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Ghazipur News: 31 टीमें करेंगी भेड़ों-बकरियों का टीकाकरण
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भेड़ों और बकरियों को पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स) बीमारी से बचाने के लिए पशु पालन विभाग की ओर से निशुल्क टीकाकरण किया जाएगा। पशु पालन विभाग की इस कवायद से जनपद के लगभग 40,000 बकरी पालकों को सुविधा मिलेगी। टीकाकरण को लेकर पशु पालन विभाग की ओर से कुल 31 टीमें गठित की गई हैं। डाेर-टू-डोर टीकाकरण का अभियान चलाया जाएगा। वैक्सीनेटर पशु पालकों के घर पहुंचकर बकरियों का टीकाकरण करेंगे। यह अभियान 31 मार्च तक चलेगा। पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में बकरियों की संख्या 1,51,400 है। जबकि भेड़ों की संख्या 19,171 है। पीपीआर बीमारी को बकरियों के लिए महामारी और बकरी प्लेग कहा जाता है। बकरियाें और भेड़ों को पीपीआर के कारण बुखार, मुंह में घाव, दस्त, निमोनिया आदि बीमारियां होती हैं। पीपीआर बीमारी में मृत्यु दर 50 से 80 प्रतिशत तक है। इस संबंध में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके गौतम ने बताया पीपीआर का टीकाकरण 31 मार्च तक चलेगा।
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पीपीआर फैलने का कारण
पशुओं के निकट रहने के कारण यह रोग फैलता है।
बीमार पशु के छींकने और खांसने के कारण यह हवा के जरिये फैलता है।
भेड़ और बकरियां पीपीआर रोग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं।
चार महीने से एक वर्ष के मेमनों को पीपीआर होने का खतरा ज्यादा रहता है।
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संक्रमित होने पर सात दिनों में हो जाती है मौत
पीपीआर से संक्रमित होने के कारण सात दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इससे संक्रमित होने के कारण बकरियां और भेड़ बुखार से पीड़ित हो जाती हैं। मुंह में छाले, दस्त और निमोनिया होना इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है। कुपोषण और परजीवियों से पीड़ित मेमनों के लिए पीपीआर गंभीर रूप से अपना असर दिखाता है। ज्यादातर मामलों में इस बीमारी से पीड़ित होने के बाद एक सप्ताह में बकरियों और भेड़ों की मौत हो जाती है।
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पीपीआर फैलने का कारण
पशुओं के निकट रहने के कारण यह रोग फैलता है।
बीमार पशु के छींकने और खांसने के कारण यह हवा के जरिये फैलता है।
भेड़ और बकरियां पीपीआर रोग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं।
चार महीने से एक वर्ष के मेमनों को पीपीआर होने का खतरा ज्यादा रहता है।
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संक्रमित होने पर सात दिनों में हो जाती है मौत
पीपीआर से संक्रमित होने के कारण सात दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इससे संक्रमित होने के कारण बकरियां और भेड़ बुखार से पीड़ित हो जाती हैं। मुंह में छाले, दस्त और निमोनिया होना इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है। कुपोषण और परजीवियों से पीड़ित मेमनों के लिए पीपीआर गंभीर रूप से अपना असर दिखाता है। ज्यादातर मामलों में इस बीमारी से पीड़ित होने के बाद एक सप्ताह में बकरियों और भेड़ों की मौत हो जाती है।
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