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हज यात्रा से सरकार को हटा लेनी चाहिए जीएसटी
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गाजीपुर। वर्ष 2018 के मुकाबले 2019 का हज किराया 10 से 15 हजार रुपये कम हो जाएगा, क्योंकि हज 2018 में जो हाजियों के हवाई किराए पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगी थी, अब 13 प्रतिशत से घट कर पांच प्रतिशत रह गई है। हज एक धार्मिक यात्रा है, इसलिए बची हुई पांच फीसदी जीएसटी को भी केंद्र सरकार को हटा देनी चाहिए। वाराणसी में हज हाउस बनाया जाना चाहिए। ये बातें गुरुवार को नगर के खजुरिया स्थित एक मैरेज हाल में प्रेसवार्ता के दौरान आल इंडिया हज सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्र हज कमेटी के पूर्व सदस्य हाफिज नौशाद अहमद आजमी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार एयर इंडिया को हज सब्सिडी देती थी, तो एयर इंडिया मनमाना किराया तय करती थी । किराए की कुछ रकम हाजी तथा कुछ रकम केंद्र सरकार देती थी। जिसे केंद्र की एनडीए सरकार ने वर्ष 2018 में खत्म कर दिया। 2012 में उच्चतम न्यायालय का यह फैसला था कि दस वर्ष के अंदर एयर इंडिया को दी जाने वाली हज सब्सिडी धीरे-धीरे समाप्त की जाए, लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार ने 2018 में चार साल पहले ही इसे समाप्त कर दिया। सब्सिडी खत्म होने के बाद मुसलमानों की तरफ से ग्लोबल टेंडर कराने की मांग होने लगी। ग्लोबल टेंडर होने से हवाई किराया, जो इस वक्त अधिक है, उसके आधे से भी कम किराए में यात्रा हो जाएगी और लगभग सात से आठ करोड़ रुपये हर साल मुसलमानों की गाढ़ी कमाई बचेगी। केंद्र की मोदी सरकार ने मुसलमानों की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में मुसलमानों की तरफ से देश में एक मुद्दा भी बन सकता है। केंद्र सरकार से पैसों की कोई भीख नहीं मांग रहे हैं, बल्कि हाजियों के हवाई किराए का ग्लोबल टेंडर के जरिए एक साफ-सुथरा निजाम चाहते हैं। इस मौके पर अकबर अंसारी, मो. माजिद, मौलाना, उस्मान आजमी, मौलाना ताज मोहम्मद, मौलाना सरफराज, मौलाना मुजिबुर्रहमान, मो. आसिफ फरहान आलम, जैनुल आब्दीन, जबिउल्लाह अंसारी, अब्दुल कयूम मास्टर, अतिउर रहमान, फरीद अख्तर आदि मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार एयर इंडिया को हज सब्सिडी देती थी, तो एयर इंडिया मनमाना किराया तय करती थी । किराए की कुछ रकम हाजी तथा कुछ रकम केंद्र सरकार देती थी। जिसे केंद्र की एनडीए सरकार ने वर्ष 2018 में खत्म कर दिया। 2012 में उच्चतम न्यायालय का यह फैसला था कि दस वर्ष के अंदर एयर इंडिया को दी जाने वाली हज सब्सिडी धीरे-धीरे समाप्त की जाए, लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार ने 2018 में चार साल पहले ही इसे समाप्त कर दिया। सब्सिडी खत्म होने के बाद मुसलमानों की तरफ से ग्लोबल टेंडर कराने की मांग होने लगी। ग्लोबल टेंडर होने से हवाई किराया, जो इस वक्त अधिक है, उसके आधे से भी कम किराए में यात्रा हो जाएगी और लगभग सात से आठ करोड़ रुपये हर साल मुसलमानों की गाढ़ी कमाई बचेगी। केंद्र की मोदी सरकार ने मुसलमानों की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, जो 2019 के लोकसभा चुनाव में मुसलमानों की तरफ से देश में एक मुद्दा भी बन सकता है। केंद्र सरकार से पैसों की कोई भीख नहीं मांग रहे हैं, बल्कि हाजियों के हवाई किराए का ग्लोबल टेंडर के जरिए एक साफ-सुथरा निजाम चाहते हैं। इस मौके पर अकबर अंसारी, मो. माजिद, मौलाना, उस्मान आजमी, मौलाना ताज मोहम्मद, मौलाना सरफराज, मौलाना मुजिबुर्रहमान, मो. आसिफ फरहान आलम, जैनुल आब्दीन, जबिउल्लाह अंसारी, अब्दुल कयूम मास्टर, अतिउर रहमान, फरीद अख्तर आदि मौजूद थे।
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