{"_id":"69558d6beceeb8f5900ea838","slug":"carbide-guns-dried-the-tears-of-50-people-and-the-pupils-of-ten-turned-white-ghazipur-news-c-313-1-svns1020-144812-2026-01-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: कार्बाइड गन से सूख गए 50 लोगों के आंसू, दस की पुतली सफेद हुई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: कार्बाइड गन से सूख गए 50 लोगों के आंसू, दस की पुतली सफेद हुई
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। कार्बाइड गन से जनपद में 50 से ज्यादा लोगों की आंख ड्राई हो गई हैं। उनकी आंखों के आंसू सूख गए हैं। इस गंभीर बीमारी की चपेट में आने वाले मरीजों की उम्र 15 से 30 आयु वर्ग है।
यहीं नहीं यहां के करीब दस से अधिक मरीजों की पुतली सफेद हो चुकी है, जिससे उनकी रोशनी चली गई है। ग्रामीण इलाकों के मरीज ज्यादा हैं, जो मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
दीपावली के दौरान देशी पटाखा के नाम से चर्चित कार्बाइड गन बच्चों, किशोरों एवं युवकों की आंनों के लिए इतनी खतरनाक साबित हुई कि उनकी आंखों की रोशनी ही चली गई। मेडिकल कॉलेज के नेत्ररोग विभाग के सहायक आचार्य दिनेश यादव ने बताया कि दीपावली बीतने के करीब चार से पांच दिन बाद से ही ओपीडी में आंख संबंधित परेशानियों के मरीजों के आने का क्रम शुरू हो गया।
विज्ञापन
उस दौरान करीब दस से अधिक आठ से 20 आयु वर्ग के मरीज पहुंचे, जिनकी दोनों आंखों की पुतली पूरी तरह से सफेद हो चुकी थी। उन्हें उपचार के बाद तत्काल बीएचयू रेफर कर दिया गया। ऐसी स्थिति में सिर्फ आंखों की पुतली बदलने के सिवाय कोई उपाय नहीं है। यहीं नहीं अधिकांश मरीज इसमें वह शामिल थे, जिनकी शिकायत थी कि आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, धुंधलापन, किरकिरापन और भारीपन महसूस हो रहा है।
जब ऐसे मरीजों की जांच की गई तो पता चला कि उनके आंखों के लुब्रिकेंट ही सूख चुके हैं। हालांकि मरीजों को राहत देने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स (कृत्रिम आंसू) की तरह काम उसे डाला गया, कुछ देर के लिए राहत तो हुई, लेकिन फिर स्थिति इस जस की तस हो गई। ओपीडी में ऐसे प्रतिदिन दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं, जिनका उपचार चल रहा है।
विज्ञापन
गाजीपुर। कार्बाइड गन से जनपद में 50 से ज्यादा लोगों की आंख ड्राई हो गई हैं। उनकी आंखों के आंसू सूख गए हैं। इस गंभीर बीमारी की चपेट में आने वाले मरीजों की उम्र 15 से 30 आयु वर्ग है।
यहीं नहीं यहां के करीब दस से अधिक मरीजों की पुतली सफेद हो चुकी है, जिससे उनकी रोशनी चली गई है। ग्रामीण इलाकों के मरीज ज्यादा हैं, जो मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
दीपावली के दौरान देशी पटाखा के नाम से चर्चित कार्बाइड गन बच्चों, किशोरों एवं युवकों की आंनों के लिए इतनी खतरनाक साबित हुई कि उनकी आंखों की रोशनी ही चली गई। मेडिकल कॉलेज के नेत्ररोग विभाग के सहायक आचार्य दिनेश यादव ने बताया कि दीपावली बीतने के करीब चार से पांच दिन बाद से ही ओपीडी में आंख संबंधित परेशानियों के मरीजों के आने का क्रम शुरू हो गया।
विज्ञापन
उस दौरान करीब दस से अधिक आठ से 20 आयु वर्ग के मरीज पहुंचे, जिनकी दोनों आंखों की पुतली पूरी तरह से सफेद हो चुकी थी। उन्हें उपचार के बाद तत्काल बीएचयू रेफर कर दिया गया। ऐसी स्थिति में सिर्फ आंखों की पुतली बदलने के सिवाय कोई उपाय नहीं है। यहीं नहीं अधिकांश मरीज इसमें वह शामिल थे, जिनकी शिकायत थी कि आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, धुंधलापन, किरकिरापन और भारीपन महसूस हो रहा है।
जब ऐसे मरीजों की जांच की गई तो पता चला कि उनके आंखों के लुब्रिकेंट ही सूख चुके हैं। हालांकि मरीजों को राहत देने के लिए आर्टिफिशियल टियर्स (कृत्रिम आंसू) की तरह काम उसे डाला गया, कुछ देर के लिए राहत तो हुई, लेकिन फिर स्थिति इस जस की तस हो गई। ओपीडी में ऐसे प्रतिदिन दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं, जिनका उपचार चल रहा है।