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बकरीद: बकरों की खरीद के लिए मंडी में उमड़ रही भीड़
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:57 PM IST
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गाजीपुर। ईद-उल-अजहा (कुर्बानी) का पर्व नजदीक आते ही जानवरों की खरीद-फरोख्त का सिलसिला गाजीपुर नगर सहित मुस्लिम बहुल कस्बों एवं गांवों में बढ़ गया है। जानवरों की कद-काठी एवं खूबसूरती के लिहाज से उनकी कीमत लग रही है। देशी, जौनपुरी, जमुनापारी, राजस्थानी नस्लों सहित विभिन्न प्रजातियों के बकरे मंडियों में सैकड़ों की संख्या में उपलब्ध हैं। छह से लेकर 23 और 25 हजार तक में बकरों की बिक्री की जा रही है।
दिलदारनगर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में बकरीद पर्व की धूम दिखाई देने लगी है। दिलदारनगर गांव स्थित बकरी मंडी में चार से लेकर 23 हजार मूल्य तक के बकरे उपलब्ध कराए गए हैं। सुबह छह बजे से शुरू हुई मंडी शाम के छह बजे तक चल रही है। लोग अपनी-अपनी पसंद का बकरा खरीद रहे हैं। गांव के मोनू राईनी ने बताया कि उन्होंने कुर्बानी के लिए 12 हजार रुपये के बकरा की खरीद की है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार स्थानीय बाजार सहित अन्य बाजारों में बकरीद पर्व पर बकरा की बिक्री शुरू हो गई है। कुछ बकरे उनके डील-डौल और खूबसूरती को देखते हुए उनके वास्तविक मूल्य से काफी अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं। व्यवसायी जमील अहमद ने बताया कि इस वर्ष बकरा मंडी की स्थिति सामान्य है। अब तक लगभग छह हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक के बकरे बिके हैं।
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इनसेट
स्वस्थ जानवरों की दें कुर्बानी
बहरियाबाद। जामा मस्जिद के इमाम अब्दुल खालिक ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग इब्राहिमी सुन्नत ईद-उल-अजहा का पर्व जायज जानवरों की कुर्बानी कर मनाते हैं। बड़े जानवर जैसे भैंस या भैंसा सात लोगों के नाम से होते हैं। जबकि छोटे जानवर बकरा, बकरी, भेंड़ आदि एक व्यक्ति के नाम से होते हैं। इसी के साथ शर्त यह भी है कि जानवर मोटा-तगड़ा और स्वस्थ हो। उस जानवर में किसी प्रकार का ऐब न हो। यहां तक कि न उसके कान कटे हों न आंख में ऐब हो। जानवर स्वयं घर पाल कर उसकी कुर्बानी दी जाए तो और बेहतर है। कुर्बानी तीन दिनों तक लगातार होती है, जो पहले दिन ईद की नमाज के बाद प्रारंभ होती है।
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दिलदारनगर संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में बकरीद पर्व की धूम दिखाई देने लगी है। दिलदारनगर गांव स्थित बकरी मंडी में चार से लेकर 23 हजार मूल्य तक के बकरे उपलब्ध कराए गए हैं। सुबह छह बजे से शुरू हुई मंडी शाम के छह बजे तक चल रही है। लोग अपनी-अपनी पसंद का बकरा खरीद रहे हैं। गांव के मोनू राईनी ने बताया कि उन्होंने कुर्बानी के लिए 12 हजार रुपये के बकरा की खरीद की है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार स्थानीय बाजार सहित अन्य बाजारों में बकरीद पर्व पर बकरा की बिक्री शुरू हो गई है। कुछ बकरे उनके डील-डौल और खूबसूरती को देखते हुए उनके वास्तविक मूल्य से काफी अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं। व्यवसायी जमील अहमद ने बताया कि इस वर्ष बकरा मंडी की स्थिति सामान्य है। अब तक लगभग छह हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक के बकरे बिके हैं।
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स्वस्थ जानवरों की दें कुर्बानी
बहरियाबाद। जामा मस्जिद के इमाम अब्दुल खालिक ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग इब्राहिमी सुन्नत ईद-उल-अजहा का पर्व जायज जानवरों की कुर्बानी कर मनाते हैं। बड़े जानवर जैसे भैंस या भैंसा सात लोगों के नाम से होते हैं। जबकि छोटे जानवर बकरा, बकरी, भेंड़ आदि एक व्यक्ति के नाम से होते हैं। इसी के साथ शर्त यह भी है कि जानवर मोटा-तगड़ा और स्वस्थ हो। उस जानवर में किसी प्रकार का ऐब न हो। यहां तक कि न उसके कान कटे हों न आंख में ऐब हो। जानवर स्वयं घर पाल कर उसकी कुर्बानी दी जाए तो और बेहतर है। कुर्बानी तीन दिनों तक लगातार होती है, जो पहले दिन ईद की नमाज के बाद प्रारंभ होती है।
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