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..और तीसरी बार भी नहीं लगा सके सीसीटीवी कैमरा
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:25 PM IST
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गाजीपुर। जिला कारागार में जेल प्रशासन सीसीटीवी कैमरा से निगरानी कराने में तीसरी बार पूरी तरह असफल साबित हुआ है। गुरुवार को जेल में हुए उपद्रव में बेकाबू हुए कैदियों ने निगरानी के लिए लगाए जा रहे सीसीटीवी कैमरे के वायर को तहस-नहस कर आग के हवाले कर दिया। जेल प्रशासन की यह तीसरी कोशिश थी कि जेल के अंदर सीसीटीवी कैमरे से निगरानी हो। पहली बार यह प्रयास वर्ष 2016 में किया गया था और दूसरी बार 2017 में, लेकिन उस समय भी कैदियों ने सामूहिक धावा बोल सीसीटीवी कैमरों को ध्वस्त कर दिया था। देखा जाए तो वर्तमान में जेल प्रशासन कैदियों के सामने घुटने टेक चुका है। यह न केवल नतमस्तक है, बल्कि पूरी तरह भयभीत भी है।
जिला जेल में कैदियों के रहने के लिए कुल दस बैरक बने हैं। इनके अलावा एक हास्पिटल वार्ड और दो सेल मौजूद हैं। जेल में 326 कैदियों की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में यहां 792 से अधिक कैदी रखे गए हैं। जेल प्रशासन की माने तो यहां 326 कैदी के लिए बनाए गए मानक से भी 40 फीसदी बंदी रक्षक कम हैं। जिला जेल में जेल अधीक्षक, जेलर, दो डिप्टी जेलर तथा 41 बंदी रक्षक तैनात हैं। इन्हीं 41 बंदी रक्षकों के कंधे पर 800 कैदियों के देखरेख का जिम्मा है। जिला जेल में उपद्रव पहली बार नहीं, बल्कि पहले भी दो बार सीसीटीवी कैमरे को लेकर हो चुका है। जेल प्रशासन की माने तो यहां रहने वाले चंद मनबढ़ व दबंग कैदी खुली आजादी चाहते हैं। हाल के दिनों में कड़ी निगरानी, प्रतिदिन तलाशी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना उनको नागवार गुजर रहा था। इसी बात को लेकर वह उत्पात मचा रहे हैं।
जेल में पहली बार वर्ष 2016 से जेल की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने की पहल की गई, लेकिन कैमरे की नजर से बचने के लिए कैदियों ने एकजुट होकर उत्पात मचाया और सीसीटीवी कैमरा लगने से पहले ही उसे नष्ट कर दिया। दूसरी बार जनवरी 2017 में जेल के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया। तब कुल नौ कैमरे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लगाए गए। इसमें उनकी गतिविधियां कैद होने लगीं इससे बौखलाए कैदियों ने जेल में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी। जिसमें नौ सीसीटीवी कैमरों में से छह को तोड़ डाला और वायर तक जला दिए थे। तीसरी बार शुक्रवार को सीसीटीवी कैमरा लगाने से पहले सभी बैरकों के सामने वायर लग रहा था। कैमरा न लगे इसके लिए कैदियों ने एक बार फिर उपद्रव शुरू किया और पथराव, तोड़फोड़ के बाद आगजनी कर पूरा वायर जला दिया। सब कुछ होने के बाद भी जिला कारागार की तलाशी और सीसीटीवी कैमरा लगने का कार्य रुक गया है। देखा जाए तो खूंखार कैदियों के सामने जिला प्रशासन और जेल प्रशासन घुटने टेक चुका है। कैदियों की दबंगई से बंदीरक्षक दहशत में हैं।
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जिला जेल में कैदियों के रहने के लिए कुल दस बैरक बने हैं। इनके अलावा एक हास्पिटल वार्ड और दो सेल मौजूद हैं। जेल में 326 कैदियों की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में यहां 792 से अधिक कैदी रखे गए हैं। जेल प्रशासन की माने तो यहां 326 कैदी के लिए बनाए गए मानक से भी 40 फीसदी बंदी रक्षक कम हैं। जिला जेल में जेल अधीक्षक, जेलर, दो डिप्टी जेलर तथा 41 बंदी रक्षक तैनात हैं। इन्हीं 41 बंदी रक्षकों के कंधे पर 800 कैदियों के देखरेख का जिम्मा है। जिला जेल में उपद्रव पहली बार नहीं, बल्कि पहले भी दो बार सीसीटीवी कैमरे को लेकर हो चुका है। जेल प्रशासन की माने तो यहां रहने वाले चंद मनबढ़ व दबंग कैदी खुली आजादी चाहते हैं। हाल के दिनों में कड़ी निगरानी, प्रतिदिन तलाशी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना उनको नागवार गुजर रहा था। इसी बात को लेकर वह उत्पात मचा रहे हैं।
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जेल में पहली बार वर्ष 2016 से जेल की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने की पहल की गई, लेकिन कैमरे की नजर से बचने के लिए कैदियों ने एकजुट होकर उत्पात मचाया और सीसीटीवी कैमरा लगने से पहले ही उसे नष्ट कर दिया। दूसरी बार जनवरी 2017 में जेल के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया। तब कुल नौ कैमरे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लगाए गए। इसमें उनकी गतिविधियां कैद होने लगीं इससे बौखलाए कैदियों ने जेल में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी। जिसमें नौ सीसीटीवी कैमरों में से छह को तोड़ डाला और वायर तक जला दिए थे। तीसरी बार शुक्रवार को सीसीटीवी कैमरा लगाने से पहले सभी बैरकों के सामने वायर लग रहा था। कैमरा न लगे इसके लिए कैदियों ने एक बार फिर उपद्रव शुरू किया और पथराव, तोड़फोड़ के बाद आगजनी कर पूरा वायर जला दिया। सब कुछ होने के बाद भी जिला कारागार की तलाशी और सीसीटीवी कैमरा लगने का कार्य रुक गया है। देखा जाए तो खूंखार कैदियों के सामने जिला प्रशासन और जेल प्रशासन घुटने टेक चुका है। कैदियों की दबंगई से बंदीरक्षक दहशत में हैं।
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