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परंपरागत फसलों का मोह छोड़ एलोवेरा की खेती की तरफ रुख किया
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:01 PM IST
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जंगीपुर (गाजीपुर)। आज जहां खेती के मायने बदलते जा रहे हैं, वहीं एलोवेरा की खेती अपने आप में एक मिसाल बन चुकी है। बहुत कम खर्च से किसान लाखों कमा सकते हैं। इसी तरह जिले के अमौरा तथा बहलोलपुर गांव के किसान रंगनाथ सिंह और अरविंद सिंह उर्फ पप्पू के दिन बदलने वाले हैं। आने वाले दिनों में एलोवेरा के प्रोडक्ट जो बाजार से रखीदे जाएंगे, उनमें इनके खेत का भी एलोवेरा शामिल होगा। एलोवेरा की खेती के लिए रंगनाथ सिंह को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी सम्मानित कर चुके हैं। दोनों किसान औरों के लिए प्रेरणा हैं। इन किसानों ने धान, आलू, गेहू, सब्जी, गन्ने जैसी परंपरागत फसलों का मोह छोड़कर एलोवेरा की खेती की तरफ रुख किया है। पिछले कई साल से रंगनाथ सिंह जहां इस खेती को करते आ रहे हैं, वहीं महज दो साल से अरविंद ने भी एलोवेरा की खेती की शुरूआत की है। इसकी बदौलत दोनों किसानों ने अच्छी कमाई भी की है।
जिले के दोनों गांवों में एलोवेरा की खेती के साथ जूस और जेल निकालने की मशीन बैठा दी गई है। अब किसान स्वयं ही जूस तैयार कर बाजार में आपूर्ति कर रहे हैं। उनकी देखा-देखी उनके गांव और आस-पास किसान भी एलोवेरा की खेती करने का मन बना रहे हैं। इनकी माने तो आने वाले समय में खेती का दायरा बढ़ाने के साथ ही बड़ी कंपनियों से संपर्क कर एलोवेरा प्रोडक्ट को बेचने का काम करेंगे। तब एलोवेरा सीधे उनके खेत से सप्लाई होगा। जमानिया तहसील स्थित अमौरा गांव में रंगनाथ ने जहां पांच एकड़ में एलोवेरा की खेती की है, वहीं अरविंद ने बहलोलपुर में डेढ़ एकड़ भूमि में एलोवेरा लगाया है। बहलोलपुर के वर्तमान ग्राम प्रधान अरविंद सिंह राजनीति शास्त्र से एमए हैं। वह एलोवेरा के साथ ही कई औषधि की खेती करते हैं। उन्होंने गांव के पास ही एक एकड़ जमीन में 8000 एलोवेरा के पौधे लगाकर खेती की शुरूआत की थी। दूसरे साल डेढ़ एकड़ में एलोवेरा लगाए हुए हैं। वह बागवानी विभाग से एलोवेरा की खेती की ट्रेनिंग लेने राजस्थान सहित अन्य प्रांतों में जा चुके हैं। इसके बाद गांव के अन्य किसानों को भी एलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित करेंगे। अब तक कई किसानों को एलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
कंपनियां खेत से ले जाएंगी एलोवेरा
गाजीपुर। पहले साल आठ से दस माह में एलोवेरा की खेती पैदावार देनी शुरू कर देगी। पहले साल प्रति एकड़ 150 क्विंटल तक की ही पैदावार हो सकती है। दूसरे साल इसकी पैदावार बढ़कर 400 क्विंटल तक प्रति एकड़ पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं तीसरे और आखिरी साल में एलोवेरा की पैदावार 800 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। अमौरा गांव में एलोवेरा का बड़ा प्लांट स्थापित है। यहां से जूस और जैल निकलाकर बाजार में बेचा जाता है। भविष्य में खेत में ही मशीन लगाकर जूस, जैल व शैंपू तैयार करने की भी योजना बन रही है।
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परंपरागत खेती से कई गुना ज्यादा होगा मुनाफा
गाजीपुर। एलोविरा और क्लोन सफेदा लगाने के बाद तीन साल तक खेत में दूसरे फसल लगाने की जरूरत नहीं है। लगातार तीन साल तक एलोवेरा से आय मिलती रहेगी। इस पर बागवानी विभाग सब्सिडी भी देता है। इस बारे में जानकार बताते हैं कि एलोवेरा कम पानी में तैयार होनी वाली फसल है। एक साल में इसमें सिर्फ तीन से चार बार पानी देने से भी काम चल सकता है। कोई दवा, खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ फसल में खरपतवार की रोकथाम करनी पड़ती है। इस दौरान किसान प्रति एकड़ परंपरागत फसलों से तीनों साल कई गुना अधिक मुनाफा ले सकता है। एलोवेरा की पैदावार पूर्ण रूप से जैविक होता है।
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जिले के दोनों गांवों में एलोवेरा की खेती के साथ जूस और जेल निकालने की मशीन बैठा दी गई है। अब किसान स्वयं ही जूस तैयार कर बाजार में आपूर्ति कर रहे हैं। उनकी देखा-देखी उनके गांव और आस-पास किसान भी एलोवेरा की खेती करने का मन बना रहे हैं। इनकी माने तो आने वाले समय में खेती का दायरा बढ़ाने के साथ ही बड़ी कंपनियों से संपर्क कर एलोवेरा प्रोडक्ट को बेचने का काम करेंगे। तब एलोवेरा सीधे उनके खेत से सप्लाई होगा। जमानिया तहसील स्थित अमौरा गांव में रंगनाथ ने जहां पांच एकड़ में एलोवेरा की खेती की है, वहीं अरविंद ने बहलोलपुर में डेढ़ एकड़ भूमि में एलोवेरा लगाया है। बहलोलपुर के वर्तमान ग्राम प्रधान अरविंद सिंह राजनीति शास्त्र से एमए हैं। वह एलोवेरा के साथ ही कई औषधि की खेती करते हैं। उन्होंने गांव के पास ही एक एकड़ जमीन में 8000 एलोवेरा के पौधे लगाकर खेती की शुरूआत की थी। दूसरे साल डेढ़ एकड़ में एलोवेरा लगाए हुए हैं। वह बागवानी विभाग से एलोवेरा की खेती की ट्रेनिंग लेने राजस्थान सहित अन्य प्रांतों में जा चुके हैं। इसके बाद गांव के अन्य किसानों को भी एलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित करेंगे। अब तक कई किसानों को एलोवेरा की खेती के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
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कंपनियां खेत से ले जाएंगी एलोवेरा
गाजीपुर। पहले साल आठ से दस माह में एलोवेरा की खेती पैदावार देनी शुरू कर देगी। पहले साल प्रति एकड़ 150 क्विंटल तक की ही पैदावार हो सकती है। दूसरे साल इसकी पैदावार बढ़कर 400 क्विंटल तक प्रति एकड़ पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं तीसरे और आखिरी साल में एलोवेरा की पैदावार 800 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। अमौरा गांव में एलोवेरा का बड़ा प्लांट स्थापित है। यहां से जूस और जैल निकलाकर बाजार में बेचा जाता है। भविष्य में खेत में ही मशीन लगाकर जूस, जैल व शैंपू तैयार करने की भी योजना बन रही है।
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परंपरागत खेती से कई गुना ज्यादा होगा मुनाफा
गाजीपुर। एलोविरा और क्लोन सफेदा लगाने के बाद तीन साल तक खेत में दूसरे फसल लगाने की जरूरत नहीं है। लगातार तीन साल तक एलोवेरा से आय मिलती रहेगी। इस पर बागवानी विभाग सब्सिडी भी देता है। इस बारे में जानकार बताते हैं कि एलोवेरा कम पानी में तैयार होनी वाली फसल है। एक साल में इसमें सिर्फ तीन से चार बार पानी देने से भी काम चल सकता है। कोई दवा, खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ फसल में खरपतवार की रोकथाम करनी पड़ती है। इस दौरान किसान प्रति एकड़ परंपरागत फसलों से तीनों साल कई गुना अधिक मुनाफा ले सकता है। एलोवेरा की पैदावार पूर्ण रूप से जैविक होता है।