{"_id":"66d9e6d43f674482eb0997b1","slug":"450-members-and-14500-books-no-librarian-ghazipur-news-c-313-1-svns1019-120038-2024-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: 450 सदस्य और 14500 पुस्तकें, नहीं है लाइब्रेरियन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: 450 सदस्य और 14500 पुस्तकें, नहीं है लाइब्रेरियन
विज्ञापन
गाजीपुर। माना है कि किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। जैसे व्यक्ति अपने मित्र का हर पल, हर घड़ी, हर मुश्किल में साथ देता है, वैसे ही किताबें भी हर विषम परिस्थिति में मनुष्य की सहायक होती हैं और मार्गदर्शन करती हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित राजकीय पुस्तकालय में 450 सदस्य हैं और यहां विभिन्न विषयों की 14500 से अधिक पुस्तकें हैं लेकिन पुस्तकालय अध्यक्ष नहीं हैं। यहां शौचालय और अन्य सुविधाओं का भी अभाव है।
शहर के राजकीय सिटी इंटर काॅलेज स्थित एकमात्र राजकीय पुस्तकालय में अलग-अलग भाषाओं की विभिन्न विषयों पर आधारित हजारों पुस्तकें हैं। इस पुस्तकालय में सामान्य ज्ञान, सम-सामयिक विषयों, राजनीतिक एवं धार्मिक लगभग 14500 पुस्तकें हैं। इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्र एवं मैगजीन आती है। प्रत्येक वर्ष इस पुस्तकालय को शासन से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है। इसका आजीवन सदस्यता शुल्क 500 रुपये है जो रिफन्डेबल है।
इस पुस्तकालय में पाठकों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। पुस्तकालय में लाइब्रेरियन का पद रिक्त है। पूर्व के वर्षों की अपेक्षा वर्तमान में लोगों के अंदर पुस्तकालयों के प्रति उदासीनता आई है। अब स्थिति यह है कि प्रतिदिन लाइब्रेरी आने वालों की संख्या 15 से 20 रह गई है। डिजिटल लाइब्रेरी का चलन में आना और इंटरनेट पर विभिन्न प्रकार की जानकारी तथा पुस्तकों का उपलब्ध होना भी एक कारण है। मुहम्मदाबाद: शहीद स्मृति भवन में एक सार्वजनिक पुस्तकालय चलता है जिसमें लगभग 40-50 प्रतियोगी छात्र ज्ञान प्राप्त करते हैं।
विज्ञापन
केस-एक
औड़िहार: तीस हजार की आबादी वाले सैदपुर क्षेत्र में एक भी सार्वजनिक पुस्तकालय का न होना यहां के प्रबुद्ध नागरिकों को खटकता है। एक सार्वजनिक पुस्तकालय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कामता प्रसाद श्रीवास्तव की ओर से स्थापित कराया गया था। तत्कालीन विधायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित आत्माराम पांडेय ने इस पुस्तकालय को नागरिक पुस्तकालय का नाम देकर इसे आगे बढ़ाने का काम किया। तब लोग इस पुस्तकालय का लाभ लेते नहीं अघाते थे।
केस-दो
बहरियाबाद: कस्बा स्थित मजहर मेमोरियल उर्दू लाइब्रेरी में विभिन्न भाषाओं की हजारों पुस्तकें मौजूद हैं। इस पुस्तकालय की स्थापना स्थानीय कस्बा निवासी एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने 15 अगस्त 1978 को चन्द किताबों से की थी जो आज एक प्रतिष्ठित पुस्तकालय के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है। 1264 सदस्यों वाले इस पुस्तकालय में 34631 पुस्तकें हैं, जिनमें हिन्दी की 11317, उर्दू की 16210, अंग्रेजी की 3152, पाण्डुलिपियां 1007, अन्य 2945 पुस्तकें हैं। पुस्तकालय के सचिव एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि पुस्तकालय की समुचित व्यवस्था के लिए शासकीय सहायता एवं आधुनिकीकरण की व्यवस्था की आवश्यकता है।
केस-तीन
जमानिया: नगर पालिका परिषद का पुस्तकालय की ओर कोई ध्यान नहीं है। यहां आलमारी‚ बुकशैल्फ‚ बैठने के लिए रीडिंग रूम‚ टेबल-कुर्सी भी है लेकिन तिलक लाइब्रेरी कहीं खो गई है। पुस्तकालय को संचालित करने वाले कर्मियों के नहीं रहने से अच्छी-अच्छी पुस्तकों की उपलब्धता रहने के बावजूद वह पाठकों के हाथों तक नहीं पहुंच पा रही। 1990 के दशक में नगर पालिका कार्यालय को जर्जर भवन होने का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए चौधरी मोहल्ला स्थित पालिका कार्यालय से तिलक लाइब्रेरी में स्थानांतरित किया गया था लेकिन इसके बाद तभी से तिलक लाइब्रेरी का अस्तित्व समाप्त हो गया।
विज्ञापन
शहर के राजकीय सिटी इंटर काॅलेज स्थित एकमात्र राजकीय पुस्तकालय में अलग-अलग भाषाओं की विभिन्न विषयों पर आधारित हजारों पुस्तकें हैं। इस पुस्तकालय में सामान्य ज्ञान, सम-सामयिक विषयों, राजनीतिक एवं धार्मिक लगभग 14500 पुस्तकें हैं। इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्र एवं मैगजीन आती है। प्रत्येक वर्ष इस पुस्तकालय को शासन से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है। इसका आजीवन सदस्यता शुल्क 500 रुपये है जो रिफन्डेबल है।
विज्ञापन
इस पुस्तकालय में पाठकों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। पुस्तकालय में लाइब्रेरियन का पद रिक्त है। पूर्व के वर्षों की अपेक्षा वर्तमान में लोगों के अंदर पुस्तकालयों के प्रति उदासीनता आई है। अब स्थिति यह है कि प्रतिदिन लाइब्रेरी आने वालों की संख्या 15 से 20 रह गई है। डिजिटल लाइब्रेरी का चलन में आना और इंटरनेट पर विभिन्न प्रकार की जानकारी तथा पुस्तकों का उपलब्ध होना भी एक कारण है। मुहम्मदाबाद: शहीद स्मृति भवन में एक सार्वजनिक पुस्तकालय चलता है जिसमें लगभग 40-50 प्रतियोगी छात्र ज्ञान प्राप्त करते हैं।
विज्ञापन
केस-एक
औड़िहार: तीस हजार की आबादी वाले सैदपुर क्षेत्र में एक भी सार्वजनिक पुस्तकालय का न होना यहां के प्रबुद्ध नागरिकों को खटकता है। एक सार्वजनिक पुस्तकालय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कामता प्रसाद श्रीवास्तव की ओर से स्थापित कराया गया था। तत्कालीन विधायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित आत्माराम पांडेय ने इस पुस्तकालय को नागरिक पुस्तकालय का नाम देकर इसे आगे बढ़ाने का काम किया। तब लोग इस पुस्तकालय का लाभ लेते नहीं अघाते थे।
केस-दो
बहरियाबाद: कस्बा स्थित मजहर मेमोरियल उर्दू लाइब्रेरी में विभिन्न भाषाओं की हजारों पुस्तकें मौजूद हैं। इस पुस्तकालय की स्थापना स्थानीय कस्बा निवासी एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने 15 अगस्त 1978 को चन्द किताबों से की थी जो आज एक प्रतिष्ठित पुस्तकालय के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहा है। 1264 सदस्यों वाले इस पुस्तकालय में 34631 पुस्तकें हैं, जिनमें हिन्दी की 11317, उर्दू की 16210, अंग्रेजी की 3152, पाण्डुलिपियां 1007, अन्य 2945 पुस्तकें हैं। पुस्तकालय के सचिव एहतेशामुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि पुस्तकालय की समुचित व्यवस्था के लिए शासकीय सहायता एवं आधुनिकीकरण की व्यवस्था की आवश्यकता है।
केस-तीन
जमानिया: नगर पालिका परिषद का पुस्तकालय की ओर कोई ध्यान नहीं है। यहां आलमारी‚ बुकशैल्फ‚ बैठने के लिए रीडिंग रूम‚ टेबल-कुर्सी भी है लेकिन तिलक लाइब्रेरी कहीं खो गई है। पुस्तकालय को संचालित करने वाले कर्मियों के नहीं रहने से अच्छी-अच्छी पुस्तकों की उपलब्धता रहने के बावजूद वह पाठकों के हाथों तक नहीं पहुंच पा रही। 1990 के दशक में नगर पालिका कार्यालय को जर्जर भवन होने का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए चौधरी मोहल्ला स्थित पालिका कार्यालय से तिलक लाइब्रेरी में स्थानांतरित किया गया था लेकिन इसके बाद तभी से तिलक लाइब्रेरी का अस्तित्व समाप्त हो गया।