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बारिश के बाद शीतलहर का कहर

Thu, 21 Jan 2016 11:47 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला गाजीपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला गाजीपुर Updated Thu, 21 Jan 2016 11:47 PM IST
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After rain havoc of cold wave
दो दिनों की बारिश के बाद गुरुवार को थोड़ी धूप जरूर हुई लेकिन गलन और ठंडी हवाओं ने असर दिखाया। शीतलहर के असर से धूप बेअसर दिखी। हल्की धूप में छतों पर जाने से भी लोग कतराते दिखे। तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। कड़ाके की ठंड में सबसे अधिक परेशानी कटान विस्तापितों और झुग्गियों में रहने वाले लोगों को हो रही है। दिहाड़ी मजदूरों को बमुश्किल काम मिल रहा है। 
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पहले बाढ़ ने सेमरा व शिवरायकापुरा के लोगों को बेघर किया। अब स्कूलों में बने कैंप में विस्थापित जीवन जी रहे ये ठंड में ठिठुर रहे हैं। इन्हें न तो अभी तक कंबल दिया गया है और न ही प्रशासन की ओर से अलाव की व्यवस्था की गई है। कटान पीड़ित तीन साल से प्लास्टिक के टेंट में परिवार के साथ गुजारा कर रहे हैं। गंगा के कटान के चलते शिवरायकापुरा व सेमरा के 377 परिवारों का आशियाना गंगा की धारा में समाहित हो गया था।
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कटान प्रभावित विस्थापित परिवारों को रहने के लिए प्रशासन की ओर से प्राथमिक विद्यालय सेमरा, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सेमरा, प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुहम्मदाबाद व कृषि मंडी समिति में विस्थापित शिविर बनाया गया। विस्थापित शिविरों में भवनों की संख्या कम होने से पीड़ित परिवारों के सदस्य कमरे के बजाए बाहर तिरपाल डालकर झोपड़ी बनाकर गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
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इन झोपड़ियों में बारिश, गर्मी का मौसम तो बीत गया लेकिन अब ठंडी में रात में हवा चलने से काफी परेशानी हो रही है। विस्थापित मुखराज राम, राजेन्द्र पाल, गोवर्धन पाल, दलसिंगार, कुसहर, सेवाराम, सवरू व शिवनारायण ने बताया कि कटान के चलते उनका सबकुछ गंगा में विलीन हो गया।



मजबूरी में किसी तरह प्लास्टिक तिरपाल डालकर कड़ाके ठंड की मार झेलने को मजबूर हैं। ठंड के चलते बच्चे व महिलाएं बीमार पड़ रही हैं। प्रशासन की तरफ से विस्थापित कैंपों में न तो अलाव की व्यवस्था की है, और न ही कंबल दिया गया है। पिछले वर्ष प्रशासन ने कटान पीड़ितों को बसाने के लिए शेरपुर के जलालपुर मौजे में जमीन खरीदी लेकिन आजतक उस पर न तो कब्जा दिलाया गया और न ही जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई गईं। 
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