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Ghazipur News: गांजा बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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अपर सत्र न्यायाधीश शक्ति सिंह की अदालत ने बुधवार को 61 किलो गांजा बरामदगी के मामले में आरोपी भीम सिंह का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। साथ ही करंडा थाना के पुलिस कर्मियों के खिलाफ सीओ स्तर के अधिकरी से जांच कराने का आदेश एसपी को दिया है।
न्यायालय ने आदेश में बताया कि आरोपी भीम सिंह के विषय में विवेचक द्वारा न्यायालय के समक्ष इस आशय का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया कि आरोपी के संभावित सभी स्थानों पर निरंतर दबिश दी जा रही है। बावजूद वह फरार चल रहा है। इस कारण आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए। विवेचक के प्रार्थना पत्र के आधार पर न्यायालय ने आरोपी भीम सिंह के खिलाफ बीते दो जून को गैर जमानती वारंट जारी किया गया। जिस आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी था तथा जो पुलिस की पकड़ से बाहर था, वहीं आरोपी भीम सिंह बीते आठ अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराने करंडा थाने में पहुंचा और थाने में प्राथमिकी कराने का तहरीर देता है और उसकी तहरीर पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर लेती है, लेकिन अन्य मामले में आरोपी भीम सिंह को गिरफ्तार करने के लिए न तो थानाध्यक्ष एवं न ही अन्य पुलिकर्मी को आवश्यकता महसूस हुई। न्यायालय ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपी भीम सिंह को बीते 26 अगस्त को लगभग 18 दिन दिन गिरफ्तार करना यह दर्शाता है कि इस मामले में आरोपी भीम सिंह ने करंडा पुलिस को लाभ प्रदान किया गया है, जो अत्यधिक गंभीर विषय है। एक फरार आरोपी थाने पर थानाध्यक्ष को आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करा रहा है, लेकिन पुलिस को कोई खबर नहीं है। अगर कोई थाना इतना बेखबर है कि उस पर एक फरार आरोपी भी प्राथमिकी दर्ज कराकर स्वछंद रूप से घूम सकता है तो ऐसे स्थिति में दोषी पुलिसकर्मी कार्रवाई के पात्र हैं। न्यायालय ने आदेश दिया कि पुलिस अधीक्षक पूरे मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने के साथ ही 15 दिन के अंदर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराएं।
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न्यायालय ने आदेश में बताया कि आरोपी भीम सिंह के विषय में विवेचक द्वारा न्यायालय के समक्ष इस आशय का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया कि आरोपी के संभावित सभी स्थानों पर निरंतर दबिश दी जा रही है। बावजूद वह फरार चल रहा है। इस कारण आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाए। विवेचक के प्रार्थना पत्र के आधार पर न्यायालय ने आरोपी भीम सिंह के खिलाफ बीते दो जून को गैर जमानती वारंट जारी किया गया। जिस आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी था तथा जो पुलिस की पकड़ से बाहर था, वहीं आरोपी भीम सिंह बीते आठ अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कराने करंडा थाने में पहुंचा और थाने में प्राथमिकी कराने का तहरीर देता है और उसकी तहरीर पर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर लेती है, लेकिन अन्य मामले में आरोपी भीम सिंह को गिरफ्तार करने के लिए न तो थानाध्यक्ष एवं न ही अन्य पुलिकर्मी को आवश्यकता महसूस हुई। न्यायालय ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपी भीम सिंह को बीते 26 अगस्त को लगभग 18 दिन दिन गिरफ्तार करना यह दर्शाता है कि इस मामले में आरोपी भीम सिंह ने करंडा पुलिस को लाभ प्रदान किया गया है, जो अत्यधिक गंभीर विषय है। एक फरार आरोपी थाने पर थानाध्यक्ष को आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करा रहा है, लेकिन पुलिस को कोई खबर नहीं है। अगर कोई थाना इतना बेखबर है कि उस पर एक फरार आरोपी भी प्राथमिकी दर्ज कराकर स्वछंद रूप से घूम सकता है तो ऐसे स्थिति में दोषी पुलिसकर्मी कार्रवाई के पात्र हैं। न्यायालय ने आदेश दिया कि पुलिस अधीक्षक पूरे मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने के साथ ही 15 दिन के अंदर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराएं।
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