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आपके पार्टी पर मंडरात बा भीतरघात क खतरा...
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गाजीपुर।लोकसभा चुनाव को लेकर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ संघर्ष, प्रत्याशी आदि को लेकर बहस शुरू हो रही है, वह काफी देर तक चल रही है। कभी धीमी तो कभी जोश में आकर कार्यकर्ता तेज आवाज में भिड़ जा रहे हैं। आलम यह है चुनावी बहस करने वाले वार्ता में इस कदर मशगूल हो जा रहे हैं कि घंटों चल रही बतकही और राजनीतिक माथा-पच्ची में उनका ब्लड प्रेशर हाई और लो होने लग रहा है।
दिलदारनगर रेलवे फाटक पर स्थित रमाशंकर की चाय की दुकान पर रविवार को जो चुनावी बहस शुरु हुई, वह कुछ इस तरह से घंटों जारी रही। राय साहब जय राम जी की। नमस्कार यादव जी। का बात ह राय साहब आज रविवार क छुट्टी लोगन के साथे चाय क दुकाने पर बितावत हई का। हम आधा घंटा पहिले इधर से गुजरल रहली त ओहू समय आप लोग यही पर बइठल रहली जा। आप सही कह रहे हैं यादव जी। हम लोग चुनावी चर्चा में मशगूल हैं। राय साहब गठबंधन के बीच ई बार क चुनावे अइसन होत बा, जेकर चर्चा करल पार्टी के नेता लोगन अऊर जनता का मजबूरी बा। आप क त सरकार ह राय साहब, अऊर आप क पार्टी बहुत कामों करइले बा, एहसे त आप लोगन के चुनाव जीते के चाही। क्या बात कही आपने यादव जी, तबियत खुश कर दिया। सून रहे हैं रमाशंकर जी, जरा यादव जी को भी चाय-नमकीन कराइए। देखिए यादव जी मेरा तो यह मानना है कि जनता को विकास देखना चाहिए। जाति-धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए। सरकार चाहे जिस पार्टी की भी हो, लेकिन विकास करें। जिस तरह से मेरे पार्टी के मंत्री जी ने जिले का विकास किया। वैसा किसी सरकार में किसी मंत्री ने नहीं किया था। रेलवे हो या कोई अन्य क्षेत्र, सभी में विकास दिखाई दे रहा है। काम तो इतना हुआ है, जिसकी जनता ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। इतना विकास कार्य कराने के बाद भी यदि सफलता नहीं मिली तो यह जिले का दुर्भाग्य होगा। आप सही कहत बाड़ी राय साहब, मगर शायद आपके ई अच्छी तरह से याद होई कि जिला में कइगो अइसन सांसद-विधायक भइलन, जऊन तमाम विकास कार्य करइलन, एकरे बाद भी उनके चुनाव में हार क मुंह देखेके पड़ल बा। एहसे ई कहल ठीक ना होई कि विकास कार्य के बदौलत चुनाव जीतल जा सकेला। आप हमरे बात क बुरा मत मानब राय साहब, आपके प्रत्याशी पर भीतरघात क खतरा मंडरात बा। आपने तो यह बात कहके यादव जी मेरा हौसला तोड़ते हुए मुझे उलझन में डाल दिया। आपके इस बात से नेता जी अवगत कराना पड़ेगा ताकि वह सावधान हो जाए और रुठे हुए लोगों को मना सके।
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दिलदारनगर रेलवे फाटक पर स्थित रमाशंकर की चाय की दुकान पर रविवार को जो चुनावी बहस शुरु हुई, वह कुछ इस तरह से घंटों जारी रही। राय साहब जय राम जी की। नमस्कार यादव जी। का बात ह राय साहब आज रविवार क छुट्टी लोगन के साथे चाय क दुकाने पर बितावत हई का। हम आधा घंटा पहिले इधर से गुजरल रहली त ओहू समय आप लोग यही पर बइठल रहली जा। आप सही कह रहे हैं यादव जी। हम लोग चुनावी चर्चा में मशगूल हैं। राय साहब गठबंधन के बीच ई बार क चुनावे अइसन होत बा, जेकर चर्चा करल पार्टी के नेता लोगन अऊर जनता का मजबूरी बा। आप क त सरकार ह राय साहब, अऊर आप क पार्टी बहुत कामों करइले बा, एहसे त आप लोगन के चुनाव जीते के चाही। क्या बात कही आपने यादव जी, तबियत खुश कर दिया। सून रहे हैं रमाशंकर जी, जरा यादव जी को भी चाय-नमकीन कराइए। देखिए यादव जी मेरा तो यह मानना है कि जनता को विकास देखना चाहिए। जाति-धर्म की राजनीति नहीं करनी चाहिए। सरकार चाहे जिस पार्टी की भी हो, लेकिन विकास करें। जिस तरह से मेरे पार्टी के मंत्री जी ने जिले का विकास किया। वैसा किसी सरकार में किसी मंत्री ने नहीं किया था। रेलवे हो या कोई अन्य क्षेत्र, सभी में विकास दिखाई दे रहा है। काम तो इतना हुआ है, जिसकी जनता ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। इतना विकास कार्य कराने के बाद भी यदि सफलता नहीं मिली तो यह जिले का दुर्भाग्य होगा। आप सही कहत बाड़ी राय साहब, मगर शायद आपके ई अच्छी तरह से याद होई कि जिला में कइगो अइसन सांसद-विधायक भइलन, जऊन तमाम विकास कार्य करइलन, एकरे बाद भी उनके चुनाव में हार क मुंह देखेके पड़ल बा। एहसे ई कहल ठीक ना होई कि विकास कार्य के बदौलत चुनाव जीतल जा सकेला। आप हमरे बात क बुरा मत मानब राय साहब, आपके प्रत्याशी पर भीतरघात क खतरा मंडरात बा। आपने तो यह बात कहके यादव जी मेरा हौसला तोड़ते हुए मुझे उलझन में डाल दिया। आपके इस बात से नेता जी अवगत कराना पड़ेगा ताकि वह सावधान हो जाए और रुठे हुए लोगों को मना सके।
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