{"_id":"5ca10849bdec22144b7f0011","slug":"201554057289-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेता लोगन क बहस सुनके राजनीति क ज्ञान बढ़ावत हईं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेता लोगन क बहस सुनके राजनीति क ज्ञान बढ़ावत हईं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर शहर के साथ गांवों में सियासी बयार तेज हो गई है। चुनाव के अलग-अलग मुद्दों को लेकर चाय की दुकानों पर चुस्कियों के साथ चर्चा चल रही है। यह चर्चा सुबह दुकान खुलने से लेकर शाम को बंद होने तक जारी है। बहस करने वाले अपनी-अपनी पार्टी का टेंपो हाई कर रहे हैं। बहस के दौरान कभी-कभी विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जा रही है।
रविवार को मरदह बस स्टैंड के पास स्थित सोहित पासी की चाय की दुकान पर कुछ इस तरह से छिड़ी थी राजनीतिक बहस। पंडितजी प्रणाम, नमस्ते यादव जी। आइए बैठिए। सोहित जरा यादव जी को भी चाय पिलाओ। और बताइए यादव जी क्या हाल-चाल है। ठीके बा पंडित जी। क्या बात है यादव जी इस समय दूध बांटने के बाद शहर में ही रुक जा रहे हैं क्या। नाहि पंडितजी, ई चुनाव क समय चलत ह न। दूध बांटे के बाद एक पार्टी कार्यालय पर चल जात हई। ऊहां पर टीवी पर समाचार के साथ ही मौजूद नेता लोगन क राजनीतिक बहस सुनके राजनीती क ज्ञान बढ़ावत हईं। क्यों आपको राजनीति का ज्ञान नहीं है क्या। काहे ना पंडितजी.. थोड़ा-बहुत त बटले बा न। वईसे सही पूछी पंडितजी त राजनीति के नाम पर हम बस अपने नेता के जानत रहली। उनके बाद जब उन कर लइका मुख्यमंत्री बनलन त उनके जाने लगनी। हमार नेता जी बुढ़ा गइल बाड़न, मगर उन कर लइका उनके राजनीतिक विरासत के संभाल लेहले बाड़न। तभी सबही भइया लोगन के सुदर्शन क नमस्कार। आप लोगन त सोहित के चाय के दुकान के राजनीतिक अखाड़ा बना देहले बाड़ी। पूरे दिन ईहा पर बइठ के राजनीतिक किचकिच करत हईं। कुछ दिन पहिले अखबार में आप लोगन हमरे नेता क बयान पढ़ले रहली ह न कि चुनाव जीते तो गरीबों को मिलेगा सालाना 72 हजार। हमरे बात के समझिहा भइला लोग। राम-राम हम चलत हईं।
विज्ञापन
रविवार को मरदह बस स्टैंड के पास स्थित सोहित पासी की चाय की दुकान पर कुछ इस तरह से छिड़ी थी राजनीतिक बहस। पंडितजी प्रणाम, नमस्ते यादव जी। आइए बैठिए। सोहित जरा यादव जी को भी चाय पिलाओ। और बताइए यादव जी क्या हाल-चाल है। ठीके बा पंडित जी। क्या बात है यादव जी इस समय दूध बांटने के बाद शहर में ही रुक जा रहे हैं क्या। नाहि पंडितजी, ई चुनाव क समय चलत ह न। दूध बांटे के बाद एक पार्टी कार्यालय पर चल जात हई। ऊहां पर टीवी पर समाचार के साथ ही मौजूद नेता लोगन क राजनीतिक बहस सुनके राजनीती क ज्ञान बढ़ावत हईं। क्यों आपको राजनीति का ज्ञान नहीं है क्या। काहे ना पंडितजी.. थोड़ा-बहुत त बटले बा न। वईसे सही पूछी पंडितजी त राजनीति के नाम पर हम बस अपने नेता के जानत रहली। उनके बाद जब उन कर लइका मुख्यमंत्री बनलन त उनके जाने लगनी। हमार नेता जी बुढ़ा गइल बाड़न, मगर उन कर लइका उनके राजनीतिक विरासत के संभाल लेहले बाड़न। तभी सबही भइया लोगन के सुदर्शन क नमस्कार। आप लोगन त सोहित के चाय के दुकान के राजनीतिक अखाड़ा बना देहले बाड़ी। पूरे दिन ईहा पर बइठ के राजनीतिक किचकिच करत हईं। कुछ दिन पहिले अखबार में आप लोगन हमरे नेता क बयान पढ़ले रहली ह न कि चुनाव जीते तो गरीबों को मिलेगा सालाना 72 हजार। हमरे बात के समझिहा भइला लोग। राम-राम हम चलत हईं।
विज्ञापन