गाजीपुर। कलिकाल में जिस तरह का परिवेश चल रहा है, उसमें धर्म और संस्कार का लोप होता जा रहा है। अगर जरा भी चूक हुई तो व्यक्ति गलत मार्ग पर भटक जाता है। इसके लिए धर्म से जुड़े रहना बहुत आवश्यक है। सद्मार्ग पर चलने के लिए सही मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है। और सद्गुरु से बढ़कर कोई मार्गदर्शक नहीं हो सकता। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से रविवार को हंसयोग आश्रम में प्रवचन के दौरान महात्मा सुकर्मानंद जी ने यह बातें कही।
उन्होंने कहा कि बड़ी तपस्या तथा पुण्य कर्मों के फल स्वरूप ही जीवन में गुरु का आगमन होता है। भगवान और गुरु में कोई भेद नहीं होता। यही कारण है कि जिसको गुरु ने अपना लिया उसका मोक्ष तय है क्योंकि गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊपर होता है। संसार रूपी भव सागर से पार करने के लिए सुमिरन ही एकमात्र सहारा है। इस मानव योनि का उद्देश्य सिर्फ मोक्ष प्राप्त करना है। आज सुमिरन और भजन से ही जीवन को सार्थक किया जा सकता है। उन्होंने कई दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए मोक्ष प्राप्त करने की प्रेरणा दी। इस मौके पर किशोर यादव, उमेश मास्टर, कन्हैया गुप्ता, दुखंती यादव आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई। इस मौके पर आश्रम में सतपालजी महाराज से जुड़े साहित्य और सामान आदि के स्टाल भी लगाया गया था।