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बारिश के साथ पड़े ओले, ठंड बढ़ी
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गाजीपुर। बुधवार की देर रात से अचानक मौसम का मिजाज बदल गया, जो तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान गुरुवार की रात से रुक-रुककर तेज और धीमी बारिश का जो क्रम शुरु हुआ, वह शुक्रवार को दोपहर तक जारी रहा। सुबह शहर के साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में ओले पड़े। इससे ठंड के साथ ही गलन में इजाफा हो गया। सुबह बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल गए। बारिश के बचाव के लिए लोगों को छाता का सहारा लेना पड़ा। पूरे दिन बदली छाई रही। शाम होते ही लोग गलन के साथ ठंड की जद में आ गए। मौसम के मिजाज की लोग दुहाई देते रहे।
नए वर्ष की शुरुआत से ही मौसम में उतार-चढ़ाव का खेल शुरु हो गया था। इस दौरान जनवरी माह में कई बार बारिश भी हुई। इसके बाद मौसम साफ हो गया। फरवरी माह की शुरुआत में लगातार कई दिनों से अच्छी धूप निकलने से लोगों को ठंड से काफी राहत मिली थी। देर तक धूप में रहने पर गर्मी होने लग रही थी। इससे लोगों ने शरीर पर से कपड़ों के बोझ को कम कम कर दिया था। इसी बीच बीते बुधवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और सर्द हवा चलने लगी। गुरुवार को पूरे दिन बदली छाई रही। इस बीच कई बार बूंदा-बांदी हुई। रात में करीब नौ बजे तेज बारिश शुरू हो गई। इससे बचाव के लिए मार्गों पर आवागमन कर रहे लोग सुरक्षित स्थानों पर खड़ा होकर बारिश बंद होने का इंतजार करने लगे। बारिश कम होने पर लोग गंतव्य के लिए रवाना हुए। पूरी रात रुक-रुक कर तेज और धीमी बारिश होती रही। इसी बीच शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे शहर के साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में ओले पड़े। गरज के बीच रुक-रुककर दिन में करीब साढ़े 11 बजे तक बारिश का क्रम बना रहा। जो लोग मौसम के मिजाज को देखते हुए छतरी लेकर घर से निकले थे, वह तो बारिश के बीच आवागमन करते नजर आए, लेकिन जिनके पास छतरी नहीं थी, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर खड़ा होकर बारिश बंद होने का इंतजार करना पड़ा। लोग बे-मौसम हुई बरसात की चर्चा करते रहे।
मौसम का मिजाज देख अभिभावकों की चिंता इस बात से बढ़ गई कि बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे। कहीं ऐसा न हो कि स्कूल जाते समय फिर से बारिश शुरू हो जाए, इससे बच्चा भीग जाएगा और उसकी तबीयत खराब होने की आशंका बनी रहेगी। इस आशंकावश अधिकांश अभिभावकों ने बच्चों को छाता देकर स्कूल भेजा। बारिश का रुक-रुक कर क्रम जारी था। इसी दौरान सुबह करीब 11 बजे पुन: गरज के साथ बारिश शुरू हो गई। इसी बीच कई स्कूलों की छुट्टी हो गई। जो बच्चे छाता लेकर गए थे, वह तो बारिश के बीच उसके सहारे घर के लिए रवाना हो गए, लेकिन जिन बच्चों के पास छाता नहीं था, वह स्कूल में रुक कर बारिश बंद होने का इंतजार करते रहे। कई अभिभावक छाता लेकर स्कूल पहुंचे और उसके सहारे बच्चे को लेकर घर आए। जिलाधिकारी आवास के पास बारिश के बीच अपने अभिभावक के साथ शाल ओढ़कर ठिठुरते हुए स्कूल से घर जाते नजर आए।
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नए वर्ष की शुरुआत से ही मौसम में उतार-चढ़ाव का खेल शुरु हो गया था। इस दौरान जनवरी माह में कई बार बारिश भी हुई। इसके बाद मौसम साफ हो गया। फरवरी माह की शुरुआत में लगातार कई दिनों से अच्छी धूप निकलने से लोगों को ठंड से काफी राहत मिली थी। देर तक धूप में रहने पर गर्मी होने लग रही थी। इससे लोगों ने शरीर पर से कपड़ों के बोझ को कम कम कर दिया था। इसी बीच बीते बुधवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और सर्द हवा चलने लगी। गुरुवार को पूरे दिन बदली छाई रही। इस बीच कई बार बूंदा-बांदी हुई। रात में करीब नौ बजे तेज बारिश शुरू हो गई। इससे बचाव के लिए मार्गों पर आवागमन कर रहे लोग सुरक्षित स्थानों पर खड़ा होकर बारिश बंद होने का इंतजार करने लगे। बारिश कम होने पर लोग गंतव्य के लिए रवाना हुए। पूरी रात रुक-रुक कर तेज और धीमी बारिश होती रही। इसी बीच शुक्रवार की सुबह करीब सात बजे शहर के साथ ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में ओले पड़े। गरज के बीच रुक-रुककर दिन में करीब साढ़े 11 बजे तक बारिश का क्रम बना रहा। जो लोग मौसम के मिजाज को देखते हुए छतरी लेकर घर से निकले थे, वह तो बारिश के बीच आवागमन करते नजर आए, लेकिन जिनके पास छतरी नहीं थी, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर खड़ा होकर बारिश बंद होने का इंतजार करना पड़ा। लोग बे-मौसम हुई बरसात की चर्चा करते रहे।
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मौसम का मिजाज देख अभिभावकों की चिंता इस बात से बढ़ गई कि बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे। कहीं ऐसा न हो कि स्कूल जाते समय फिर से बारिश शुरू हो जाए, इससे बच्चा भीग जाएगा और उसकी तबीयत खराब होने की आशंका बनी रहेगी। इस आशंकावश अधिकांश अभिभावकों ने बच्चों को छाता देकर स्कूल भेजा। बारिश का रुक-रुक कर क्रम जारी था। इसी दौरान सुबह करीब 11 बजे पुन: गरज के साथ बारिश शुरू हो गई। इसी बीच कई स्कूलों की छुट्टी हो गई। जो बच्चे छाता लेकर गए थे, वह तो बारिश के बीच उसके सहारे घर के लिए रवाना हो गए, लेकिन जिन बच्चों के पास छाता नहीं था, वह स्कूल में रुक कर बारिश बंद होने का इंतजार करते रहे। कई अभिभावक छाता लेकर स्कूल पहुंचे और उसके सहारे बच्चे को लेकर घर आए। जिलाधिकारी आवास के पास बारिश के बीच अपने अभिभावक के साथ शाल ओढ़कर ठिठुरते हुए स्कूल से घर जाते नजर आए।
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