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श्रीकृष्ण के प्रेम में लीन से दूर होते है संकट
Updated Wed, 16 Aug 2017 11:07 PM IST
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जखनियां। सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया। इस मौके पर पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने कहा कि जो मनुष्य केवल एक बार श्रीकृष्ण के गुणों में प्रेम करने वाले अपने चित्त को श्रीकृष्ण के चरण कमलों में लगा देता है वह पापों से दूर हो जाता है। जो व्यक्ति श्रीकृष्ण के प्रेम में लीन रहता है, उनके सारे संकट अपने आप दूर होते जाते हैं।
उन्होंने भगवान के विभिन्न छह स्वरूपों के दर्शन-पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस भक्त के मन में भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों का स्मरण सदा बना रहता है,उसके पापों का नाश, कल्याण की प्राप्ति, परमात्मा की भक्ति और वैराग्ययुक्त ज्ञान की प्राप्ति अपने आप ही हो जाती है। जबकि भगवान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण जब चित्त में विराजते हैं, तब उनके प्रभाव से कलयुग के सारे पाप और द्रव्य, देश तथा आत्मा के दोष नष्ट हो जाते हैं। उत्तराखंड के प्रख्यात संत एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी मोहनानंद यति जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की महाष्टमी रात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को ही मोहरात्रि कहा जाता है। इस रात को सभी कृष्ण भक्त योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हैं और मंत्र जपते हुए मोह-माया से दूर जाते है। जन्माष्टमी का जो व्रत है, वह व्रतराज व्रत है, इस व्रत में काफी शक्ति होती है। इस व्रत को करने से इसके सविधि पालन से आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशि प्राप्त कर लेंगे। इस अवसर पर वैदिक विद्वान आचार्य रामशंकर द्विवेदी जी, वैदिक विद्वान अनुराग गर्ग, गगन भार्गव, शरद पांडेय, अनुपम मिश्रा, अभिषेक पांडेय, राम सजीवन द्विवेदी, शिवकुमार पंडित, संतोष यादव, मनीष पांडेय, सर्वेश जी, स्वामी अभयानंद यति, देवेंद्र सिंह, श्रवण कुमार पांडेय, अमित कुमार सिंह, लौटू प्रसाद, गुलाब प्रधान, विजय भान सिंह आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने भगवान के विभिन्न छह स्वरूपों के दर्शन-पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस भक्त के मन में भगवान श्रीकृष्ण के चरण कमलों का स्मरण सदा बना रहता है,उसके पापों का नाश, कल्याण की प्राप्ति, परमात्मा की भक्ति और वैराग्ययुक्त ज्ञान की प्राप्ति अपने आप ही हो जाती है। जबकि भगवान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण जब चित्त में विराजते हैं, तब उनके प्रभाव से कलयुग के सारे पाप और द्रव्य, देश तथा आत्मा के दोष नष्ट हो जाते हैं। उत्तराखंड के प्रख्यात संत एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी मोहनानंद यति जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की महाष्टमी रात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को ही मोहरात्रि कहा जाता है। इस रात को सभी कृष्ण भक्त योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपते हैं और मंत्र जपते हुए मोह-माया से दूर जाते है। जन्माष्टमी का जो व्रत है, वह व्रतराज व्रत है, इस व्रत में काफी शक्ति होती है। इस व्रत को करने से इसके सविधि पालन से आप अनेक व्रतों से प्राप्त होने वाली महान पुण्यराशि प्राप्त कर लेंगे। इस अवसर पर वैदिक विद्वान आचार्य रामशंकर द्विवेदी जी, वैदिक विद्वान अनुराग गर्ग, गगन भार्गव, शरद पांडेय, अनुपम मिश्रा, अभिषेक पांडेय, राम सजीवन द्विवेदी, शिवकुमार पंडित, संतोष यादव, मनीष पांडेय, सर्वेश जी, स्वामी अभयानंद यति, देवेंद्र सिंह, श्रवण कुमार पांडेय, अमित कुमार सिंह, लौटू प्रसाद, गुलाब प्रधान, विजय भान सिंह आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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