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पचीस करोड़ से होगा चौधरी चरण सिंह पंप गृह का कायाकल्प

Tue, 25 Sep 2018 11:08 PM IST
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:08 PM IST
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पचीस करोड़ से होगा चौधरी चरण सिंह पंप गृह का कायाकल्प
जमानिया(गाजीपुर)। क्षेत्र के धरतीपुत्रों के लिए वरदान के तौर पर पहचान बना चुके चक्काबांध गांव स्थित चौधरी चरण सिंह पंप गृह का काया-कल्प करने का प्रदेश सरकार ने मन बना लिया है। कई दशक से बदहाल इस पंप गृह में लगे हाई वोल्टेज पंप विद्युत मोटरों एवं अन्य उपकरणों को बदलने के लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। जल्द ही पंप गृह में लगी मशीनों को बदलकर नई मशीनों को लगाने का काम शुरू होगा।
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पंप गृह में आठ पंप और मोटर लगी हैं। कई दशक पहले लगी ये मोटर समय सीमा से अधिक चल चुकी हैं। इस कारण ये पंप मोटर के गंगा से पानी निकालने की इनकी क्षमता काफी कम हो चुकी है। आये दिन मोटरों में खराबी आती रहती है। सिंचाई विभाग के यांत्रिक डिवीजन के लोग रिपेयर करा कर किसी तरह काम चला रहे हैं। मोटरों पंप के ठीक ढंग से काम न करने से नहरों में पर्याप्त पानी नहीं आता। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। पानी की कमी से किसानों को सिंचाई के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में 397 किमी. नहरों का जाल बिछा है जिसमें से पोषक नहर 4.86 किमी मुख्य नहर 37.2 किमी है। इसके साथ ही पंप कैलान से देवैथा राजवाहा 14.60 किमी दिलदानगर राजवाहा 24 किमी ताड़ीघाट राजवाहा 27 किमी नौली राजवाहा 14 किमी है। इसके इलावा कई माइनर निकली है। पंप कैनाल में कुल 92 टेल हैं जहां तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इससे किसानों को परेशानी होती है। इस पंप कैनाल से 41 हजार 7 सौ 25 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है जिसकी सिंचाई इस पंप कैनाल से होती है। 1250 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज करने की क्षमता वाले पंप गृह का एक पंप हमेशा स्टैंड बाई मोड में रहता है। जबकि सात पंपों से नहरों में पानी छोड़ा जाता है। सात पंपों से नहरों में 1050 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना चाहिए लेकिन मोटरों और पंप पुरो और जर्जर होने के चलते कोई भी मोटर अपनी क्षमता से नहीं चलती है। ऐसे में नहरों में 5 सौ से 6 सौ क्यूसेक पानी ही दे पाता है। खरीफ के सीजन में इलाके में मुख्यत: धान की खेती होती है। धान की फसल की सिंचाई में बहुत अधिक पानी की खपत होती है। जबकि नहरों में पर्याप्त पानी नहीं रहता ऐसे में नहरों में होने वाली पानी की आपूर्ति में रोस्टरिंग करनी पड़ती है। मांग के सापेक्ष पानी की आपूर्ति न होने से किसानों को डीजल इंजन एवं ट्रैक्टर आदि के माध्यम से नहरों में पंप लगाकर सिंचाई करनी पड़ती है। किसानों ने कई बार प्रदेश सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। सरकार ने किसानों की सुध लेते हुए पंप गृह से जुड़ी परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी है। अब किसानों को उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में जब पंप गृह में लगे मोटरों पंप और उपकरणों को बदलकर नया लगा दिया जाएगा तो उनकी सिंचाई से जुड़ी समस्या दूर हो जाएगी। इस संबंध में एक्सईएन एसके विद्यार्थी ने बताया कि अक्तूबर माह में पंप का टेंडर किया जाएगा और टेंडर प्रकाशित होने के सात माह के अंदर पंप मोटर आदि पंप गृह की सामग्री उपलब्ध हो जाएगी। इसके बाद किसानों को पानी की समस्या से निजात मिल जाएगी।
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