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Ghazipur News: बेहोशी के डॉक्टरों के प्रशिक्षित होने का दावा, जेआर को दिया जा रहा है प्रशिक्षणमेडिकल कॉलेज में 69 वेंटिलेटर पर टेक्नीशियन की तैनाती नहीं
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गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वर्तमान समय में 69 वेंटिलेटर हैं। इनमें छह जहां आईसीयू में हैं तो 10 के आसपास इमरजेंसी आईसीयू में लगाए गए हैं। जबकि अन्य स्टोर में सुरक्षित हैं।
हालांकि वेंटिलेटर के संचालन को लेकर अलग से कोई टेक्नीशियन की तैनाती नहीं की गई है। बेहोशी के डॉक्टर ही इनका संचालन करते हैं। दूसरी ओर जेआर को प्रशिक्षित करने का दावा किया जा रहा है।
कोरोना संक्रमण काल में शासन से चिकित्सकीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने का काम किया गया था। कोविड-19 से पहले और दूसरे चरण में ऑक्सीजन और चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की पर्याप्त उपलब्धता न होने से लोगों ने अपनी आंखों के सामने अपनों को जिंदगी और मौत से जूझते देखा था। महामारी ने चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी। इसके बाद सरकार ने जिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों को ऑक्सीजन प्लांटों से लैस किया। पर्याप्त मात्रा में चिकित्सकीय उपकरण भी मुहैया कराए गए। कुछ दिन बाद स्थितियां सामान्य होने के बाद वेंटिलेटर को अस्पताल प्रशासन की ओर से कक्ष में सुरक्षित कर दिया गया।
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इधर एक बार फिर दूसरे जनपदों और राज्यों में बढ़ते कोरोना के संक्रमण को देखते हुए इन उपकरणों के संचालन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गईं। ऐसे में आईसीयू और इमरजेंसी आईसीयू में वेेंटिलेटर को स्थापित कराने के साथ संचालन शुरू किया गया। वहीं अन्य को स्टोर कक्ष में रखा गया है।
सीएमएस डाॅ. राजेश सिंह ने बताया कि आईसीयू और नए बने इमरजेंसी आईसीयू कक्ष में वेंटिलेटर स्थापित हैं। इसके संचालन का काम बेहोशी के चिकित्सक करते हैं। वह इसमें दक्ष होते हैं। इनके द्वारा जेआर को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। शेष वेंटिलेटरोंं को सुरक्षित रखा गया है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर बाहर निकाला जाता है।
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हालांकि वेंटिलेटर के संचालन को लेकर अलग से कोई टेक्नीशियन की तैनाती नहीं की गई है। बेहोशी के डॉक्टर ही इनका संचालन करते हैं। दूसरी ओर जेआर को प्रशिक्षित करने का दावा किया जा रहा है।
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कोरोना संक्रमण काल में शासन से चिकित्सकीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने का काम किया गया था। कोविड-19 से पहले और दूसरे चरण में ऑक्सीजन और चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की पर्याप्त उपलब्धता न होने से लोगों ने अपनी आंखों के सामने अपनों को जिंदगी और मौत से जूझते देखा था। महामारी ने चिकित्सकीय व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी। इसके बाद सरकार ने जिला मुख्यालय स्थित अस्पतालों को ऑक्सीजन प्लांटों से लैस किया। पर्याप्त मात्रा में चिकित्सकीय उपकरण भी मुहैया कराए गए। कुछ दिन बाद स्थितियां सामान्य होने के बाद वेंटिलेटर को अस्पताल प्रशासन की ओर से कक्ष में सुरक्षित कर दिया गया।
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इधर एक बार फिर दूसरे जनपदों और राज्यों में बढ़ते कोरोना के संक्रमण को देखते हुए इन उपकरणों के संचालन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गईं। ऐसे में आईसीयू और इमरजेंसी आईसीयू में वेेंटिलेटर को स्थापित कराने के साथ संचालन शुरू किया गया। वहीं अन्य को स्टोर कक्ष में रखा गया है।
सीएमएस डाॅ. राजेश सिंह ने बताया कि आईसीयू और नए बने इमरजेंसी आईसीयू कक्ष में वेंटिलेटर स्थापित हैं। इसके संचालन का काम बेहोशी के चिकित्सक करते हैं। वह इसमें दक्ष होते हैं। इनके द्वारा जेआर को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। शेष वेंटिलेटरोंं को सुरक्षित रखा गया है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर बाहर निकाला जाता है।