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लेखपालों को संगठन के दबाव में वेतन देना संभव नहीं
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:07 PM IST
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मुहम्मदाबाद। लेखपाल संघ द्वारा दिए गए मांगपत्र पर तहसीलदार मुहम्मदाबाद द्वारा कड़ा रुख अपनाया गया है। तहसीलदार द्वारा उपजिलाधिकारी को सौंपे गए अपने रिपोर्ट में कहा गया है कि काम न करने वाले लेखपालों को संगठन के दबाव में वेतन देना संभव नहीं है।
मालूम हो कि उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ उप शाखा मुहम्मदाबाद द्वारा पिछले सप्ताह बैठक कर 8 सूत्री मांगपत्र सौंपकर मांगे न मानने पर कलम बंद हडताल की धमकी दी गई थी। जिस पर तहसीलदार मोहनलाल गुप्ता ने उपजिलाधिकारी को प्रस्ताव रिपोर्ट सौंपकर कहा कि लेखपालों द्वारा सप्ताह में एक दिन 2 से 4 बजे तक बैठक लेने की मांग सर्वथा अनुचित है। अधिकांश लेखपाल अपने हलको में नही जाते हैं और जनता शिकायत लेकर तहसील का चक्कर लगाती रहती है। दैवी आपदा की घटनाए एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हो जाते है। लेखपाल घर में सोया रहता है।
शिकायत आने पर जब उसकी खोजबीन होती है तो वह तहसील क्षेत्र से गायब मिलता है और कई बार तो उसे गाड़ी भेजकर बुलवाया जाता है। उदाहरण के तौर पर नागेंद्र प्रताप, संवरू राम, रघुवीर राम एवं रूपचंद्र कुशवाहा आदि लेखपाल शामिल हैं। तहसीलदार गुप्ता ने कहा कि कुछ लेखपालों का वेतन बिना सूचना के गायब रहने के चलते रोका गया है। संगठन का दबाव बनाकर लेखपाल घर सोकर वेतन लेना चाहते है, जो संभव नही है। जुलाई माह का वेतन पूरे जनपद में रोका गया है तथा जून माह में कुछ लेखपालों का वेतन उनकी निष्क्रियता, लापरवाही एवं बिना सूचना के क्षेत्र से गायब रहने एवं बैठकों में न आने के चलते रोका गया है।
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मालूम हो कि उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ उप शाखा मुहम्मदाबाद द्वारा पिछले सप्ताह बैठक कर 8 सूत्री मांगपत्र सौंपकर मांगे न मानने पर कलम बंद हडताल की धमकी दी गई थी। जिस पर तहसीलदार मोहनलाल गुप्ता ने उपजिलाधिकारी को प्रस्ताव रिपोर्ट सौंपकर कहा कि लेखपालों द्वारा सप्ताह में एक दिन 2 से 4 बजे तक बैठक लेने की मांग सर्वथा अनुचित है। अधिकांश लेखपाल अपने हलको में नही जाते हैं और जनता शिकायत लेकर तहसील का चक्कर लगाती रहती है। दैवी आपदा की घटनाए एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा हो जाते है। लेखपाल घर में सोया रहता है।
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शिकायत आने पर जब उसकी खोजबीन होती है तो वह तहसील क्षेत्र से गायब मिलता है और कई बार तो उसे गाड़ी भेजकर बुलवाया जाता है। उदाहरण के तौर पर नागेंद्र प्रताप, संवरू राम, रघुवीर राम एवं रूपचंद्र कुशवाहा आदि लेखपाल शामिल हैं। तहसीलदार गुप्ता ने कहा कि कुछ लेखपालों का वेतन बिना सूचना के गायब रहने के चलते रोका गया है। संगठन का दबाव बनाकर लेखपाल घर सोकर वेतन लेना चाहते है, जो संभव नही है। जुलाई माह का वेतन पूरे जनपद में रोका गया है तथा जून माह में कुछ लेखपालों का वेतन उनकी निष्क्रियता, लापरवाही एवं बिना सूचना के क्षेत्र से गायब रहने एवं बैठकों में न आने के चलते रोका गया है।
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