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पुत्र की दीर्घायु के लिए रखा निर्जला व्रत
Ghazipur
Updated Sat, 28 Sep 2013 05:37 AM IST
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गाजीपुर। संतान की दीर्घायु, सुख तथा समृद्धि की कामना को लेकर शुक्रवार को पुत्रवती महिलाओं ने जिउतिया का निर्जला व्रत रखा। इस मौके पर गंगा स्नान कर जिउतिया का पूजन किया गया। इसके बाद कथा सुनकर सोने या चांदी की जिउतिया गले में पहनी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से संतान पर आया संकट भी टल जाता है।
शुक्रवार की भोर में महिलाओं ने अल्पाहार कर व्रत शुरू कर दिया। हालांकि अष्टमी गुरुवार को ही लग जाने की वजह से कई महिलाओं ने गुरुवार की शाम से ही व्रत शुरू कर लिया था। शुक्रवार की दोपहर बाद महिलाएं गंगा स्नान के लिए शहर के विभिन्न घाटों पर पहुंची। इसके चलते शहर के ददरीघाट, कलक्टर घाट, चीतनाथ घाट समेत अन्य कई स्थानों पर काफी भीड़ बनी रही। गंगा स्नान के बाद पूजा पाठ तथा दान पुण्य किया। इसके बाद गंगा घाटों, घरों तथा मंदिरों आदि पवित्र स्थानों पर पंडितों की ओर से जिउतिया के कथा का वाचन किया गया जिसे व्रती महिलाओं ने सुना। कथा श्रवण के बाद पूजा की थाली या पात्र में रखे सोने या चांदी के जिउतिया को महिलाओं ने धारण किया। परंपरा के मुताबिक जिस महिला के जितने पुत्र होते है वह उतनी संख्या में जिउतिया को धारण करती है। पूजा पाठ के बाद व्रत जारी रहा। इस पर्व के चलते दोपहर बाद से गंगा घाटों पर भीड़ बढ़ने लगी थी। नगरपालिका प्रशासन की ओर से साफ सफाई या प्रकाश की व्यवस्था नहीं कराए जाने से व्रती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार जिले के मुहम्मदाबाद के सुल्तानपुर, गौसपुर, बड़की धारा आदि गंगा तटों पर व्रती महिलाओं की भीड़ देखी गई। पूजा पाठ के बाद महादेवा मंदिर तथा पंडितों ने अपने घरों में भी जिउतिया के कथा का वाचन किया। सैदपुर, नंदगंज, जमानिया, दिलदारनगर, बिरनो, जंगीपुर, मतसा, भांवरकोल, ताजपुर डेहमा आदि स्थानों पर भी परंपरागत ढंग से जिउतिया पर्व मनाया गया। पंडित अरविंद उपाध्याय ने बताया कि जिउतिया पर्व का पारन शनिवार को दिन भर है। इस मौके पर घर में खास प्रकार की मिलवनी दाल, भात, पकौड़ी आदि का सेवन किया जाता है।
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शुक्रवार की भोर में महिलाओं ने अल्पाहार कर व्रत शुरू कर दिया। हालांकि अष्टमी गुरुवार को ही लग जाने की वजह से कई महिलाओं ने गुरुवार की शाम से ही व्रत शुरू कर लिया था। शुक्रवार की दोपहर बाद महिलाएं गंगा स्नान के लिए शहर के विभिन्न घाटों पर पहुंची। इसके चलते शहर के ददरीघाट, कलक्टर घाट, चीतनाथ घाट समेत अन्य कई स्थानों पर काफी भीड़ बनी रही। गंगा स्नान के बाद पूजा पाठ तथा दान पुण्य किया। इसके बाद गंगा घाटों, घरों तथा मंदिरों आदि पवित्र स्थानों पर पंडितों की ओर से जिउतिया के कथा का वाचन किया गया जिसे व्रती महिलाओं ने सुना। कथा श्रवण के बाद पूजा की थाली या पात्र में रखे सोने या चांदी के जिउतिया को महिलाओं ने धारण किया। परंपरा के मुताबिक जिस महिला के जितने पुत्र होते है वह उतनी संख्या में जिउतिया को धारण करती है। पूजा पाठ के बाद व्रत जारी रहा। इस पर्व के चलते दोपहर बाद से गंगा घाटों पर भीड़ बढ़ने लगी थी। नगरपालिका प्रशासन की ओर से साफ सफाई या प्रकाश की व्यवस्था नहीं कराए जाने से व्रती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार जिले के मुहम्मदाबाद के सुल्तानपुर, गौसपुर, बड़की धारा आदि गंगा तटों पर व्रती महिलाओं की भीड़ देखी गई। पूजा पाठ के बाद महादेवा मंदिर तथा पंडितों ने अपने घरों में भी जिउतिया के कथा का वाचन किया। सैदपुर, नंदगंज, जमानिया, दिलदारनगर, बिरनो, जंगीपुर, मतसा, भांवरकोल, ताजपुर डेहमा आदि स्थानों पर भी परंपरागत ढंग से जिउतिया पर्व मनाया गया। पंडित अरविंद उपाध्याय ने बताया कि जिउतिया पर्व का पारन शनिवार को दिन भर है। इस मौके पर घर में खास प्रकार की मिलवनी दाल, भात, पकौड़ी आदि का सेवन किया जाता है।
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