{"_id":"59-101353","slug":"Ghazipur-101353-59","type":"story","status":"publish","title_hn":"धरती के कलेजे पर होने लगा लहरों का वार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धरती के कलेजे पर होने लगा लहरों का वार
Ghazipur
Updated Tue, 02 Jul 2013 05:30 AM IST
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करंडा। गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कटान का क्रम शुरू होने लगा है। रविवार को जहां एक घंटे में करीब दस बिस्वा भूमि गंगा में समाहित हो गई, वहीं रात 2 बजे से दुबारा शुरू कटान सोमवार को पूरे दिन जारी रहा है। कटान की सबसे ज्यादा तीव्रता भोर में रही।
पुरैना वासी पिछले कई वर्षों से कटान का दंश झेल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ही जहां सैकड़ों मकान गंगा में जा चुके हैं, वहीं सैकड़ों एकड़ भूमि भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है। रविवार से कटान का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह सोमवार को भी जारी रहा। करीब 5 बीघा जमीन कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान शुरू होने से ग्रामीणों की धड़कने बढ़ गई हैं। गंगा के रौद्र रूप की कल्पना कर दर्जनों परिवार बेघर होने की आशंका से सहमे हैं। सबसे ज्यादा खौफजदा बयेपुर के लोग हैं। क्योंकि अगर कटान का क्रम नहीं थमा तो हरदेव यादव, श्यामदेव, अखिलेश, अमरनाथ, प्रेमशंकर, शिवपूजन, पारसनाथ, ज्ञानेश्वर, विरेंद्र, रामदास, राजदेव, कंचन, कन्हैया, रमाशंकर, कृष्णा, पद्मदेव और रामानंद के मकान गंगा में समाहित हो जाएंगे। इसमें से अधिकांश लोगों के पक्के मकान हैं। रात में गंगा की लहरों की आवाज घर के लोगों की धुकधुकी बढ़ा दे रही है। उधर पिछले साल बेघर हुए पीड़ितों को जमीन आवंटन के लिए सुबह से ही पैमाइश का कार्य प्रारंभ था।
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पुरैना वासी पिछले कई वर्षों से कटान का दंश झेल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ही जहां सैकड़ों मकान गंगा में जा चुके हैं, वहीं सैकड़ों एकड़ भूमि भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है। रविवार से कटान का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह सोमवार को भी जारी रहा। करीब 5 बीघा जमीन कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान शुरू होने से ग्रामीणों की धड़कने बढ़ गई हैं। गंगा के रौद्र रूप की कल्पना कर दर्जनों परिवार बेघर होने की आशंका से सहमे हैं। सबसे ज्यादा खौफजदा बयेपुर के लोग हैं। क्योंकि अगर कटान का क्रम नहीं थमा तो हरदेव यादव, श्यामदेव, अखिलेश, अमरनाथ, प्रेमशंकर, शिवपूजन, पारसनाथ, ज्ञानेश्वर, विरेंद्र, रामदास, राजदेव, कंचन, कन्हैया, रमाशंकर, कृष्णा, पद्मदेव और रामानंद के मकान गंगा में समाहित हो जाएंगे। इसमें से अधिकांश लोगों के पक्के मकान हैं। रात में गंगा की लहरों की आवाज घर के लोगों की धुकधुकी बढ़ा दे रही है। उधर पिछले साल बेघर हुए पीड़ितों को जमीन आवंटन के लिए सुबह से ही पैमाइश का कार्य प्रारंभ था।
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