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डीएपी खाद न मिलने से आलू की बुआई प्रभावित
Updated Sun, 11 Nov 2018 11:21 PM IST
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मुहम्मदाबाद। साधन सहकारी समिति कर्मचारी यूनियन की वेतन की मांग को लेकर प्रदेश व्यापी हड़ताल के चलते सहकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। इससे किसानों को डीएपी खाद न मिलने से आलू की बुआई प्रभावित हो रही है। यही नहीं धान की खरीद भी नहीं हो पा रही है।
सहकारी समितियों के कार्यरत कर्मचारियों को वेतन की कोई व्यवस्था न होने के कारण अधिकांश समितियों के कर्मचारियों का वेतन बकाया है। मुहम्मदाबाद तहसील की 35 सहकारी समितियों में कामकाज पूरी तरह ठप है। मुहम्मदाबाद आलू उत्पादक क्षेत्र होने के कारण पूरे तहसील क्षेत्र में आलू की बुआई जोरों पर चल रही है। समिति के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते डीएपी खाद न मिलने से बुआई प्रभावित हो रही है। किसान मजबूरी में अधिक मूल्य पर प्राइवेट दुकानों से खाद लेने के लिए मजबूर हो रहे है। साथ ही प्राइवेट दुकानों से मिलावटी खाद मिलने की आशंका से डरे सहमे भी हैं। समिति के कर्मचारियों का दो वर्ष से लेकर छह वर्ष तक का वेतन बकाया है। उसके बाद भी एक प्रभारी सचिव के जिम्मे दो से चार समितियों का चार्ज मिला हुआ है। इससे समितियों पर प्रतिदिन सचिव के न रहने से उन्हें खाद बीज मिलने में दिक्कतें आ रही है। दूसरी तरफ पहली नवंबर से पूर्वी उ.प्र. में धान की खरीद शुरू हुई है। पीसीएफ की खरीद सहकारी समितियों के केंद्रों से होती है लेकिन हड़ताल के चलते समितियों पर बने खरीद केंद्रों पर ताला लटक रहा है। इससे किसान धान बेचने के लिए परेशान हैं।
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सहकारी समितियों के कार्यरत कर्मचारियों को वेतन की कोई व्यवस्था न होने के कारण अधिकांश समितियों के कर्मचारियों का वेतन बकाया है। मुहम्मदाबाद तहसील की 35 सहकारी समितियों में कामकाज पूरी तरह ठप है। मुहम्मदाबाद आलू उत्पादक क्षेत्र होने के कारण पूरे तहसील क्षेत्र में आलू की बुआई जोरों पर चल रही है। समिति के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते डीएपी खाद न मिलने से बुआई प्रभावित हो रही है। किसान मजबूरी में अधिक मूल्य पर प्राइवेट दुकानों से खाद लेने के लिए मजबूर हो रहे है। साथ ही प्राइवेट दुकानों से मिलावटी खाद मिलने की आशंका से डरे सहमे भी हैं। समिति के कर्मचारियों का दो वर्ष से लेकर छह वर्ष तक का वेतन बकाया है। उसके बाद भी एक प्रभारी सचिव के जिम्मे दो से चार समितियों का चार्ज मिला हुआ है। इससे समितियों पर प्रतिदिन सचिव के न रहने से उन्हें खाद बीज मिलने में दिक्कतें आ रही है। दूसरी तरफ पहली नवंबर से पूर्वी उ.प्र. में धान की खरीद शुरू हुई है। पीसीएफ की खरीद सहकारी समितियों के केंद्रों से होती है लेकिन हड़ताल के चलते समितियों पर बने खरीद केंद्रों पर ताला लटक रहा है। इससे किसान धान बेचने के लिए परेशान हैं।
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