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गंगा में आई बाढ़ से डूबा तटवर्ती इलाका

Tue, 01 Sep 2020 10:03 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 10:03 PM IST
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Coastal area submerged by Ganga floods
गाजीपुर। गंगा में तेजी से बढ़ रहे जलस्तर के कारण तटवर्ती इलाकों में लोग चिंतित हैं। सालों से डूब क्षेत्र के बाढ़ व कटान पीडि़तों के दिन का चैन और रात की नींद उड़ गई है। सैदपुर इलाके में आई बाढ़ के कारण किसनों की फसल डूब गई है। नदी किनारे का इलाका पानी से भरने लगा है। गंगा नदी के साथ गोमती और गांगी नदी का भी जलस्तर बढ़ने से नदी नाले और खेतों के रास्ते अब पानी आबादी की तरफ बढ़ने लगा हैं। देखा जाए तो एक बार फिर नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।वर्तमान में सर्वाधिक खतरा सैदपुर तहसील में देखने को मिल रहा है। गंगा समेत अन्य सहायक नदियां गोमती, गांगी, टोंस, मगई आदि का भी जलस्तर बढ़ने लगा है। वर्तमान में नदी तलहटी से 68.8 मीटर ऊपर बह रही हैं। इनके बढ़ाव के चलते डूबे क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो रही हैं। गंगा की बाढ़ से किनारे के दर्जनभर से अधिक गांव नदी के निशाने पर हैं। यहां खतरा मंडराने लगा है। आलम यह है गंगा का जलस्तर बढ़ने से जमानिया, मुहम्मदाबाद और सदर तहसील के डूब क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर धीरे-धीरे होना शुरू हो गया है। हालांकि जिला मुख्यालय पर गंगा नदी अभी खतरा बिंदु से काफी नीचे हैं। लेकिन निचले इलाकों व नालों से होकर बाढ़ का पानी किनारे पर बोई गई सब्जियों एवं फसलों को नुकसान पहुंचाने लगा है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे हैं। फिर भी गंगा के किनारे के गांव औडि़हार, वराहरूप घाट, पटना, सादीभादी, राम तवक्का, जोहरगंज, कोल्हुआ टोला, पटना, फुलवारी, गायघाट, टोडरपुर, देवचंदपुर, चकेरी, रामपुर माझा, जेबल ,दुबैठा, आदि स्थानों के तराई क्षेत्र में बोई गई सब्जी की फसलें तथा रामतरोई, सरपुतिया, करेला, भिंडी, बोड़ा, सीताफल, लौकी, खीरा, चिचड़ा का अस्तित्व समाप्त होने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। इन गांव में हरे चारे, ज्वार बाजरे तथा मक्का की फसलों का नुकसान होने लगा है। दूसरी पटना ग्राम में गोमती नदी सीधे आकर गंगा में मिलती हैं। अब गोमती भी गंगा के दबाव के चलते उफान लेने लगी है। गोमती के बाढ़ का खतरा किनारे के गांव पटना , हथौड़ा, कुसई खरौना, सिधौना, सूरजभान चक, नगरिया नाला, बहदिया, गौरी, तेतारपुर, गौरहट, बहुरा आदि पर मंडराने लगा है। तहसीलदार दिनेश कुमार ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। फिलहाल बाढ़ का कोई विशेष खतरा नहीं है। जरूरत पड़ने पर इससे निबटने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है। बाढ़ पर नजर रखने के लिए अधिकारी एवं कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है।
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टोंस नदी में घटाव जारी, कटान शुरू, किसान चिंतित
ताजपुरडेहमा। करीमुदीनपुर थाना क्षेत्र से होकर बहने वाली टोंस नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इससे कटान शुरू हो गया है। उपजाऊ भूमि के कटकर नदी में समाहित होने से किसान चिंतित हैं। अब तक कटान की वजह से सैकड़ों बीघा खेत नदी में विलीन हो चुका है। हर साल की तरह इस बार भी टोंस नदी शुरूआत में ही उफान पर थी। जिससे तटवर्ती किसानों की चिंता बढ़ती जा रही थी। नदी प्रतिवर्ष सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद करने के साथ ही कटान का जख्म भी देती रही है। इस बार भी नदी के घटने के साथ गोसलपुर गाँव के पास कटान शुरू हो गया है। गांव के रहने वाले किसान लल्लन सिंह, मदन सिंह, रामआसरे, बृजबिहारी, रामेश्वर आदि लोगों का कहना है कि लगभग 50 बीघे तक की जमीन गाँव की टोंस नदी में समा गया है। हर साल हो रहे इस कटान से किसान परेशान हैं। मदन जी का कहना है कि अगर नदी में ठोकर बन जाता है तो कटान रूक सकती है। नहीं तो आने वाले दिनों में हम लोग भूमि विहीन हो जाएंगे।
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