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कई चुनावों से कांग्रेस और भाकपा को नहीं मिली कामयाबी
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गाजीपुर। स्थानीय संसदीय सीट पर कई बार कामयाबी का परचम लहराने वाली कांग्रेस और भाकपा को पिछले कई चुनावों से सफलता नहीं मिल सकी है। पांच बार सीट पर कब्जा जमाने वाली कांग्रेस को साढ़े तीन दशक एवं तीन बार जीत दर्ज करने वाली भाकपा को करीब ढाई दशक से भी अधिक समय से संसद का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला है।
मिली जानकारी के अनुसार आजादी के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के हरप्रसाद सिंह निर्वाचित घोषित हुए थे। इसके बाद वर्ष 1957 में हुए चुनाव में उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस का परचम लहराया था। वर्ष 1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विश्वनाथ सिंह गहमरी ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 1967 एवं 1971 में भाकपा के सरजू पांडेय भी लगातार दो बार निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1977 के चुनाव में गौरीशंकर राय ने सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 1980 एवं 84 में संपन्न लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के जैनुल बशर ने सीट पर कब्जा जमाया था। 1989 के चुनाव में जगदीश कुशवाहा ने बाजी मारी थी। इसके बाद वर्ष 1991 में भाकपा के विश्वनाथ शास्त्री ने जीत हासिल की। इस तरह से वर्ष 1984 के बाद से कांग्रेस एवं वर्ष 1991 के बाद से भाकपा को इस संसदीय सीट पर सफलता नहीं मिल सकी है। जबकि इसके बाद अब तक हुए कई चुनावों में इन दलों के उम्मीदवारों ने ताल तो ठोंकी लेकिन उन्हें कामयाबी प्राप्त नहीं हुई।
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मिली जानकारी के अनुसार आजादी के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के हरप्रसाद सिंह निर्वाचित घोषित हुए थे। इसके बाद वर्ष 1957 में हुए चुनाव में उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस का परचम लहराया था। वर्ष 1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विश्वनाथ सिंह गहमरी ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 1967 एवं 1971 में भाकपा के सरजू पांडेय भी लगातार दो बार निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1977 के चुनाव में गौरीशंकर राय ने सफलता प्राप्त की थी। वर्ष 1980 एवं 84 में संपन्न लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के जैनुल बशर ने सीट पर कब्जा जमाया था। 1989 के चुनाव में जगदीश कुशवाहा ने बाजी मारी थी। इसके बाद वर्ष 1991 में भाकपा के विश्वनाथ शास्त्री ने जीत हासिल की। इस तरह से वर्ष 1984 के बाद से कांग्रेस एवं वर्ष 1991 के बाद से भाकपा को इस संसदीय सीट पर सफलता नहीं मिल सकी है। जबकि इसके बाद अब तक हुए कई चुनावों में इन दलों के उम्मीदवारों ने ताल तो ठोंकी लेकिन उन्हें कामयाबी प्राप्त नहीं हुई।
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