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तीन साल से बंद है सिंगेरा पशु सेवा केंद्र
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मरदह (गाजीपुर)। पशुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशु अस्पताल एवं सेवा केंद्रों की स्थापना की गई है लेकिन सुविधाओं के अभाव में पशुपालकों को इनका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के सिंगेरा गांव की राजभर बस्ती स्थित पशु सेवा केंद्र सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ चुका है। यह तीन वर्ष से बंद पड़ा है। ग्रामीण इस केंद्र का उपयोग उपला रखकर कर रहे हैं।
पशुपालकों की सुविधा के लिए वर्ष 1971 में सिंगेरा में सेवा केंद्र स्थापित किया गया था। इसमें सिंगेरा, इंदौर, तेजपुरा, डोड़सर, कोदई, बेलसड़ी, खजूरगांव, गेहुड़ी, मड़ही सहित करीब एक दर्जन गांव के पशुपालकों को पशुओं की चिकित्सा सुविधा तथा योजनाओं का लाभ मिलता था। इस केंद्र पर तैनात कर्मचारी सेवानिवृत हो गए। इसके बाद यहां सुविधाओं का अभाव होता गया। हालत यह हुई कि तीन वर्ष पहले इस केंद्र को बंद कर दिया गया। इसके बाद पशुपालकों की समस्या बढ़ गई। अब इस केंद्र पर ग्रामीणों ने पुआल, उपला तथा अन्य वस्तुओं को रखकर कब्जा जमा लिया है। कोदई क्षेत्र के बलबीर सिंह तथा हरिप्रसाद पांडेय ने बताया कि अब हमें छोटी-छोटी समस्याओं के निदान के लिए दस किलोमीटर दूर मरदह पशु अस्पताल या कासिमाबाद जाना पड़ता है। अधिकतर किसान प्राइवेट चिकित्सक से महंगा इलाज कराने पर मजबूर हैं। इस संबंध में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रकांत सिंह ने बताया कि पशु सेवा केंद्र पर तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी भृगुनाथ राम के तीन वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो जाने के बाद से ही यह केंद्र बंद पड़ा है। बाद में विभाग ने कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया। उच्चाधिकारियों को बताया गया है जल्द ही केंद्र को खोला जाएगा।
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पशुपालकों की सुविधा के लिए वर्ष 1971 में सिंगेरा में सेवा केंद्र स्थापित किया गया था। इसमें सिंगेरा, इंदौर, तेजपुरा, डोड़सर, कोदई, बेलसड़ी, खजूरगांव, गेहुड़ी, मड़ही सहित करीब एक दर्जन गांव के पशुपालकों को पशुओं की चिकित्सा सुविधा तथा योजनाओं का लाभ मिलता था। इस केंद्र पर तैनात कर्मचारी सेवानिवृत हो गए। इसके बाद यहां सुविधाओं का अभाव होता गया। हालत यह हुई कि तीन वर्ष पहले इस केंद्र को बंद कर दिया गया। इसके बाद पशुपालकों की समस्या बढ़ गई। अब इस केंद्र पर ग्रामीणों ने पुआल, उपला तथा अन्य वस्तुओं को रखकर कब्जा जमा लिया है। कोदई क्षेत्र के बलबीर सिंह तथा हरिप्रसाद पांडेय ने बताया कि अब हमें छोटी-छोटी समस्याओं के निदान के लिए दस किलोमीटर दूर मरदह पशु अस्पताल या कासिमाबाद जाना पड़ता है। अधिकतर किसान प्राइवेट चिकित्सक से महंगा इलाज कराने पर मजबूर हैं। इस संबंध में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रकांत सिंह ने बताया कि पशु सेवा केंद्र पर तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी भृगुनाथ राम के तीन वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो जाने के बाद से ही यह केंद्र बंद पड़ा है। बाद में विभाग ने कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया। उच्चाधिकारियों को बताया गया है जल्द ही केंद्र को खोला जाएगा।
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