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आवेदनकर्ताओं से अधिक पैसे ऐंठ रहे सीएमएस केंद्र
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:09 AM IST
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गाजीपुर। सरकारी विभागों के कामकाज को ऑनलाइन निबटाने के लिए ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना ई-गवर्नेंस योजना के अंर्तगत गांव-गांव में सहज जनसेवा केंद्र/सीएमएस कंप्यूटर केंद्र खोले गए हैं। इसके जरिए सरकार आम लोगों तक घर बैठे डीएल, एनओसी, रिचार्ज, आय, जाति, निवास, विधवा, वृद्धा, विकलांग, मृत्यु- जन्म प्रमाण पत्र आदि की सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। इन केंद्रों को मनी ट्रांसफर तक का भी अधिकार मिला है। लेकिन सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना पर संचालक पानी फेर रहे हैँ। लोगों का कहना है कि उनका मनमाना शोषण किया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर केंद्र अवैध धन उगाही का जरिया बन गए हैं। केंद्र संचालक दूरदराज से आने वाले आवेदनकर्ताओं से अधिक पैसे ऐंठ रहे हैं। आलम यह है कि शिकायत के बाद भी इनमें कोई सुधार नहीं हो रहा है।
जिले में करीब 14 सौ सहज जनसेवा केंद्र/सीएमएस कंप्यूटर केंद्र खोले गए हैं। इनमें से करीब 20 फीसदी बंद पड़े हैं। वर्तमान में 920 केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से सरकारी सुविधाओं को ऑनलाइन निबटाने के काम किया जा रहा है। योजनाओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सहज जनसेवा केंद्रों की स्थापना की गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा रही है कि आवेदनकर्ता को गांव स्तर पर भी विभिन्न सरकारी योजना के साथ तहसील ब्लॉक नगर पालिका आदि से जारी होने वाले प्रमाण-पत्र प्राप्त हो जाए। आवेदनकर्ता को सरकारी कार्यालयों का चक्कर न काटना पड़े, लेकिन दूरदराज गांव में खुले जनसेवा केंद्र आवेदनकर्ताओं से अधिक पैसे ऐंठ रहे हैं। सभी प्रमाण पत्रों पर लोगों से 20 रुपये तक लेने का अधिकार केंद्रों को दिया गया है। बावजूद केंद्र संचालक 30 से 50 रुपये तक लोगों से ऐंठ रहे हैं।
जमानिया संवाददाता के अनुसार आवेदनकर्ता जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन करता है और फिर उसकी कॉपी लेकर सरकारी कार्यालयों का चक्क्रर काटता है। सरकार की ओर से जनसेवा केंद्रों पर लगाम कसने के लिए लोकेशन के साथ जनसेवा केंद्र की फोटो अपलोड कराया गया है। सहज जनसेवा केंद्रों के लोकेशन में अंतर मिलने पर उन जनसेवा केंद्रों को बंद भी किया गया है। बावजूद गांवों में अभी भी केंद्र कम दिखाई दे रहे हैं। तहसील ब्लॉक के आसपास अधिक केंद्र खुले हुए हैं जो गांव के नाम पर पंजीकृत हैं। मालूम हो कि केंद्रों के माध्यम से जाति निवास आय खतौनी वृद्धा पेंशन विधवा पेशन विकलांग पेंशन जन्म मृत्यु आदि सेवाओं को संचालित किया जाता है। मनमाने ढंग से केंद्र संचालक लोगों से पैसा ले रहे हैं।
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कासिमाबाद संवाददाता के मुताबिक तहसील क्षेत्र में लोगों की सुविधाओं के लिए चल रहे जनसेवा केंद्र धन उगाही का केंद्र बन गया है। इसके लिए सरकार ने एक निर्धारित शुल्क भी तय किया है। आय,जाति, निवास प्रमाण पत्र के लिए सरकार की तरफ से प्रत्येक का 20 रुपये निर्धारित किये गए हैं। जबकि जन सेवा केंद्र संचालक 20 रुपये की जगह सौ से दो सौ रुपये लेते हैं। इसी प्रकार हर ऑनलाइन सुविधा की आड़ में आम जनता से धन उगाही की जा रही है। इसके कारण लोगों में भारी आक्रोश है ।
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जिले में करीब 14 सौ सहज जनसेवा केंद्र/सीएमएस कंप्यूटर केंद्र खोले गए हैं। इनमें से करीब 20 फीसदी बंद पड़े हैं। वर्तमान में 920 केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से सरकारी सुविधाओं को ऑनलाइन निबटाने के काम किया जा रहा है। योजनाओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सहज जनसेवा केंद्रों की स्थापना की गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा रही है कि आवेदनकर्ता को गांव स्तर पर भी विभिन्न सरकारी योजना के साथ तहसील ब्लॉक नगर पालिका आदि से जारी होने वाले प्रमाण-पत्र प्राप्त हो जाए। आवेदनकर्ता को सरकारी कार्यालयों का चक्कर न काटना पड़े, लेकिन दूरदराज गांव में खुले जनसेवा केंद्र आवेदनकर्ताओं से अधिक पैसे ऐंठ रहे हैं। सभी प्रमाण पत्रों पर लोगों से 20 रुपये तक लेने का अधिकार केंद्रों को दिया गया है। बावजूद केंद्र संचालक 30 से 50 रुपये तक लोगों से ऐंठ रहे हैं।
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जमानिया संवाददाता के अनुसार आवेदनकर्ता जनसेवा केंद्र पर ऑनलाइन आवेदन करता है और फिर उसकी कॉपी लेकर सरकारी कार्यालयों का चक्क्रर काटता है। सरकार की ओर से जनसेवा केंद्रों पर लगाम कसने के लिए लोकेशन के साथ जनसेवा केंद्र की फोटो अपलोड कराया गया है। सहज जनसेवा केंद्रों के लोकेशन में अंतर मिलने पर उन जनसेवा केंद्रों को बंद भी किया गया है। बावजूद गांवों में अभी भी केंद्र कम दिखाई दे रहे हैं। तहसील ब्लॉक के आसपास अधिक केंद्र खुले हुए हैं जो गांव के नाम पर पंजीकृत हैं। मालूम हो कि केंद्रों के माध्यम से जाति निवास आय खतौनी वृद्धा पेंशन विधवा पेशन विकलांग पेंशन जन्म मृत्यु आदि सेवाओं को संचालित किया जाता है। मनमाने ढंग से केंद्र संचालक लोगों से पैसा ले रहे हैं।
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कासिमाबाद संवाददाता के मुताबिक तहसील क्षेत्र में लोगों की सुविधाओं के लिए चल रहे जनसेवा केंद्र धन उगाही का केंद्र बन गया है। इसके लिए सरकार ने एक निर्धारित शुल्क भी तय किया है। आय,जाति, निवास प्रमाण पत्र के लिए सरकार की तरफ से प्रत्येक का 20 रुपये निर्धारित किये गए हैं। जबकि जन सेवा केंद्र संचालक 20 रुपये की जगह सौ से दो सौ रुपये लेते हैं। इसी प्रकार हर ऑनलाइन सुविधा की आड़ में आम जनता से धन उगाही की जा रही है। इसके कारण लोगों में भारी आक्रोश है ।