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Ghazipur News: बुखार के बाद 43 हुए दिव्यांग, इनकी उम्र 14 महीने से 22 साल के बीच, घरवालों ने रस्सी से बांधा

Tue, 20 Jan 2026 12:40 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 12:40 AM IST
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43 people became disabled after suffering from fever; their ages range from 14 months to 22 years
फतेउल्लहपुर के बहादीपुर मौजा में जांच करते सीएमओ डॉ एसके पांडेय। स्रोत- समाजसेवी
गाजीपुर। जिले के तीन ब्लॉकों के 11 गांवों में 43 बच्चे व युवा ऐसे मिले हैं, जिन्हें बुखार के बाद झटका आया और फिर दिव्यांगता के शिकार हो गए। इस बीमारी के कारण पीड़ित मानसिक रूप से कमजोर हो गए हैं। मां-बाप इनको चेन व रस्सी से बांध कर रखते हैं। पीड़ितों में 14 माह के बच्चे से लेकर 22 साल तक के युवा हैं। प्रभावित छह गांव करीब 5 किमी के दायरे में स्थित हैं। डीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर बीमारों की जांच की। सीएमओं ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। इधर, बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा का कहना है कि बीमारी का अध्ययन करने के लिए एक टीम जाएगी, जो कारणों का पता लगाएगी।
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समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने करीब तीन माह पूर्व एक मुट्ठी अनाज मांगने का अभियान शुरू किया था, उसी दौरान इस बीमारी का पता चला था। उन्होंने बताया कि सदर, देवकली और मनिहारी ब्लाॅक पहुंचे तो बच्चों की यह दशा देख आंखें भर आईं। शहर से करीब पांच से छह किमी दूर स्थित फत्तेहउल्लाहपुर के बहादीपुर में 4 बच्चे, मनिहार ब्लाॅक के हरिहरपुर में 4, हाला गांव में 6, देवकली ब्लाॅक के शिकारपुर में 8, धारीकला में 4, तारडीह में 7, सदर ब्लाॅक के भौरहा में 2, बुढ़नपुर में 2, राठौली सराय 4, खिजीरपुर और खुटहन में 1-1 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हैं।
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हाला गांव के बनवारी राम, गोविंद राम, अजय, हरिलाल, राजनाथ, सोनू, जनार्दन यादव, अमरनाथ, हरिहरपुर के चौथीराम, शिवशरण, राजू चौहान, बहादीपुर के सुनील बिंद ने बताया कि यह स्थिति करीब तीन माह से है। कई बच्चों का पीजीआई तक उपचार कराया गया। इसके बावजूद कोई फायदा नहीं हुआ।
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एक परिवार में दो बहनों सहित तीन बच्चे दिव्यांग

फत्तेहउल्लाहपुर के बहादीपुर गांव की सलोनी बिंद, रमिता, सोनी, बाबू, हरिहरपुर के राजू चौहान की दो पुत्रियां परिधि व प्रिया समेत 3 बच्चों के अलावा अयांश, शिवम, भगोल, हाला गांव निवासी राहुल, अमरनाथ का पुत्र, मनोज, ज्योति, जिगर, अंशु यादव, शिकारपुर के अर्जुन (6), आकाश, अंबिका, पीयूष कुमार, संजना बिंद, अमित बिंद, ज्याति, धारीकला के रोशनी बिंद, शिवांगी, सोनू, खरपट्टू बिंद, तारडीह के आशीष गुप्ता, शक्ति, सोनी, नागेंद्र, रंजीत (17), शुभम (17), दीपक कुमार, भौरहा के एक ही परिवार के अक्षय, राजू और कुदीप, श्यामसुंदर, बुढ़नपुर के अमन, विशाल कश्यप, राठौली सराय अरविंद बिंद (12), प्रमोद बिंद (9), मनोज बिंद (14), टमन बिंद (16), खिजीरपुर के आदित्य (16) , खुटहन नामजद करमईता के अंश पांडेय (10) दिव्यांग हो चुके हैं।







सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल टीम पहुंची जांच करने



डीएम अविनाश कुमार ने सीएमओ डाॅ. एसके पांडेय को इन गांवों में मेडिकल शिविर लगाकर उपचार करने के निर्देश दिए थे। सोमवार को सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने इन गांवों में कैंप लगाकर बच्चों की जांच की। वहीं, दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी पारसनाथ यादव के नेतृत्व में भी टीम ने जांच शुरू कर दी है।







जंजीरों में बंधा बचपन, मां-बाप हैं बेबस



समाजसेवी सिद्धार्थ राय ने बताया कि बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई गांवों में माता-पिता अपने बच्चों को रस्सियों या लोहे की चेन से बांधकर रखने को विवश हैं। परिजन बताते हैं कि मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण बच्चे भाग जाते हैं या खुद को और दूसरों को चोट पहुंचाते हैं। उनकी जिम्मेदारी अब बूढ़े माता-पिता के कंधों पर है। सिद्धार्थ राय ने बताया कि उन्होंने पहले जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा था। इसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से भी गुहार लगाई थी।




यह रहस्यमयी बीमारी नहीं है। दिव्यांगता की जानकारी मिली थी। सीएमओ व दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी को निरीक्षण के लिए भेजा गया था। तथ्य सामने आया कि संभवत: गर्भावस्था या अन्य तरह का वायरल बुखार वजह हो सकता है। सीएमओ को निर्देश दिया गया था कि कैंप लगाकर बच्चों का उपचार करें। गंभीर बच्चों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज कराया जाएगा। जांच के लिए टीम बनाई गई है।



- अविनाश कुमार, डीएम गाजीपुर।



मेडिकल टीम शिविर लगाकर बच्चों का उपचार कर रही है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है। - डाॅ. एसके पांडेय, सीएमओ
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