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Ghazipur News: 54 करोड़ खर्च फिर भी बैसाखी पर बिजली के 93 खंभे
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कचहरी तिराहे पर झुके बिजली के जर्जर खंभे पर लगे ऐंगल। संवाद
बिजली निगम सुरक्षा का दावा करता है लेकिन शहर में जमीनी हकीकत इसके उलट है। नगर पालिका क्षेत्र के 14 इलाकों में 93 बिजली के खंभे एंगल के सहारे खड़े हैं। लोहे के खंभे जर्जर हो गए है। कभी भी बड़े हादसा हो सकता है।
हालत यह है कि बिजली निगम ने तीन साल में 54 करोड़ रुपये खर्च कर दिए फिर शहर में जर्जर दिख रहे हैं। लाल दरवाजा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय के 30 से 300 मीटर के दायरे में ही 19 में से सात जर्जर खंभे एंगल के सहारे खड़े हैं।
नगर क्षेत्र में करीब आठ हजार बिजली के खंभे लगाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच शासन ने 54 करोड़ रुपये आवंटित किए थे जिनसे 2553 किलोमीटर जर्जर तार और खंभों को बदला जाना था।
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इसके बावजूद रूईमंडी, नवाब साहब का फाटक, टाउन हॉल, लाल दरवाजा, मिश्र बाजार, सहकारी आमघाट कॉलोनी, आमघाट, ददीरघाट, कचहरी तिराहा, शास्त्रीनगर, विकास भवन, गोराबाजार, आरटीआई चौराहा और बंधवा में वर्षों से जर्जर खंभे नहीं बदले गए। इन क्षेत्रों में करीब 15 खंभे नीचे से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन्हीं खंभों से होकर हाईटेंशन लाइन गुजरी है। लाल दरवाजा निवासी राजीव पांडेय ने कहा कि बंदरों की उछल-कूद पर खंभे हिलने लगते हैं। आसपास के लोग सहम जाते हैं।
वहीं, शास्त्रीनगर निवासी आनंद राय ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जर्जर बिजली के खंभे नहीं हटाए गए।
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हालत यह है कि बिजली निगम ने तीन साल में 54 करोड़ रुपये खर्च कर दिए फिर शहर में जर्जर दिख रहे हैं। लाल दरवाजा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय के 30 से 300 मीटर के दायरे में ही 19 में से सात जर्जर खंभे एंगल के सहारे खड़े हैं।
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नगर क्षेत्र में करीब आठ हजार बिजली के खंभे लगाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2022 से 2025 के बीच शासन ने 54 करोड़ रुपये आवंटित किए थे जिनसे 2553 किलोमीटर जर्जर तार और खंभों को बदला जाना था।
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इसके बावजूद रूईमंडी, नवाब साहब का फाटक, टाउन हॉल, लाल दरवाजा, मिश्र बाजार, सहकारी आमघाट कॉलोनी, आमघाट, ददीरघाट, कचहरी तिराहा, शास्त्रीनगर, विकास भवन, गोराबाजार, आरटीआई चौराहा और बंधवा में वर्षों से जर्जर खंभे नहीं बदले गए। इन क्षेत्रों में करीब 15 खंभे नीचे से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन्हीं खंभों से होकर हाईटेंशन लाइन गुजरी है। लाल दरवाजा निवासी राजीव पांडेय ने कहा कि बंदरों की उछल-कूद पर खंभे हिलने लगते हैं। आसपास के लोग सहम जाते हैं।
वहीं, शास्त्रीनगर निवासी आनंद राय ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जर्जर बिजली के खंभे नहीं हटाए गए।