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अर्पण, तर्पण व समर्पण भारतीय संस्कृति की मूल पहचान- महामंडलेश्वर भवानीनन्दन यति

Wed, 02 Sep 2020 10:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 10:06 PM IST
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Arpan, tarpan and surrender is the basic identity of Indian culture
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जखनियां। भारतीय संस्कृति को यदि हम केवल तीन शब्दों में कहना या बताना चाहें तो इसका मतलब अर्पण, तर्पण और समर्पण है और इन तीनों में ही त्याग की भावना है। उपरोक्त बातें बुधवार को सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर विगत दो माह से चल रहे चतुर्मास महानुष्ठान के पूर्णाहुति समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने कहा। उपस्थित शिष्य श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह त्याग समाज के लिए कर्तव्यरूप है, उपकाररूप नहीं। हम किसी पर उपकार नही करते, बल्कि यह हमारा कर्तव्यरूप है। हमारे द्वारा किया गया यह त्याग ही अर्पण कहलाता है। पितरों के लिए, माता पिता के लिए किया गया त्याग तर्पण कहलाता है। भगवान के लिए किया गया त्याग समर्पण कहलाता है। हमारा कर्तव्य है कि जिस समाज में हम रह रहे हैं, उस समाज के लिए कुछ करें। कर्तव्य वह कर्म है जिसको करने से पुण्य नहीं मिलता। लेकिन ना करने से पाप जरूर लगता है। उन्होंने कहा कि सिद्धपीठ हथियाराम मठ स्थित मृण्मयी बुढि़या माई के पुण्य प्रताप से यहां की माटी चंदन से भी पवित्र है। इस पवित्र भूमि पर किए गए धार्मिक अनुष्ठान से मन को बहुत शांति मिलती है। उनके द्वारा देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर चातुर्मास यज्ञ संपादित किए गए लेकिन बुढि़या माई के शरण में किए गए अनुष्ठान से जो आनंद की अनुभूति होती है वह आत्मा से परमात्मा तक का मिलन करा देती है।लगभग 750 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ हथियाराम मठ की परंपरा अनुसार अनादि काल से चले आ रहे वर्षा ऋतु में होने वाला चातुर्मास महायज्ञ इस वर्ष भी सिद्धपीठ पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर श्री यति जी द्वारा संपादित किया गया।

इनसेट...चातुर्मास महायज्ञ पूर्णाहुति में छाया रहा कोरोना का असर:
जखनियां। सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर चल रहे चातुर्मास महायज्ञ की पूर्णाहुति समारोह में वैश्विक महामारी कोरोना कॉविड का असर छाया रहा। स्थिति यह रही कि इस धार्मिक आयोजन में एक तरफ वक्ताओं द्वारा जहां धार्मिक महत्व के प्रवचन वक्तव्य दिए गए। वहीं, काफी समय तक कोरोना कोविड के दुष्परिणाम व इससे बचाव के उपाय पर भी चर्चा होती रही। सिद्ध पीठ के पीठाधीश्वर और जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नंदन यति जी महाराज ने कहा कि इस वैश्विक महामारी की चपेट में एक दो देश नहीं बल्कि पूरा विश्व है। फिर भी यह आश्चर्य का विषय है कि इसकी भयावहता का अंदाजा तमाम लोग नहीं लगा पा रहे हैं।
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