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Ghazipur News: 15 वर्षों से चाय और बीड़ी के कश पर जिंदा हैं बुच्ची्
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नंदगंज। एक स्वस्थ मनुष्य को प्रतिदिन नाश्ता, भोजन व पानी की जरूरत होती है। इस बात को डॉक्टर भी स्वीकार करते हैं। अध्यात्म के क्षेत्र में योग के बल पर संत भोजन-पानी का त्याग कर देते हैं। लेकिन, सांसारिक जीवन जीने वाले हर व्यक्ति को प्रतिदिन भोजन व पानी की जरूरत होती है। लेकिन, मेडिकल साइंस को चुनौती दे रही हैं बेलसड़ी गांव की 60 वर्षीय बुच्ची। ये 15 वर्षों से चाय की चुस्की व बीड़ी के कश पर जिंदा हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी बुच्ची का अन्न -जल ग्रहण न करना लोगों में कौतूहल पैदा करता है। बगैर अन्न के बुच्ची। सामान्य जीवन जी रही हैं। पति लोकनाथ बिंद का कहना है कि भोजन उनको पचता नहीं है। कुछ भी खाने पर उल्टी हो जाती है। 15 वर्ष पहले उन्होंने निराजल जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा था। लेकिन, बीच में ही उनका व्रत टूट गया। पानी पीते ही उनको उल्टी होने लगी। हालत में सुधार होने पर उन्होंने थोड़ा सा कुछ खाया, लेकिन फिर से वही स्थिति हो गई। इसके बाद से उन्होंने भोजन व पानी का त्याग कर दिया। तब से वह पेट भरने के नाम पर चाय की चुस्कियों के साथ बीड़ी पीती हैं। (संवाद)
कई डॉक्टरों से कराया इलाज
लोकनाथ बिंद का गांव में चाय व पान की दुकान है। लोकनाथ ने कहा कि बुच्ची भोजन व पानी ग्रहण कर सकें, इसके लिए उन्होंने काफी भागदौड़ की। एलोपैथ से लेकर होम्योपैथ तक की दवाओं का सेवन कराया। कई डॉक्टरों व हकीमों से उपचार कराया, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। कमजोरी की वजह से कभी- कभी ड्रिप व इंजेक्शन लगवाई जाती है।
दुकान संभालतीं हैं,गायों को देती हैं चारा-पानी
नंदगंज। भोजन व जल का सेवन नहीं करने के बावजूद बुच्ची की दिनचर्या पर कोई असर देखने को नहीं मिलता है। वह पति के चाय-पान की दुकान को संभालती हैं। घर पर पाली गईं गायों को चारा-पानी देने का काम भी आराम से कर लेती हैं। चलने में भी उनको कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन वह दो से ढाई लीटर दूध की चाय पी जाती हैं। साथ ही तीन से चार बंडल बीड़ी भी पीती हैं। संवाद
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बुच्ची के आंत में कोई बीमारी हो सकती है। इसलिए भोजन नहीं पचता है। चाय पीने से उनकी जिंदगी चल रही है। इसमें कोई हैरत नहीं है। चीन व दूध से उनको कैलौरी मिल रही है। लेकिन, उनका स्वास्थ्य गिर सकता है। -डॉ. पंकज प्रभारी चिकित्साधिकारी, नंदगंज पीएचसी
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कई डॉक्टरों से कराया इलाज
लोकनाथ बिंद का गांव में चाय व पान की दुकान है। लोकनाथ ने कहा कि बुच्ची भोजन व पानी ग्रहण कर सकें, इसके लिए उन्होंने काफी भागदौड़ की। एलोपैथ से लेकर होम्योपैथ तक की दवाओं का सेवन कराया। कई डॉक्टरों व हकीमों से उपचार कराया, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। कमजोरी की वजह से कभी- कभी ड्रिप व इंजेक्शन लगवाई जाती है।
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दुकान संभालतीं हैं,गायों को देती हैं चारा-पानी
नंदगंज। भोजन व जल का सेवन नहीं करने के बावजूद बुच्ची की दिनचर्या पर कोई असर देखने को नहीं मिलता है। वह पति के चाय-पान की दुकान को संभालती हैं। घर पर पाली गईं गायों को चारा-पानी देने का काम भी आराम से कर लेती हैं। चलने में भी उनको कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन वह दो से ढाई लीटर दूध की चाय पी जाती हैं। साथ ही तीन से चार बंडल बीड़ी भी पीती हैं। संवाद
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बुच्ची के आंत में कोई बीमारी हो सकती है। इसलिए भोजन नहीं पचता है। चाय पीने से उनकी जिंदगी चल रही है। इसमें कोई हैरत नहीं है। चीन व दूध से उनको कैलौरी मिल रही है। लेकिन, उनका स्वास्थ्य गिर सकता है। -डॉ. पंकज प्रभारी चिकित्साधिकारी, नंदगंज पीएचसी