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सिर्फ हवा में तीर चला रही एसटीएफ सहित पुलिस टीम
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:26 PM IST
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करंडा(गाजीपुर)। आरएएस कार्यकर्ता और पत्रकार हत्याकांड के खुलासे में लगी एसटीएफ सहित पुलिस की छह टीमें दस दिनों में हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी हैं। यह टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में अपराधियों तथा शूटरों की तलाश में जुटी जरूर हैं, लेकिन अभी तक इनके हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा है। जबकि पुलिस महकमे के उच्चाधिकारी खुलासे और अपराधियों के गैंग के करीब होने का दावा कर रही है। सबसे बड़ी बात पुलिस अभी तक हत्या के कारणों का भी पता नहीं लगा सकी है।
मालूम हो कि बीते 21 अक्तूबर को ब्राह्मणपुरा चट्टी पर स्थित गिट्टी-बालू की दूकान पर बैठे राजेश मिश्र की बदमाशों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। साथ ही बदमाशों की गोली से घायल उनके छोटे भाई का इलाज वाराणसी में चल रहा है। घटना की जानकारी होते ही मौके पर पहुंचे एसपी सोमेन वर्मा ने आनन-फानन में पुलिस टीम का गठन किया। घटना के बाद गांव में एसटीएफ की टीम भी कैंप करने गली थी। 22 अक्टूबर को आईजी वाराणसी दीपक रत्न और एडीजी वाराणसी विश्वजीत महापात्रा ने बीते 24 अक्तूबर को घटना स्थल का निरीक्षण किए। दोनों अधिकारियों ने 72 घंटे के अंदर मामले का खुलासा करने का दावा किया था। लेकिन पत्रकार और संघ कार्यकर्ता राजेश मिश्रा की हत्या के दस दिन बीत चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस की टीमें और एसटीएफ अभी तक एक ही जगह कदम ताल कर रही है। घटना को लेकर परिजन तथा क्षेत्रवासी पुलिस की कार्य कुशलता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिले के तेज-तर्रार थानेदारों के नेतृत्व में छह टीमें काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक एक भी अपराधी नहीं पकड़े गए और न ही अभी तक घटना के कारणों का खुलासा हुआ है। ऐसा न हो कि पुलिस अपनी वाहवाही लेने में निर्देशों को ही फंसा दे। पुलिस के आला अधिकारियों के बार-बार जल्द पकड़ लिए जाने का दावा करने के बाद भी अभी तक न तो हमलावरों को पकड़ा गया और न ही षणयंत्रकारियों की पहचान की जा सकी। पुलिस टीमों का यह हाल उनकी कार्यकुशलता पर भी सवाल उठता है।
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मालूम हो कि बीते 21 अक्तूबर को ब्राह्मणपुरा चट्टी पर स्थित गिट्टी-बालू की दूकान पर बैठे राजेश मिश्र की बदमाशों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। साथ ही बदमाशों की गोली से घायल उनके छोटे भाई का इलाज वाराणसी में चल रहा है। घटना की जानकारी होते ही मौके पर पहुंचे एसपी सोमेन वर्मा ने आनन-फानन में पुलिस टीम का गठन किया। घटना के बाद गांव में एसटीएफ की टीम भी कैंप करने गली थी। 22 अक्टूबर को आईजी वाराणसी दीपक रत्न और एडीजी वाराणसी विश्वजीत महापात्रा ने बीते 24 अक्तूबर को घटना स्थल का निरीक्षण किए। दोनों अधिकारियों ने 72 घंटे के अंदर मामले का खुलासा करने का दावा किया था। लेकिन पत्रकार और संघ कार्यकर्ता राजेश मिश्रा की हत्या के दस दिन बीत चुके हैं। इसके बाद भी पुलिस की टीमें और एसटीएफ अभी तक एक ही जगह कदम ताल कर रही है। घटना को लेकर परिजन तथा क्षेत्रवासी पुलिस की कार्य कुशलता पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिले के तेज-तर्रार थानेदारों के नेतृत्व में छह टीमें काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक एक भी अपराधी नहीं पकड़े गए और न ही अभी तक घटना के कारणों का खुलासा हुआ है। ऐसा न हो कि पुलिस अपनी वाहवाही लेने में निर्देशों को ही फंसा दे। पुलिस के आला अधिकारियों के बार-बार जल्द पकड़ लिए जाने का दावा करने के बाद भी अभी तक न तो हमलावरों को पकड़ा गया और न ही षणयंत्रकारियों की पहचान की जा सकी। पुलिस टीमों का यह हाल उनकी कार्यकुशलता पर भी सवाल उठता है।
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