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Ghazipur News: एटीएम लगवाने में 50 लाख तो सुंदरीकरण में खर्च किया 200 लाख

Fri, 01 Sep 2023 11:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 01 Sep 2023 11:38 PM IST
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50 lakhs were spent on installing ATM and 200 lakhs were spent on beautification.
-पूर्वांचल को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में मिली हैं गंभीर वित्तीय अनियमितताएं, बैंक फंड का दुरुपयोग
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-बैंक के हाथ में नहीं हैं फूटी कौड़ी, आरबीआई को दी गलत सूचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। पूर्वांचल को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में गंभीर वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है। आरबीआई की जांच में यह बात साफ हो गई कि बैंक को मनमाने तरीके से संचालित किया गया। आरबीआई के नियमों को दरकिनार कर बैंक के फंड का दुरुपयोग किया गया। मनमाने तरीके से खूब गड़बड़झाला किया गया, जिसके कारण बैंक का नेटवर्थ ऋणात्मक (बैंक के अपनी पूंजी में कमी) 661.70 लाख रुपये पहुंच गई। यही नहीं, एक ओर अपने पैसे के लिए ग्राहक बैंक का चक्कर काट रहे थे तो दूसरे तरफ बैंक अपने हिसाब से पैसे लुटा रही थी। रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि बैंक में एटीएम लगाने के लिए 50 लाख और ब्रांच सुंदरीकरण के नाम पर 200 लाख रुपये खर्च किए गए।
भारतीय रिजर्व बैंक की जांच आख्या के आधार पर पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के बैंक के भूतपूर्व प्रवर्तक राम बाबू शाण्डिल्य, भूतपूर्व सीईओ विवेक पांडेय, प्रबंध कमेटी, लेखा परीक्षक मेसर्स विजय के. शर्मा एंड कंपनी, बैंक प्रोप्राइटर और संबंधित पार्टी व फर्म के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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रिपोर्ट से यह बात सामने कि 31 मार्च 2023 को बैंक का ऋण एवं अग्रिम (बैंक ने ऋण बांटा) 33.62 करोड़ था, जो 14 अगस्त को बढ़कर 42.85 करोड़ रुपये हो गया। यानि बैंक ने कुल 42.85 करोड़ रुपये का लोन जारी किया। पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पास 31 मार्च 2023 को 10.21 करोड़ हाथ में नगदी बताई गई थी, जिसमे से अप्रैल 9.37 करोड़ के ऋण बिना किसी कागजात के 9.37 लाख रुपये ऋण बांट दिया गया।
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यही नहीं, बैंक द्वारा 700 लाख से ऊपर की सरकारी प्रतिभूति को अक्तूबर 2022 से मई 2023 के बीच बेच दिया गया। विक्रय की धनराशि को प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से बैंक प्रमोटर्स और संबंधित पार्टियों को ट्रांसफर कर दिया गया। इस तरह बैंक न केवल मानक एसएलआर को बनाए रखने में असफल रहा, बल्कि कूट रचित अभिलेखीय सूचनाएं आरबीआई को देती रही।
आरबीआई रिपोर्ट के अनुसार बैंक प्रमोटर्स और पूर्व सीईओ द्वारा बैंक के फंड का दुरुपयोग किया गया। एटीएम लगवाने के लिए 50 लाख रुपये, ब्रांच सुंदरीकरण के लिए 200 लाख रुपये और 216 लाख रुपये के रिक्त पे आर्डर जारी किया गय। इस तरह जो लोन खाता के लिए जारी हुए थे वो बैंक के प्रमोटर्स और संबंधित पर्टियों द्वारा नगदीकरण कर लिया गया।

ऐसे खाते जो कई वर्षों से इस्तेमाल में नहीं थे और डीईएएफ में जाने चाहिए थे, उसे बैंक प्रमोटर्स व पूर्व सीईओ विवेक पाण्डेय द्वारा निकाल लिया गया। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अंसल कुमार के मुताबिक बैंक के पास इस समय बैलेंस नहीं हैं। बैंक की ओर से आरबीआई के अधिकारियों को सूचनाएं भी गलत प्रेषित की गई है। इसके चलते आरबीआई ने बैंक के लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही प्रकरण में मुकदमा भी दर्ज करा दिया है।
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