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भूख और बीमारी से दम तोड़ रहे पशु, व्यवस्थाएं नदारद
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बेसहारा पशुओं की देखरेख के लिए बनाए गए अधिकांश पशु आश्रय केंद्र दुर्व्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गए हैं। बजट के बाद भी सूखे भूसे के सहारे बेजुबान जीने को विवश हैं। कई पशु केंद्रों पर भूख और बीमारी से पशु जीवन और मौत से जूझ रहे हैं।
जिले में 32 पशु आश्रय केंद्र स्थापित हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 24 और शहरी क्षेत्र में आठ आश्रय स्थल हैं। यहां 2710 बेसहारा पशु संरक्षित हैं। सैदपुर ब्लाक मुख्यालय के नजदीक मिर्जापुर गांव के कोल्ड स्टोरेज परिसर में बने स्थायी पशु आश्रय केंद्र की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां कभी 34 मवेशी हुआ करते थे, जिनकी गिनती घटकर अब कुछ ही रह गई है। खाने के लिए सूखा भूसा उनकी नांदों में डाल दिया जाता है।
इलाज के अभाव में कई पशुओं ने बीमार होकर दम तोड़ दिया है। बीते 30 जनवरी को सैदपुर के उपजिलाधिकारी विक्रम सिंह ने इस पशु आश्रय केंद्र का निरीक्षण भी किया था। इस दौरान उन्होंने पशुओं के चारा-पानी, चूनी-चोकर एवं पशु आहार की जानकारी के अलावा उनको गलाघोंटू, खुरपका एवं मुंहपका आदि का टीका लगवाने का निर्देश भी दिया था, लेकिन देखरेख के अभाव और पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते पशुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। प्रभारी सीवीओ डा. रविंद्र प्रसाद ने बताया कि नियमित मानीटरिंग की जा रही है। बजट भी मुहैया कराया जा रहा है। संरक्षित पशुओं की देखभाल की समुचित व्यवस्था की गई है।
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जिले में 32 पशु आश्रय केंद्र स्थापित हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 24 और शहरी क्षेत्र में आठ आश्रय स्थल हैं। यहां 2710 बेसहारा पशु संरक्षित हैं। सैदपुर ब्लाक मुख्यालय के नजदीक मिर्जापुर गांव के कोल्ड स्टोरेज परिसर में बने स्थायी पशु आश्रय केंद्र की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां कभी 34 मवेशी हुआ करते थे, जिनकी गिनती घटकर अब कुछ ही रह गई है। खाने के लिए सूखा भूसा उनकी नांदों में डाल दिया जाता है।
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इलाज के अभाव में कई पशुओं ने बीमार होकर दम तोड़ दिया है। बीते 30 जनवरी को सैदपुर के उपजिलाधिकारी विक्रम सिंह ने इस पशु आश्रय केंद्र का निरीक्षण भी किया था। इस दौरान उन्होंने पशुओं के चारा-पानी, चूनी-चोकर एवं पशु आहार की जानकारी के अलावा उनको गलाघोंटू, खुरपका एवं मुंहपका आदि का टीका लगवाने का निर्देश भी दिया था, लेकिन देखरेख के अभाव और पशु चिकित्सा विभाग की लापरवाही के चलते पशुओं की संख्या लगातार कम हो रही है। प्रभारी सीवीओ डा. रविंद्र प्रसाद ने बताया कि नियमित मानीटरिंग की जा रही है। बजट भी मुहैया कराया जा रहा है। संरक्षित पशुओं की देखभाल की समुचित व्यवस्था की गई है।
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