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नाव पर यात्री ही नहीं, बाइक और साइकिलें भी लाद रहे नाविक
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:50 PM IST
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जमानिया। गंगा नदी की लहरों पर नाव का खतरनाक सफर बेखौफ चल रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे यात्री ही नहीं, बल्कि बाइक और साइकिल भी नाविक लादकर चल रहे हैं। लोगों के इस पार से उस पार पहुंचने की जल्दी का नाविक भी फायदा उठाने से नहीं चूकते और नाव पर क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाकर नदी पार करा रहे हैं। नाव पर अन्य लोगों के साथ ही स्कूली बच्चे भी सवार रहते हैं। ऐसे में किसी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
गंगा में धरम्मपुर से काजीघाट के बीच नाव का संचालन होता है। नाविकों का हाल यह है कि अधिक कमाई के चक्कर में नाव पर क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाकर नदी पार करा रहे हैं। जिस नाव में दस लोगों के बैठने की क्षमता है, उस पर 15 से 25 लोगों को बैठा रहे हैं। यही नहीं इन नावों पर लोगों के साथ ही बाइक और साइकिलें भी लादी जा रही हैं। नाव जैसे-जैसे बीच धारा में पहुंचती है, वैसे-वैसे खासकर कमजोर दिल वालों की सांस किसी अनहोनी को लेकर ऊपर-नीचे होने लगती है। ऐसे में लोगों का ब्लड प्रेशर उस समय बढ़ जाता है, जब कभी-कभी नाव हवा या नाव पर सवार लोगों के हिलने-डुलने से डगमगाने लगती है। इस दौरान ऐसे लोगों की तरफ से हिलने-डुलने वालों को मना भी किया जाता है। नाव के सकुशल किनारे पहुंचने पर ऐसे लोग राहत की सांस लेते हैं। खास बात यह है कि जल्द गंगा पार पहुंचने के चक्कर में लोग नाविक का इस बात के लिए विरोध नहीं करते हैं कि वह क्षमता से अधिक सवारियों को क्यों बैठा रहा है। नदी के दोनों तरफ घाट पर लोक निर्माण विभाग द्वारा यात्रियों के लिए नाव से उतरने और चढ़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे खासकर नाव में बाइक और साइकिल उतारने-चढ़ाने के दौरान लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं। कुल मिलाकर नाव के इस खतरनाक संचालन पर प्रशासन की तरफ से रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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गंगा में धरम्मपुर से काजीघाट के बीच नाव का संचालन होता है। नाविकों का हाल यह है कि अधिक कमाई के चक्कर में नाव पर क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाकर नदी पार करा रहे हैं। जिस नाव में दस लोगों के बैठने की क्षमता है, उस पर 15 से 25 लोगों को बैठा रहे हैं। यही नहीं इन नावों पर लोगों के साथ ही बाइक और साइकिलें भी लादी जा रही हैं। नाव जैसे-जैसे बीच धारा में पहुंचती है, वैसे-वैसे खासकर कमजोर दिल वालों की सांस किसी अनहोनी को लेकर ऊपर-नीचे होने लगती है। ऐसे में लोगों का ब्लड प्रेशर उस समय बढ़ जाता है, जब कभी-कभी नाव हवा या नाव पर सवार लोगों के हिलने-डुलने से डगमगाने लगती है। इस दौरान ऐसे लोगों की तरफ से हिलने-डुलने वालों को मना भी किया जाता है। नाव के सकुशल किनारे पहुंचने पर ऐसे लोग राहत की सांस लेते हैं। खास बात यह है कि जल्द गंगा पार पहुंचने के चक्कर में लोग नाविक का इस बात के लिए विरोध नहीं करते हैं कि वह क्षमता से अधिक सवारियों को क्यों बैठा रहा है। नदी के दोनों तरफ घाट पर लोक निर्माण विभाग द्वारा यात्रियों के लिए नाव से उतरने और चढ़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इससे खासकर नाव में बाइक और साइकिल उतारने-चढ़ाने के दौरान लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं। कुल मिलाकर नाव के इस खतरनाक संचालन पर प्रशासन की तरफ से रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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