति तय की गई। वक्ताओं ने कहा कि मजदूर, किसान, युवा विरोधी प्रदेश की सरकार को उखाड़ फेंकें।
भाकपा माले के जिला सचिव रामप्यारे राम ने कहा कि यह चुनाव ऐसे समय में होने जा रहा है जब डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस सिलिंडर, सरसों तेल सहित जरूरी उपभोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे ज्यादा मार मेहनतकश गरीबों और आम आदमी पर पड़ रही है। उनके सामने रोजगार न मिलने से रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कहा कि कारपोरेट परस्त कानूनों के लागू होने के बाद किसानों की जमीनें धीरे-धीरे उनके हाथ से निकल जाएगी। ठेके पर खेती और नया मंडी कानून किसानों को कारपोरेट एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के जाल में फंसाने की चाल है जो खेती को कारपोरेट कब्जे में ढकेल देगा। ऐसे में किसानों के पुश्तैनी रोजगार का साधन जमीन छिन जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम से देश के अन्न भंडारण पर कारपोरेट का कब्जा कराने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समाप्त करने की साजिश है। कहा कि रोजगार का सवाल आज राजनीतिक सवाल बन रहा है। इस सरकार में समाज का हर तबका परेशान है। उन्होंने इस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बुच्चीलाल, चंद्रावती देवी, पंचरतन, वकील, लालजी वनवासी, महेंद्र राम, रमाशंकर राजभर, भरथ पासी, गोरख राजभर, विजयी वनवासी, सुकरा देवी, रोहित बिंद, विजय कुमार, केवला देवी, सुरजी देवी, कृष्णानंद ने विचार व्यक्त किया। संचालन पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया।
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भाकपा माले के जिला सचिव रामप्यारे राम ने कहा कि यह चुनाव ऐसे समय में होने जा रहा है जब डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस सिलिंडर, सरसों तेल सहित जरूरी उपभोग की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे ज्यादा मार मेहनतकश गरीबों और आम आदमी पर पड़ रही है। उनके सामने रोजगार न मिलने से रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कहा कि कारपोरेट परस्त कानूनों के लागू होने के बाद किसानों की जमीनें धीरे-धीरे उनके हाथ से निकल जाएगी। ठेके पर खेती और नया मंडी कानून किसानों को कारपोरेट एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के जाल में फंसाने की चाल है जो खेती को कारपोरेट कब्जे में ढकेल देगा। ऐसे में किसानों के पुश्तैनी रोजगार का साधन जमीन छिन जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम से देश के अन्न भंडारण पर कारपोरेट का कब्जा कराने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को समाप्त करने की साजिश है। कहा कि रोजगार का सवाल आज राजनीतिक सवाल बन रहा है। इस सरकार में समाज का हर तबका परेशान है। उन्होंने इस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया।
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इस अवसर पर बुच्चीलाल, चंद्रावती देवी, पंचरतन, वकील, लालजी वनवासी, महेंद्र राम, रमाशंकर राजभर, भरथ पासी, गोरख राजभर, विजयी वनवासी, सुकरा देवी, रोहित बिंद, विजय कुमार, केवला देवी, सुरजी देवी, कृष्णानंद ने विचार व्यक्त किया। संचालन पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने किया।
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