{"_id":"5a15b4a24f1c1ba7668b5b36","slug":"91511371938-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुप्पी देख प्रत्याशियों-सर्मथकों के माथे पर खिंची लकीरें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुप्पी देख प्रत्याशियों-सर्मथकों के माथे पर खिंची लकीरें
Updated Wed, 22 Nov 2017 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। जिले के तीन नगर पालिका और पांच नगर पंचायतों में करीब 25 दिनों तक कड़ी मेहनत के बाद भी बुधवार को चुनाव के दिन मतदाताओं की चुप्पी देख प्रत्याशियों और समर्थकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। बूथ के बाहर खड़े उनके समर्थक एक-दूसरे से काना-फूसी कर वोटरों का रुख पता करने में लगे रहे।
सूरज की बढ़ती गर्मी के साथ ही सियासी पारा चढ़ना शुरू हुआ। वैसे-वैसे सभी निकायों के मतदान केंद्रों पर वोटरों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। दिन के 12 बजे तक मतदान केंद्रों के बाहर खड़े प्रत्याशियों के समर्थक जैसे ही वोटरों को आते दिखे। वे अपने पक्ष में वोट डालने की अपील आंखों से ही करना शुरू कर दिए। लेकिन वोटर चुपचाप मतदान केंद्र में पहुंचने के बाद घरों के तरफ रुख कर ले रहे थे। इस स्थिति को देख वोटरों के रुख का पता करने में लगे प्रत्याशियों के समर्थक काफी परेशान दिखाई पड़े। हर कोई एक-दूसरे का चुपचाप चेहरा निहारता दिखा। जब प्रत्याशी अलग-अलग बूथ पर मौजूद समर्थकों से स्थिति का जायजा लेने का प्रयास किए तो जवाब से उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। इधर अपने परिचय के मतदाताओं के बूथ से वापस आने पर काना-फूसी कर रुख का पता करने का प्रयास करते रहे। अपने मताधिकारी का प्रयोग कर वापस आ रहे अधिकांश वोटरों का कहना था कि एक दिसंबर को आने वाला नतीजा ही इस चुप्पी का उत्तर देने का काम करेगा।
विज्ञापन
सूरज की बढ़ती गर्मी के साथ ही सियासी पारा चढ़ना शुरू हुआ। वैसे-वैसे सभी निकायों के मतदान केंद्रों पर वोटरों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। दिन के 12 बजे तक मतदान केंद्रों के बाहर खड़े प्रत्याशियों के समर्थक जैसे ही वोटरों को आते दिखे। वे अपने पक्ष में वोट डालने की अपील आंखों से ही करना शुरू कर दिए। लेकिन वोटर चुपचाप मतदान केंद्र में पहुंचने के बाद घरों के तरफ रुख कर ले रहे थे। इस स्थिति को देख वोटरों के रुख का पता करने में लगे प्रत्याशियों के समर्थक काफी परेशान दिखाई पड़े। हर कोई एक-दूसरे का चुपचाप चेहरा निहारता दिखा। जब प्रत्याशी अलग-अलग बूथ पर मौजूद समर्थकों से स्थिति का जायजा लेने का प्रयास किए तो जवाब से उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। इधर अपने परिचय के मतदाताओं के बूथ से वापस आने पर काना-फूसी कर रुख का पता करने का प्रयास करते रहे। अपने मताधिकारी का प्रयोग कर वापस आ रहे अधिकांश वोटरों का कहना था कि एक दिसंबर को आने वाला नतीजा ही इस चुप्पी का उत्तर देने का काम करेगा।
विज्ञापन