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श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी को मिलती है मुक्ति
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:40 PM IST
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मतसा। बिरउपुर ग्राम स्थित श्री परमेश्वर ब्रह्म बाबा मंदिर के परिसर में शतचंडी महायज्ञ के तहत नौ दिवसीय संगीतमय भागवत कथा आयोजित है। इसमें पंडित अमित महाराज ने कहा कि भागवत पुराण हिंदुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद्भागवत या केवल भागवतम भी कहते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान की कथा का दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होता। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। अमित महाराज ने कहा कि पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्य का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं और दुर्लभ मानव प्राणी को ही इस कथा का श्रवण लाभ प्राप्त होता है।
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उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। सत्संग एवं कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान की कथा का दर्शन हर किसी को प्राप्त नहीं होता। कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप है। अमित महाराज ने कहा कि पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्य का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं और दुर्लभ मानव प्राणी को ही इस कथा का श्रवण लाभ प्राप्त होता है।
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