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हो-हल्ला से निरस्त करनी पड़ी खुली बैठक.
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मरदह। विकासखंड के स्थानीय गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन के लिए शनिवार को भारी गहमागहमी के बीच आयोजित खुली बैठक हो हल्ला के कारण निरस्त करनी पड़ी। इसमें राष्ट्रीय आजीविका मिशन से संचालित महिला समूहों से आवेदन मांगा गया था लेकिन कोई मौके पर कागजात उपलब्ध नहीं करा पाया।
सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन के लिए बैठक पूर्व माध्यमिक विद्यालय के परिसर में आयोजित की गई थी। प्रधान उमरावती सिंह की अनुमति से ग्राम पंचायत सचिव धर्मेंद्र यादव ने बैठक में मौजूद लोगों को नियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार सरकारी राशन की दुकान के चयन के लिए पहली वरीयता राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के तहत संचालित महिला समूहों से आवेदन बताया। कहा कि समूह की महिला की शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल पास होना अनिवार्य है। इस पर कई महिला समूहों ने कोटे की दुकान के लिए कागजात पेश किया, लेकिन वह अधूरा रहा। इसी बीच कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना गांव में मुनादी कराए, चिह्नित लोगों के बीच खुली बैठक कराना सरासर नियम के विरूद्ध है। नए तरीके से पूरे गांव के लोगों को सूचना देकर पुलिस बल के सामने खुली बैठक कराई जाए। भारी गहमागहमी को देखते हुए नोडल अधिकारी वीके सिंह ने उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी देते हुए प्रस्ताव पारित कर इस बैठक को निरस्त करने का आदेश दिया। कहा कि आगे की बैठक पुलिस प्रशासन की देखरेख में मुनादी कराकर की जाएगी। तब जाकर लोगों का आक्रोश शांत हुआ। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी शिरीष वर्मा, प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह, संजीत वर्मा, प्रवीण पटवा, लल्लन राजभर, जवाहर मद्धेशिया, सुरेंद राजभर, राजकुमार राम, हरेंद्र राम, अजयपाल सिइंह, हरेंद्र सिंह, रमेश सिंह मौजूद थे।
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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के चयन के लिए बैठक पूर्व माध्यमिक विद्यालय के परिसर में आयोजित की गई थी। प्रधान उमरावती सिंह की अनुमति से ग्राम पंचायत सचिव धर्मेंद्र यादव ने बैठक में मौजूद लोगों को नियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार सरकारी राशन की दुकान के चयन के लिए पहली वरीयता राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के तहत संचालित महिला समूहों से आवेदन बताया। कहा कि समूह की महिला की शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल पास होना अनिवार्य है। इस पर कई महिला समूहों ने कोटे की दुकान के लिए कागजात पेश किया, लेकिन वह अधूरा रहा। इसी बीच कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना गांव में मुनादी कराए, चिह्नित लोगों के बीच खुली बैठक कराना सरासर नियम के विरूद्ध है। नए तरीके से पूरे गांव के लोगों को सूचना देकर पुलिस बल के सामने खुली बैठक कराई जाए। भारी गहमागहमी को देखते हुए नोडल अधिकारी वीके सिंह ने उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी देते हुए प्रस्ताव पारित कर इस बैठक को निरस्त करने का आदेश दिया। कहा कि आगे की बैठक पुलिस प्रशासन की देखरेख में मुनादी कराकर की जाएगी। तब जाकर लोगों का आक्रोश शांत हुआ। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी शिरीष वर्मा, प्रधान प्रतिनिधि राजू सिंह, संजीत वर्मा, प्रवीण पटवा, लल्लन राजभर, जवाहर मद्धेशिया, सुरेंद राजभर, राजकुमार राम, हरेंद्र राम, अजयपाल सिइंह, हरेंद्र सिंह, रमेश सिंह मौजूद थे।
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