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सिर्फ आयकर में छूट से खुश नहीं हैं कर्मचारी
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गाजीपुर। सरकार की ओर से पेश किए अंतरिम बजट को लेकर कर्मचारी बहुत संतुष्ट नहीं हैं। आयकर की सीमा को बढ़ा दिए जाने की वह सराहना तो कर रहे हैं लेकिन पुरानी पेंशन की बहाली नहीं होने पर वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बार चुनाव के चलते जिस तरह लोक लुभावन बजट की उम्मीद की गई थी वैसा नहीं दिख रहा है। कर्मचारियों को आयकर का ही लालीपाप दिया गया है जबकि और कोई खास बात नहीं है।
कर्मचारी नेता अंबिका प्रसाद दूबे ने कहा कि आयकर में बड़ी छूट देकर सरकार ने काफी सराहनीय काम किया है। इससे देश के तीन करोड़ कर्मचारियों को लाभ मिला है। हमारी मूल मांग पुरानी पेंशन की बहाली पर ध्यान न देकर सरकार ने कर्मचारियों को निराश किया है। डा. आरके सिन्हा ने कहा कि हर कर्मचारी बचत चाहता है। सरकार ने आयकर की सीमा को ढाई लाख से पांच लाख कर दिया है। इससे खासकर कम वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिक लाभ होगा। कर्मचारी नेता विवेक सिंह ने कहा कि इस बजट में युवा, बेरोजगार, महिला, मजदूर आदि किसी के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। आयकर में छूट भी चुनावी स्टंट है। मध्यम और गरीब वर्ग जिस प्रकार से राहत की उम्मीद कर रहा था उस प्रकार की कोई भी किरण दिखाई नहीं दे रही है। उदय प्रकाश सिंह का कहना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन) को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। यह राहत वाली बात है। सरकार सभी कर्मचारियों की मूल समस्या को नजरअंदाज कर गई जिससे हम ठगे महसूस कर रहे हैं।
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कर्मचारी नेता अंबिका प्रसाद दूबे ने कहा कि आयकर में बड़ी छूट देकर सरकार ने काफी सराहनीय काम किया है। इससे देश के तीन करोड़ कर्मचारियों को लाभ मिला है। हमारी मूल मांग पुरानी पेंशन की बहाली पर ध्यान न देकर सरकार ने कर्मचारियों को निराश किया है। डा. आरके सिन्हा ने कहा कि हर कर्मचारी बचत चाहता है। सरकार ने आयकर की सीमा को ढाई लाख से पांच लाख कर दिया है। इससे खासकर कम वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिक लाभ होगा। कर्मचारी नेता विवेक सिंह ने कहा कि इस बजट में युवा, बेरोजगार, महिला, मजदूर आदि किसी के लिए कोई राहत नहीं दी गई है। आयकर में छूट भी चुनावी स्टंट है। मध्यम और गरीब वर्ग जिस प्रकार से राहत की उम्मीद कर रहा था उस प्रकार की कोई भी किरण दिखाई नहीं दे रही है। उदय प्रकाश सिंह का कहना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन) को 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया है। यह राहत वाली बात है। सरकार सभी कर्मचारियों की मूल समस्या को नजरअंदाज कर गई जिससे हम ठगे महसूस कर रहे हैं।
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