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वर्ष 1980 के बाद कांग्रेस को नसीब नहीं हुई जीत

Tue, 18 Jan 2022 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Jan 2022 11:15 PM IST
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Congress did not get victory after 1980
आजादी के बाद से आज तक कई बार चुनाव हो चुके हैं। जमानिया विधानसभा 1957 में अस्तित्व में आया। पूर्व में दिलदारनगर और जमानिया अलग-अलग विधानसभा था। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में दोनों विधानसभा को मिलाकर एक विधानसभा जमानिया कर दिया गया। वर्ष 2012 में कुल मतदाताओं की संख्या 333168 थी। इसमें से 2 लाख नौ सौ मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस विधानसभा क्षेत्र से सभी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कराई लेकिन आज भी क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर है। लोग सड़क, बिजली, पानी, चिकित्सालय जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस विधानसभा में सबसे अधिक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है लेकिन 1980 के बाद उसको जीत नसीब नहीं हुई।
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कांग्रेस यहां कमजोर हुई और उसके कमजोर होने के साथ ही यहां जनता दल और समाजवादी पार्टी का दबदबा बढ़ता चला गया। हालांकि इस विधानसभा ने बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय जनता पार्टी के साथ निर्दलीय प्रत्याशी को भी एक बार जिताकर लखनऊ भेजा है। अब तक हुए चुनाव में 1957 में कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा, 1962 में कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा, 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रामसुंदर शास्त्री, 1969 में कांग्रेस के वशिष्ठ नारायण शर्मा, 1974 में भारतीय क्रांति दल के धर्म राम, 1977 में जनता दल के धर्म राम, 1980 में कांग्रेस के साहेब सिंह, 1985 में कांग्रेस के चौधरी लालता प्रसाद निषाद ने परचम लहराया था। वर्ष 1989 में निर्दल रविंद्र कुमार सिंह, 1991 में भारतीय जनता पार्टी की शारदा चौहान, 1993 में बहुजन समाज पार्टी के जयराम कुशवाहा, 1996 में समाजवादी पार्टी के कैलाश, 2002 में समाजवादी पार्टी के कैलाश यादव, 2007 में बहुजन समाज पार्टी के राजकुमार, 2012 में समाजवादी पार्टी के ओमप्रकाश सिंह और वर्ष 2017 में भाजपा की सुनीता सिंह इस विधानसभा से निर्वाचित हुईं। इस विधानसभा सीट पर शुरुआती दौर में कांग्रेस का वर्चस्व रहा जिसके बाद लगातार सत्ता का परिवर्तन होता रहा। कभी समाजवादी पार्टी बसर्पा और कभी भाजपा को क्षेत्र के लोगों ने विकास करने का मौका दिया। गौर करने वाली बात है कि कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी पार्टी का दो बार लगातार विधायक नहीं रहा।
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