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चार वर्ष में भी बनकर तैयार नहीं हो सका रोडवेज डिपो का भवन
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गाजीपुर। रोडवेज बस स्टेशन के भवन का निर्माण करीब चार वर्ष से आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। इसके चलते कर्मचारियों के साथ ही यात्रियों को भी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। पूछताछ काउंटर नहीं होने से कौन सी बस, कब और कहां जाएगी इसका पता नहीं चल पाता। बसें खुले आकाश के नीचे जहां-तहां खड़ी रहती हैं। टर्मिनस नहीं होने से सड़क से ही गंतव्य के लिए रवाना हो जाती है।
वर्ष 2015 में स्थानीय रोडवेज डिपो के नए भवन, प्लेटफार्म, नाली एवं परिसर के निर्माण के लिए पांच करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई। इसके बाद पुराने भवन को गिरा दिया गया। उस समय नए भवन का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ। जब दो मंजिला भवन का ढांचा तैयार हुआ। इसी बीच किसी कारणवश काम ठप हो गया। तब से यह ठप पड़ा हुआ है। डिपो प्रशासन की मानें तो इस कार्य को एक वर्ष में पूरा कर लिया जाना था। इसके लिए कार्यदायी संस्था को अवगत भी कराया गया लेकिन कोई तेजी नहीं आई। भवन निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। इधर पुराना भवन गिरा दिया गया और नया भवन तैयार नहीं हुआ। इसके चलते कर्मचारियों तथा यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। बसों को सड़क पर दूर तक खड़ा किया जाता है। न पूछताछ काउंटर ही है और न ही उद्घोषणा की व्यवस्था। यात्री बस की स्थिति जानने के लिए भटकते रहते हैं। अन्य डिपो की बसें बाहर से ही निकल जाती हैं। इस संबंध में डिपो के संचालन प्रभारी अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि भवन निर्माण में देरी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। बसों के संचालन पर असर पड़ने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
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वर्ष 2015 में स्थानीय रोडवेज डिपो के नए भवन, प्लेटफार्म, नाली एवं परिसर के निर्माण के लिए पांच करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई। इसके बाद पुराने भवन को गिरा दिया गया। उस समय नए भवन का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ। जब दो मंजिला भवन का ढांचा तैयार हुआ। इसी बीच किसी कारणवश काम ठप हो गया। तब से यह ठप पड़ा हुआ है। डिपो प्रशासन की मानें तो इस कार्य को एक वर्ष में पूरा कर लिया जाना था। इसके लिए कार्यदायी संस्था को अवगत भी कराया गया लेकिन कोई तेजी नहीं आई। भवन निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। इधर पुराना भवन गिरा दिया गया और नया भवन तैयार नहीं हुआ। इसके चलते कर्मचारियों तथा यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। बसों को सड़क पर दूर तक खड़ा किया जाता है। न पूछताछ काउंटर ही है और न ही उद्घोषणा की व्यवस्था। यात्री बस की स्थिति जानने के लिए भटकते रहते हैं। अन्य डिपो की बसें बाहर से ही निकल जाती हैं। इस संबंध में डिपो के संचालन प्रभारी अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि भवन निर्माण में देरी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। बसों के संचालन पर असर पड़ने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
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