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अनंत रूप में विराजमान हैं भगवान शिव
Ghazipur
Updated Sun, 22 Dec 2013 05:44 AM IST
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मुहम्मदाबाद। भगवान शिव के अनंत रूप हैं लेकिन वह द्वादश ज्योर्तिलिंग के रूप में देश के कोने-कोने में विराजमान है। उनके हर रूप का अलग-अलग महत्व है। ब्रह्मांड में जो भी गतिविधियां होती है सभी देवाधिदेव की मर्जी से ही होती है। उनकी कृपा के बगैर कोई भी कार्य संभव नहीं है। मुहम्मदाबाद के शैवटोला स्थित नर्वदेश्वर महादेव पर शाम को शिव पुराण कथा हो रही है। शुक्रवार को यह बातें महात्मा धर्मेश जी महाराज ने कहीं।
शिव पुराण की कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव तो कण-कण में विराजमान है लेकिन उनके द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन का महत्व ही अलग है। भगवान शिव गंगाजल से अभिषेक करने पर प्रसन्न होते है। तथा ऐसा करने वाले मानव को महान पुण्य मिलता है। वह वाराणसी में भगवान विशेश्वर के रूप में तो देवघर में बाबा बैद्यनाथ के रूप में स्थापित हैं। हर स्थान के दर्शन और पूजन की महत्ता अलग अलग है। कहा कि भगवान शिव ही ऐसे है जिनके साकार तथा निराकर दो स्वरुप है। उनके स्वरूप को तय कर हम उनकी उपासना करते है। शिव की बाघंबर पर बैठ कर साधनारत प्रतिमाएं, गले में सर्प, सिर पर चंद्रमा, हाथ में त्रिशूल आदि उनके साकार स्वरूप को बताती है। इसी प्रकार लिंगों के रुप में उनके निराकार छवि की उपासना की जाती है। अंत में भगवान शिव की आरती की गई तथा प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर रामजी, सुशीला, रविता, सुमन, रूकमिणी, संजय, विवेक, अभिषेक, प्रदीप आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
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शिव पुराण की कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव तो कण-कण में विराजमान है लेकिन उनके द्वादश ज्योर्तिलिंग के दर्शन का महत्व ही अलग है। भगवान शिव गंगाजल से अभिषेक करने पर प्रसन्न होते है। तथा ऐसा करने वाले मानव को महान पुण्य मिलता है। वह वाराणसी में भगवान विशेश्वर के रूप में तो देवघर में बाबा बैद्यनाथ के रूप में स्थापित हैं। हर स्थान के दर्शन और पूजन की महत्ता अलग अलग है। कहा कि भगवान शिव ही ऐसे है जिनके साकार तथा निराकर दो स्वरुप है। उनके स्वरूप को तय कर हम उनकी उपासना करते है। शिव की बाघंबर पर बैठ कर साधनारत प्रतिमाएं, गले में सर्प, सिर पर चंद्रमा, हाथ में त्रिशूल आदि उनके साकार स्वरूप को बताती है। इसी प्रकार लिंगों के रुप में उनके निराकार छवि की उपासना की जाती है। अंत में भगवान शिव की आरती की गई तथा प्रसाद वितरित किया गया। इस मौके पर रामजी, सुशीला, रविता, सुमन, रूकमिणी, संजय, विवेक, अभिषेक, प्रदीप आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
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