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त्यौहार बाद बढ़ी यात्रियों की भीड़ तो ट्रेनें हुई नो रूम
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दीपावली और छठ पूजा का त्योहार बीतने के बाद काम पर वापस लौटने वाले यात्रियों की संख्या जैसे-जैसे स्टेशन पर बढ़ रही, आरक्षण को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। इस दौरान कई ट्रेनों में स्लीपर कोच नो रूम हो चुका है। इससे यात्रियों की समस्या बढ़ गई। आवश्यकता देख यात्री हार मानकर वातानुकूलित कोच में आरक्षण कराने को विवश है।
गाजीपुर के साथ औड़िहार सहित अन्य स्टेशनों, जहां पर आरक्षण की सुविधा है, यात्रियाें की संख्या प्रति दिन बढ़ रही। दो शिफ्टों में इन खिड़कियों से प्रति दिन 100 से 200 आरक्षण होते थे, लेकिन इस समय यह संख्या 300 को पार कर गई है। टिकट की मारा मारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि नो रूम होने के कारण अधिकांश यात्रियों को तो वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रहा है। इसके चलते यात्री मायूस होकर घर लौट रहे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन शुरू किया है लेकिन यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण इन ट्रेनों में भी जगह नहीं मिल पा रहा।
गाजीपुर से मुंबई, पुणे, गुजरात जाने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। इसके बाद भी यात्रियों को राहत नहीं मिल पा रही है। अधिकांश ट्रेनों के एसी कोच से लेकर स्लीपर कोच भी भर चुका है। इसके चलते तत्काल आरक्षण की सेवा का लाभ यात्रियाें को नहीं मिल पा रहा। पांच मिनट के अंदर तत्काल सेवा में मौजूद सीटें फूल हो जा रही।सुबह से ही स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर भीड़ लग जा रही है, इससे यात्रियों के हाथ मायूसी ही लग रही है। आफलाइन पर 3201 बंाबे जनता 3005 पंजाब मेल 2333 विभूति एक्सप्रेस 3483 3413 फरक्का एक्सप्रेस 2142 लोकमान्य तिलक 3288 पटना-मथुरा 2871 मगध एक्सप्रेस आदि में 30 नवंबर तक टिकट नहीं है। स्टेशन मास्टर गणेश ने बताया कि त्योहार के चलते आरक्षण खिड़की पर भीड़ बढ़ गई है। इस समय तीन सौ से ज्यादा रिजर्वेशन हो रहे हैं।
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इनसेट
मजबूरी में लेना पड़ रहा वातानुकूलित श्रेणी का टिकट
जमानिया। मुंबई गुजरात दिल्ली पुणे आदि जगहों पर मजदूरी पर काम करने वाले लोग दीपावली एवं छठ त्योहार मनाने आए थे। अब वापस लौटना है लेकिन ट्रेन में स्लीपर एवं निम्न श्रेणी में टिकट न मिलने की वजह से वह एसी में टिकट कराने को मजबूर हैं।
(फोटो भी)
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गाजीपुर के साथ औड़िहार सहित अन्य स्टेशनों, जहां पर आरक्षण की सुविधा है, यात्रियाें की संख्या प्रति दिन बढ़ रही। दो शिफ्टों में इन खिड़कियों से प्रति दिन 100 से 200 आरक्षण होते थे, लेकिन इस समय यह संख्या 300 को पार कर गई है। टिकट की मारा मारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि नो रूम होने के कारण अधिकांश यात्रियों को तो वेटिंग टिकट भी नहीं मिल रहा है। इसके चलते यात्री मायूस होकर घर लौट रहे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कुछ स्पेशल ट्रेनों का भी संचालन शुरू किया है लेकिन यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण इन ट्रेनों में भी जगह नहीं मिल पा रहा।
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गाजीपुर से मुंबई, पुणे, गुजरात जाने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। इसके बाद भी यात्रियों को राहत नहीं मिल पा रही है। अधिकांश ट्रेनों के एसी कोच से लेकर स्लीपर कोच भी भर चुका है। इसके चलते तत्काल आरक्षण की सेवा का लाभ यात्रियाें को नहीं मिल पा रहा। पांच मिनट के अंदर तत्काल सेवा में मौजूद सीटें फूल हो जा रही।सुबह से ही स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर भीड़ लग जा रही है, इससे यात्रियों के हाथ मायूसी ही लग रही है। आफलाइन पर 3201 बंाबे जनता 3005 पंजाब मेल 2333 विभूति एक्सप्रेस 3483 3413 फरक्का एक्सप्रेस 2142 लोकमान्य तिलक 3288 पटना-मथुरा 2871 मगध एक्सप्रेस आदि में 30 नवंबर तक टिकट नहीं है। स्टेशन मास्टर गणेश ने बताया कि त्योहार के चलते आरक्षण खिड़की पर भीड़ बढ़ गई है। इस समय तीन सौ से ज्यादा रिजर्वेशन हो रहे हैं।
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इनसेट
मजबूरी में लेना पड़ रहा वातानुकूलित श्रेणी का टिकट
जमानिया। मुंबई गुजरात दिल्ली पुणे आदि जगहों पर मजदूरी पर काम करने वाले लोग दीपावली एवं छठ त्योहार मनाने आए थे। अब वापस लौटना है लेकिन ट्रेन में स्लीपर एवं निम्न श्रेणी में टिकट न मिलने की वजह से वह एसी में टिकट कराने को मजबूर हैं।
(फोटो भी)