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सुनत भरतु भए बिबस बिषादा.
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Wed, 05 Oct 2016 11:39 PM IST
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सुनत भरतु भए बिबस बिषादा.
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प्राचीन रामलीला कमेटी के तत्वाधान में मंगलवार की शाम भरत आगमन, मनावन एवं विदाई लीला का मंचन किया गया। शानदार मंचन देख लोग भावविभोर हो गए।
महाराज दशरथ का स्वर्गवास एवं राम वनगमन के बाद गुरू वशिष्ठ एचं मंत्री की आपात बैठक होती है। इसमें अयोध्या के राज के प्रकरण को लेकर अयोध्यावासियों में खलबली मच जाती है। थोड़ी देर में वशिष्ठ जी सुमंत जी को बुलवाते है।
साथ ही भरत, शत्रुघ्न को दूतों द्वारा बुलवाते है। जब दोनों भाई अयोध्या के दो दूतों को देखते है तो उनके मन में खलबली मच जाती है कि अयोध्या में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसके बाद दूत गुरु वशिष्ठ के पत्रों को देते हुए कहते है कि गुरु वशिष्ठ ने आपको शीघ्रातिशीघ्र बुलाया है। इस पर भरत, शत्रुघ्न तुरंत रथ पर सवार होकर अयोध्या के लिए कूच कर जाते है।
भरत का रथ जैसे ही अयोध्या में प्रवेश करता है तो सभी अयोध्यावासी भरत को देख मुंह फेर लेते हैं भरत जी माता की ओर देख विधवापन होने का कारण पूंछते हैं तो माता कैकेयी दशरथ के निधन की बात बताती हैं। राम के संबंध में पूछते है तो कैकेयी बताती है कि राम, लक्ष्मण और सीता तीनों वन के लिए प्रस्थान कर गए हैं। इतना सुनने के बाद भरत जी मायूस होकर सिंहासन पर सिर पर हाथ रखकर बैठ जाते है।
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कार्यक्रम को संपन्न कराने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंध जैमिनी आदि रहे।
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महाराज दशरथ का स्वर्गवास एवं राम वनगमन के बाद गुरू वशिष्ठ एचं मंत्री की आपात बैठक होती है। इसमें अयोध्या के राज के प्रकरण को लेकर अयोध्यावासियों में खलबली मच जाती है। थोड़ी देर में वशिष्ठ जी सुमंत जी को बुलवाते है।
साथ ही भरत, शत्रुघ्न को दूतों द्वारा बुलवाते है। जब दोनों भाई अयोध्या के दो दूतों को देखते है तो उनके मन में खलबली मच जाती है कि अयोध्या में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इसके बाद दूत गुरु वशिष्ठ के पत्रों को देते हुए कहते है कि गुरु वशिष्ठ ने आपको शीघ्रातिशीघ्र बुलाया है। इस पर भरत, शत्रुघ्न तुरंत रथ पर सवार होकर अयोध्या के लिए कूच कर जाते है।
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भरत का रथ जैसे ही अयोध्या में प्रवेश करता है तो सभी अयोध्यावासी भरत को देख मुंह फेर लेते हैं भरत जी माता की ओर देख विधवापन होने का कारण पूंछते हैं तो माता कैकेयी दशरथ के निधन की बात बताती हैं। राम के संबंध में पूछते है तो कैकेयी बताती है कि राम, लक्ष्मण और सीता तीनों वन के लिए प्रस्थान कर गए हैं। इतना सुनने के बाद भरत जी मायूस होकर सिंहासन पर सिर पर हाथ रखकर बैठ जाते है।
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कार्यक्रम को संपन्न कराने में अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, उप मंत्री लव कुमार त्रिवेदी, प्रबंध जैमिनी आदि रहे।