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परंपरागत ढंग से घर-घर मनाई गई अनंत चतुर्दशी
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सुख, शांति और वैभव की कामना के साथ जिले भर में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी का त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और भगवान अनंत की कथा सुना। अनंत के व्रत से व्यक्ति की खोई संपत्ति के साथ ही धन, धान्य, यश, कीर्ति मिल जाती है। कथा के साथ प्रसाद के रुप में कच्चे सूत के 14 ग्रंथि से बने धागे को भुजा में पहन कर लोगों ने अपनी आस्था जताई। कथा के श्रवण के बाद कुछ लोग अन्न ग्रहण कर लेते हैं जबकि कुछ लोग दिन भर का व्रत करते हैं।
पंडित मुनींद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाला यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इसके धारण करने से व्यक्ति भगवान विष्णु के लोक को प्राप्त होता है। जिसका कोई अंत न हो अर्थात अनंत, भगवान विष्णु को कहा जाता है। कथा श्रवण के बाद अनंत के धागे को स्त्री बांए तथा पुरुषों ने दांए हाथ या भुजा में पहना।
लोगों ने किया कथा का श्रवण
मुहम्मदाबाद। अनंत चतुर्दशी पर लोगों ने निर्जल व्रत रखकर अनंत भगवान की कथा का श्रवण करने के बाद जल ग्रहण किया। श्रद्धालु सुबह से निर्जल व्रत रखकर दोपहर में अनंत व्रत की कथा का श्रवण कर चौदह गांठ वाले धागे से बने अनंत को अपनी बांह पर बांधने के बाद जल ग्रहण करते हैं। नगर में तहसील परिसर स्थित मनोकामना देवी के मंदिर, तिवारी टोला स्थित नर्वदेश्वर महादेव के मंदिर एवं अग्रवाल टोली स्थित राधाकृष्ण के मंदिर में कथा संपन्न हुई। राधाकृष्ण मंदिर में कथा करते हुए आचार्य पंडित भागवत तिवारी ने कहा कि महाभारत काल में जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार कर जंगल में दुखी जीवन जी रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण उनके पास मिलने गए। तब युधिष्ठिर ने अपने ऊपर आए दुख के निवारण का उपाय पूछा। जिसपर श्रीकृष्ण ने उनसे व्रतों में सबसे उत्तम अनंत व्रत करने को कहा। इस व्रत से व्यक्ति के करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह सद्गति को प्राप्त होता है।
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पितरों को तृप्त करने गया के लिए प्रस्थान किया
मुहम्मदाबाद। अनंत चतुर्दशी के दिन ही लोगों ने अपने पितरों को तृप्त करने के लिए गया के लिए प्रस्थान किया। परंपरागत ढंग से लोग गया जाने के लिए पहले अपने बंधु-बांधवों के साथ गांव का भ्रमण करके रवाना हुए।
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पंडित मुनींद्रनाथ उपाध्याय ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाला यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इसके धारण करने से व्यक्ति भगवान विष्णु के लोक को प्राप्त होता है। जिसका कोई अंत न हो अर्थात अनंत, भगवान विष्णु को कहा जाता है। कथा श्रवण के बाद अनंत के धागे को स्त्री बांए तथा पुरुषों ने दांए हाथ या भुजा में पहना।
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लोगों ने किया कथा का श्रवण
मुहम्मदाबाद। अनंत चतुर्दशी पर लोगों ने निर्जल व्रत रखकर अनंत भगवान की कथा का श्रवण करने के बाद जल ग्रहण किया। श्रद्धालु सुबह से निर्जल व्रत रखकर दोपहर में अनंत व्रत की कथा का श्रवण कर चौदह गांठ वाले धागे से बने अनंत को अपनी बांह पर बांधने के बाद जल ग्रहण करते हैं। नगर में तहसील परिसर स्थित मनोकामना देवी के मंदिर, तिवारी टोला स्थित नर्वदेश्वर महादेव के मंदिर एवं अग्रवाल टोली स्थित राधाकृष्ण के मंदिर में कथा संपन्न हुई। राधाकृष्ण मंदिर में कथा करते हुए आचार्य पंडित भागवत तिवारी ने कहा कि महाभारत काल में जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार कर जंगल में दुखी जीवन जी रहे थे तो भगवान श्रीकृष्ण उनके पास मिलने गए। तब युधिष्ठिर ने अपने ऊपर आए दुख के निवारण का उपाय पूछा। जिसपर श्रीकृष्ण ने उनसे व्रतों में सबसे उत्तम अनंत व्रत करने को कहा। इस व्रत से व्यक्ति के करने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह सद्गति को प्राप्त होता है।
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पितरों को तृप्त करने गया के लिए प्रस्थान किया
मुहम्मदाबाद। अनंत चतुर्दशी के दिन ही लोगों ने अपने पितरों को तृप्त करने के लिए गया के लिए प्रस्थान किया। परंपरागत ढंग से लोग गया जाने के लिए पहले अपने बंधु-बांधवों के साथ गांव का भ्रमण करके रवाना हुए।