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प्रदेशभर के शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्रों की होगी जांच
Ghazipur
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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गाजीपुर। बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने से पहले उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराने का आदेश दिया है। यह आदेश समस्त डायट प्राचार्यों के साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जारी किए गए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि सभी शिक्षामित्रों से उनके मूल प्रमाणपत्रों को मंगाकर सत्यापन के लिए संबंधित शिक्षण संस्थाओं को भेजा जाए। ऐसे में सैकड़ों की नौकरी पर तलवार लटक गई है।
बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के शासनकाल में पूरे प्रदेशभर के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्रों को तैनाती दी गई थी। कुल एक लाख 76 हजार शिक्षामित्रों को संविदा के आधार पर वर्ष 2004 से 2006 के बीच तैनात किया गया था। इन शिक्षामित्रों का हर वर्ष नवीनीकरण भी होता था लेकिन बाद में विरोध के चलते नवीनीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। शिक्षामित्रों का आरोप था कि ग्राम शिक्षा समितियां शोषण करती हैं, जिससे शिक्षामित्रों का नुकसान होता है। बसपा शासनकाल में इन शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की घोषण की गई। इस समय एक लाख 36 हजार शिक्षामित्र संबंधित डायट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसमें गाजीपुर में पहले चरण के दौरान 1190 शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण शुरू किया गया। इसके बाद कहा गया है कि जितने शिक्षामित्रों ने बीए किया है उनको प्रशिक्षित किया जाएगा। इधर प्रशिक्षण के समय ही बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिलों में आदेश जारी कर कहा कि प्रशिक्षण से पहले सभी शिक्षामित्रों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करा ली जाए। इस जिले में शिक्षामित्रों से शैक्षिक प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। कई ब्लाकों ने तो अपनी फाइलें संबंधित बीआरसी केंद्रों पर जमा भी कर दी हैं। बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों कहना है कि यदि सत्यापन हुआ तो आधे से अधिक शिक्षामित्रों की नौकरी खतरे में पड़ेगी।
जिस समय शिक्षामित्रों का चयन हुआ था उस समय हाई मेरिट दिखाकर चयन कर लिया गया था। इसका खुलासा कई शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्रों की जांच में भी हो चुका है। अभी हाल में एक शिक्षामित्र को फर्जी अंकपत्र के आधार पर जिलाधिकारी ने बर्खास्त कर दिया था। अब यदि शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन हुआ तो बहुतेरे शिक्षामित्र शिक्षक बनने से वंचित रह जाएंगे। इस संबंध में डायट प्राचार्य ओपी द्विवेदी ने बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सत्यापन कराने को कहा गया है। सत्यापन रिपोर्ट आने पर शिक्षामित्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के शासनकाल में पूरे प्रदेशभर के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्रों को तैनाती दी गई थी। कुल एक लाख 76 हजार शिक्षामित्रों को संविदा के आधार पर वर्ष 2004 से 2006 के बीच तैनात किया गया था। इन शिक्षामित्रों का हर वर्ष नवीनीकरण भी होता था लेकिन बाद में विरोध के चलते नवीनीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। शिक्षामित्रों का आरोप था कि ग्राम शिक्षा समितियां शोषण करती हैं, जिससे शिक्षामित्रों का नुकसान होता है। बसपा शासनकाल में इन शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की घोषण की गई। इस समय एक लाख 36 हजार शिक्षामित्र संबंधित डायट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसमें गाजीपुर में पहले चरण के दौरान 1190 शिक्षामित्रों का प्रशिक्षण शुरू किया गया। इसके बाद कहा गया है कि जितने शिक्षामित्रों ने बीए किया है उनको प्रशिक्षित किया जाएगा। इधर प्रशिक्षण के समय ही बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिलों में आदेश जारी कर कहा कि प्रशिक्षण से पहले सभी शिक्षामित्रों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच करा ली जाए। इस जिले में शिक्षामित्रों से शैक्षिक प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। कई ब्लाकों ने तो अपनी फाइलें संबंधित बीआरसी केंद्रों पर जमा भी कर दी हैं। बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों कहना है कि यदि सत्यापन हुआ तो आधे से अधिक शिक्षामित्रों की नौकरी खतरे में पड़ेगी।
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जिस समय शिक्षामित्रों का चयन हुआ था उस समय हाई मेरिट दिखाकर चयन कर लिया गया था। इसका खुलासा कई शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्रों की जांच में भी हो चुका है। अभी हाल में एक शिक्षामित्र को फर्जी अंकपत्र के आधार पर जिलाधिकारी ने बर्खास्त कर दिया था। अब यदि शिक्षामित्रों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन हुआ तो बहुतेरे शिक्षामित्र शिक्षक बनने से वंचित रह जाएंगे। इस संबंध में डायट प्राचार्य ओपी द्विवेदी ने बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सत्यापन कराने को कहा गया है। सत्यापन रिपोर्ट आने पर शिक्षामित्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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