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कूड़े के ढेर में गुम हो चुकी है वाहनों की फाइलें
Updated Mon, 06 Nov 2017 11:18 PM IST
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गाजीपुर। एआरटीओ कार्यालय को स्थानांतरण हुए पांच माह बीत गए। इसके बाद भी फाइलों को कूड़े के ढेर की तरह एक कमरे में बंद कर दिया गया है। सैकड़ों फाइलों की ढेर के बीच पुराने वाहनों की फाइलें गुम हो चुकी हैं। यही कारण है कि वाहन स्वामी पुन: पंजीकरण और स्थानांतरण के लिए विभाग का चक्कर काट रहे हैं। यही नहीं अधिकांश फाइलें कार्यालय के पुराने भवन में जस की तस पड़ी हुई हैं। इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
कर्मचारियों का स्थानांतरण होने के बाद से भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वाहन स्वामियों को अपने वाहन बेचने के बाद मूल फाइल की आवश्यकता जब पड़ रही है, तो उन्हें कूड़े के ढेर के समान कमरे में बंद फाइलों में अपने वाहन की फाइलों का पता नहीं चल पा रहा है। इसके चलते रोज वाहन स्वामी कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। इस कारण वाहन स्वामी न तो अपनी पुरानी गाड़ी बेच पा रहे हैं और न ही खरीद पा रहे हैं। जुलाई माह में एआरटीओ कार्यालय का स्थानांतरण अंधऊ से महाराजगंज स्थित नए भवन में कर दिया गया था। कार्यालय स्थानांतरण होने के बाद पुराने मकान में फाइलें जस की तस पड़ी हुई हैं। कुछ दिन पहले इन फाइलों को विभाग की ओर से नए भवन तक लाया जरूर गया लेकिन उनको व्यवस्थित रखने के बजाए एक कमरे में कूड़े की तरह फेंक दिया गया। सबसे अधिक परेशानी उन वाहन स्वामियों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें अपने वाहन का पुन: पंजीकरण कराना है। वाहन की फाइल नहीं मिलने से वह पुन: पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। कार्यालय में तैनात नौ कर्मचारियों का स्थानांतरण करीब छह माह पूर्व अन्य जिलों में हो गया। स्थानांतरण के बाद मात्र छह कर्मचारी ही तैनात हैं। विभागीय सूत्रों की मानी जाए तो लिपिक की कमी के चलते विभाग के अधिकारी प्राइवेट लोगों से कार्य कराने पर विवश हैं। इस संबंध में एआरटीओ विनय कुमार ने बताया कि जल्द ही सभी पुरानी फाइलों को व्यवस्थित तरीके से लगा दिया जाएगा, जिससे पुराने वाहनों की फाइलें मिलने में आसानी हो सके। इसका निर्देश कर्मचारियों को दे दिया गया है।
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कर्मचारियों का स्थानांतरण होने के बाद से भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वाहन स्वामियों को अपने वाहन बेचने के बाद मूल फाइल की आवश्यकता जब पड़ रही है, तो उन्हें कूड़े के ढेर के समान कमरे में बंद फाइलों में अपने वाहन की फाइलों का पता नहीं चल पा रहा है। इसके चलते रोज वाहन स्वामी कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। इस कारण वाहन स्वामी न तो अपनी पुरानी गाड़ी बेच पा रहे हैं और न ही खरीद पा रहे हैं। जुलाई माह में एआरटीओ कार्यालय का स्थानांतरण अंधऊ से महाराजगंज स्थित नए भवन में कर दिया गया था। कार्यालय स्थानांतरण होने के बाद पुराने मकान में फाइलें जस की तस पड़ी हुई हैं। कुछ दिन पहले इन फाइलों को विभाग की ओर से नए भवन तक लाया जरूर गया लेकिन उनको व्यवस्थित रखने के बजाए एक कमरे में कूड़े की तरह फेंक दिया गया। सबसे अधिक परेशानी उन वाहन स्वामियों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें अपने वाहन का पुन: पंजीकरण कराना है। वाहन की फाइल नहीं मिलने से वह पुन: पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। कार्यालय में तैनात नौ कर्मचारियों का स्थानांतरण करीब छह माह पूर्व अन्य जिलों में हो गया। स्थानांतरण के बाद मात्र छह कर्मचारी ही तैनात हैं। विभागीय सूत्रों की मानी जाए तो लिपिक की कमी के चलते विभाग के अधिकारी प्राइवेट लोगों से कार्य कराने पर विवश हैं। इस संबंध में एआरटीओ विनय कुमार ने बताया कि जल्द ही सभी पुरानी फाइलों को व्यवस्थित तरीके से लगा दिया जाएगा, जिससे पुराने वाहनों की फाइलें मिलने में आसानी हो सके। इसका निर्देश कर्मचारियों को दे दिया गया है।
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