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निकाय चुनाव : जीत-हार की गणना में जुटे समर्थक
Updated Thu, 23 Nov 2017 10:58 PM IST
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गाजीपुर। नगर निकाय चुनाव खत्म होने के साथ ही जीत-हार की गणना करने में पार्टियों के समर्थक जुट गए हैं। बूथवार मतों की समीक्षा करने में जहां प्रत्याशी और उनके एजेंट माथापच्ची कर रहे हैं, वहीं जीत के लिए अपने-अपने तरीके से आकलन भी किया जा रहा है। यूं तो जनपद के आठों नगर निकायों में लड़ाई आमने-सामने की मानी जा रही है, लेकिन कुछ बागी और निर्दल प्रत्याशी भी प्रमुख दलों की जीत को हार में बदल सकते हैं।
बुधवार को प्रथम चरण के मतदान के दौरान कई निकायों में समय से पहले, तो कुछ जगहों पर समय के बाद तक मतदान हुआ। मतदान खत्म होने के बाद पार्टियों के समर्थकों ने राहत की सांस ली और लंबे समय तक प्रचार मेें जुटे रहने के बाद अपने-अपने घर पहुंचे। लेकिन जीत-हार को लेकर उनके अंदर गतिरोध जारी रहा। हर एक दूसरे समर्थक से मोबाइल पर देर रात तक वोट की सही जानकारी लेते रहे। गुरुवार की सुबह समर्थक अपने-अपने पार्टी कार्यालय में जुटे और बूथ मैनेजमेंट की समीक्षा करने में लग गए। किस बूथ पर कितना वोट पक्ष में पड़ा और कितना वोट विरोधियों को मिला, इसकी समीक्षा करने में लोग पूरे दिन भिड़े रहे। इस बीच इस बात पर भी चर्चा की जा रही थी कि किस निर्दलीय प्रत्याशी ने कहां किसका कितना वोट काटा है, कहीं यह वोट हार का कारण तो नहीं बनने वाला है। इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की जा रही है। वोटरों के अंतिम समय तक न खुलने की वजह से अनुमान भी लगाया जा रहा है कि कई जगह प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की नींद उड़ गई है।
जिले के तीन नगर पालिका और पांच नगर पंचायतों में हार-जीत के कयास हर चट्टी-चौराहों पर लगने शुरू हो गए हैं। जीत-हार को लेकर आंकड़ेबाजी शुरू हो गई है। कुछ प्रत्याशी चुनाव के दूसरे दिन अपनी जीत सुनिश्चित मान लोगों से मिलने निकल रहे हैं, तो कुछ प्रत्याशी के समर्थक उम्मीदवार की जीत मानकर बधाई देते रहे। सुबह से ही होटल, पान की दुकानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोग एक दूसरे से हार-जीत के संबंध में राय जानने की कोशिश करते रहे। वोट डालने के बाद समर्थक अपने चहेते उम्मीदवार की जीत का दावा कर रहे हैं। जबकि आम मतदाता जाति व धर्म के आधार पर भी मतदान होने की बात करते हुए मतों के ध्रुवीकरण के आधार पर हार जीत की कयासबाजी लगा रहे हैं।
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बुधवार को प्रथम चरण के मतदान के दौरान कई निकायों में समय से पहले, तो कुछ जगहों पर समय के बाद तक मतदान हुआ। मतदान खत्म होने के बाद पार्टियों के समर्थकों ने राहत की सांस ली और लंबे समय तक प्रचार मेें जुटे रहने के बाद अपने-अपने घर पहुंचे। लेकिन जीत-हार को लेकर उनके अंदर गतिरोध जारी रहा। हर एक दूसरे समर्थक से मोबाइल पर देर रात तक वोट की सही जानकारी लेते रहे। गुरुवार की सुबह समर्थक अपने-अपने पार्टी कार्यालय में जुटे और बूथ मैनेजमेंट की समीक्षा करने में लग गए। किस बूथ पर कितना वोट पक्ष में पड़ा और कितना वोट विरोधियों को मिला, इसकी समीक्षा करने में लोग पूरे दिन भिड़े रहे। इस बीच इस बात पर भी चर्चा की जा रही थी कि किस निर्दलीय प्रत्याशी ने कहां किसका कितना वोट काटा है, कहीं यह वोट हार का कारण तो नहीं बनने वाला है। इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की जा रही है। वोटरों के अंतिम समय तक न खुलने की वजह से अनुमान भी लगाया जा रहा है कि कई जगह प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की नींद उड़ गई है।
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जिले के तीन नगर पालिका और पांच नगर पंचायतों में हार-जीत के कयास हर चट्टी-चौराहों पर लगने शुरू हो गए हैं। जीत-हार को लेकर आंकड़ेबाजी शुरू हो गई है। कुछ प्रत्याशी चुनाव के दूसरे दिन अपनी जीत सुनिश्चित मान लोगों से मिलने निकल रहे हैं, तो कुछ प्रत्याशी के समर्थक उम्मीदवार की जीत मानकर बधाई देते रहे। सुबह से ही होटल, पान की दुकानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोग एक दूसरे से हार-जीत के संबंध में राय जानने की कोशिश करते रहे। वोट डालने के बाद समर्थक अपने चहेते उम्मीदवार की जीत का दावा कर रहे हैं। जबकि आम मतदाता जाति व धर्म के आधार पर भी मतदान होने की बात करते हुए मतों के ध्रुवीकरण के आधार पर हार जीत की कयासबाजी लगा रहे हैं।
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