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नंदगंज चीनी मिल चालू होने की जगी आस
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गाजीपुर। प्रदेश सरकार के बजट के बाद अब जिले के नंदगंज स्थित चीनी मिल के चालू होने की आस एक बार फिर जाग गई है। बजट में सरकारी क्षेत्र की बंद चीनी मिलों को चालू करने के लिए 50 करोड़ तथा सहकारी क्षेत्र की बंद चीनी मिलों को चालू करने के लिए 25 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। अगर सरकार की नजरें इधर भी इनायत हो गई तो 1997 से बंद इस चीनी मिल को भी चालू किया जा सकता है। इसके चालू होते ही गन्ना उत्पादन बढ़ने के साथ ही लोगों को रोजगार का भी अवसर मिलेगा।
पटेल आयोग की संस्तुति मिलने के बाद 1978 में नंदगंज के सिहोरी में सरकारी शुगर मिल की स्थापना की गई। उस दौरान इस मिल से वर्ष भर में करीब 12 लाख कुंतल गन्ने से चीनी बनाई जाती था। इसका असर यह हुआ कि गाजीपुर के साथ ही आसपास के जिलों के किसानों ने भी गन्ना उत्पादन पर जोर दिया। युवाओं को रोजगार मिलने के साथ ही किसान भी समृद्ध और खुशहाल होने लगे लेकिन यह खुशी काफी दिन तक नहीं रह पाई और गलत नीतियों के कारण यह चीनी मिल घाटे में जाने लगी। परिणाम यह हुआ कि करीब 19 वर्ष बाद इस मिल में ताला लटक गया। इससे जहां हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए वहीं किसानों के गन्ना भुगतान का लाखों रुपए भी अटक गया। मिल बंद होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारें आई। बंद मिल को खोलने को लेकर बयानबाजी भी हुई लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। अब योगी सरकार ने बंद चीनी मिलों को खोलने के लिए बजट का प्रावधान किया है। अगर समय की मांग को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने मन से पहल कर दी तो एक बार फिर वही पुरानी खुशहाली वापस हो सकती है।
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पटेल आयोग की संस्तुति मिलने के बाद 1978 में नंदगंज के सिहोरी में सरकारी शुगर मिल की स्थापना की गई। उस दौरान इस मिल से वर्ष भर में करीब 12 लाख कुंतल गन्ने से चीनी बनाई जाती था। इसका असर यह हुआ कि गाजीपुर के साथ ही आसपास के जिलों के किसानों ने भी गन्ना उत्पादन पर जोर दिया। युवाओं को रोजगार मिलने के साथ ही किसान भी समृद्ध और खुशहाल होने लगे लेकिन यह खुशी काफी दिन तक नहीं रह पाई और गलत नीतियों के कारण यह चीनी मिल घाटे में जाने लगी। परिणाम यह हुआ कि करीब 19 वर्ष बाद इस मिल में ताला लटक गया। इससे जहां हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए वहीं किसानों के गन्ना भुगतान का लाखों रुपए भी अटक गया। मिल बंद होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारें आई। बंद मिल को खोलने को लेकर बयानबाजी भी हुई लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। अब योगी सरकार ने बंद चीनी मिलों को खोलने के लिए बजट का प्रावधान किया है। अगर समय की मांग को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने मन से पहल कर दी तो एक बार फिर वही पुरानी खुशहाली वापस हो सकती है।
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