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‘हमरे ललवा क हत्यारा ले लेहलन जान..’
Updated Thu, 27 Sep 2018 11:00 PM IST
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गाजीपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र के बकराबाद गांव निवासी युवक बाबूलाल बिंद की हत्या की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। बेटे के मौत के गम में मां फुलमती पूरी तरह से बदहवास थी। उसके साथ परिवार के अन्य लोग भी चीख-पुकार कर रहे थे। मां चीखते-चिल्लाते हुए यह कह रही थी कि ‘ए भइया, उ लोग लड़की के मामला में हमरे ललवा क जान ले लेहलन।..’
सुबह साढ़े दस बजे से पहले बकराबाद गांव का माहौल पूरी तरह से शांत था। लोग अपने-अपने काम में जुटे थे। कोई खेतों में काम कर रहा था, तो कोई घर के अंदर और बाहर आराम कर रहा था। इसी बीच जैसे ही बाबूलाल के हत्या की सूचना मिली परिवार के लोगों ने चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। गांव के शांत माहौल में अशांति फैल गई। जिस किसी को भी घटना की जानकारी हुई, उसके पैर मृतक के घर की तरफ बढ़ने लगे थे। कुछ ही देर में दर्जनों महिला और पुरुष वहां पहुंच गए और बिलख रहे परिवार के लोगों को सांत्वना देने में जुट गए। घर से निकलते समय जिन लोगों ने बाबूलाल को देखा था, वह घटना से सन्न थे और कह रहे था कि सुबह वह हंसते हुए साइकिल से जा रहा था। मां फुलमती के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बार-बार चीखते हुए एक ही वाक्य दोहरा रही थी। हमरे बेटवा क हत्या खातिर उनहन के सजा मिले के चाही।’ उसकी इस व्यथा को सुन वहां मौजूद सांत्वना देने वाली महिलाओं की आंखें भी छलछला जा रही थी।
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सुबह साढ़े दस बजे से पहले बकराबाद गांव का माहौल पूरी तरह से शांत था। लोग अपने-अपने काम में जुटे थे। कोई खेतों में काम कर रहा था, तो कोई घर के अंदर और बाहर आराम कर रहा था। इसी बीच जैसे ही बाबूलाल के हत्या की सूचना मिली परिवार के लोगों ने चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। गांव के शांत माहौल में अशांति फैल गई। जिस किसी को भी घटना की जानकारी हुई, उसके पैर मृतक के घर की तरफ बढ़ने लगे थे। कुछ ही देर में दर्जनों महिला और पुरुष वहां पहुंच गए और बिलख रहे परिवार के लोगों को सांत्वना देने में जुट गए। घर से निकलते समय जिन लोगों ने बाबूलाल को देखा था, वह घटना से सन्न थे और कह रहे था कि सुबह वह हंसते हुए साइकिल से जा रहा था। मां फुलमती के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बार-बार चीखते हुए एक ही वाक्य दोहरा रही थी। हमरे बेटवा क हत्या खातिर उनहन के सजा मिले के चाही।’ उसकी इस व्यथा को सुन वहां मौजूद सांत्वना देने वाली महिलाओं की आंखें भी छलछला जा रही थी।
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